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दो दिन तक बंकर में ब्रेड खाकर चलाया काम
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बेहट के ताजपुरा में परिवार के साथ काशिफ
- फोटो : SAHARANPUR
रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। ब्लॉक के गांव सढ़ौली हरिया के सुभाष चौधरी की बेटी काजल चौधरी शनिवार को अपने घर पहुंच गई। उसे सुरक्षित देख उसके माता पिता की आंखें खुशी से छलक उठीं। काजल ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद वह कीव में 27 और 28 फरवरी को बंकर में रही। जहां भोजन के रुप में केवल ब्रेड से ही काम चलाना पड़ा। रूस की चेतावनी के बाद वह अन्य छात्रों के साथ चार किमी पैदल चलकर मेट्रो स्टेशन पहुंची। जहां से वह रोमानिया कैम्प पहुंची। उसके वह बाद में रोमानिया से फ्लाइट के द्वारा शुक्रवार रात में दिल्ली पहुंची। काजल चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
कड़ाके की ठंड में किया बार्डर पर इंतजार
बेहट। यूक्रेन की द निप्रो पैथरॉक्स मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा ताजपुरा के सगीर का बेटा काशिफ हसन शनिवार को घर पहुंच गया। उसे लेने पिता व बहनोई मोहम्मद दानिश गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पहुंचे थे। बेटे को देखकर भावुक हुए पिता ने उसे गले लगा लिया। काशिफ ने बताया कि 24 फरवरी निप्रो सिटी में कर्फ्यू लगने के बाद यूनिवर्सिटी डीन ने अलार्म बजने पर बंकर में जाने के निर्देश दिए थे। 26 फरवरी को रूसी सेना ने निप्रो के आसपास हमला शुरू किया तो दो मार्च की सुबह वह बंकर से निकल रेल के माध्यम से 23 घंटे का सफर कर स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंचे। जहां माइनस छह डिग्री तापमान में उन्हें स्लोवाकिया में एंट्री करने के लिए बॉर्डर पर 6 घंटे इंतजार करना पड़ा। इंडियन एंबेसी से संपर्क के बाद मिनी बस से होटल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें फ्लाइट से स्वदेश भेजा गया। काशिफ के पिता डॉ. सगीर हसन व मां फातिमा ने कहा कि उनके बेटे को दूसरा जीवन मिला है और इसके लिए वह पीएम नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं।
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कड़ाके की ठंड में किया बार्डर पर इंतजार
बेहट। यूक्रेन की द निप्रो पैथरॉक्स मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा ताजपुरा के सगीर का बेटा काशिफ हसन शनिवार को घर पहुंच गया। उसे लेने पिता व बहनोई मोहम्मद दानिश गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पहुंचे थे। बेटे को देखकर भावुक हुए पिता ने उसे गले लगा लिया। काशिफ ने बताया कि 24 फरवरी निप्रो सिटी में कर्फ्यू लगने के बाद यूनिवर्सिटी डीन ने अलार्म बजने पर बंकर में जाने के निर्देश दिए थे। 26 फरवरी को रूसी सेना ने निप्रो के आसपास हमला शुरू किया तो दो मार्च की सुबह वह बंकर से निकल रेल के माध्यम से 23 घंटे का सफर कर स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंचे। जहां माइनस छह डिग्री तापमान में उन्हें स्लोवाकिया में एंट्री करने के लिए बॉर्डर पर 6 घंटे इंतजार करना पड़ा। इंडियन एंबेसी से संपर्क के बाद मिनी बस से होटल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें फ्लाइट से स्वदेश भेजा गया। काशिफ के पिता डॉ. सगीर हसन व मां फातिमा ने कहा कि उनके बेटे को दूसरा जीवन मिला है और इसके लिए वह पीएम नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं।

घर वापसी पर काजल का स्वागत करते परिजन- फोटो : SAHARANPUR
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