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जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने से सशक्त होंगी महिलाएं
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अपराजिता कार्यक्रम में भाग लेते बच्चे
- फोटो : SAHARANPUR
शाकंभरी (सहारनपुर)। फतेहपुर कलां स्थित भगवती देवी मंदिर स्कूल में बृहस्पतिवार को अमर उजाला द्वारा आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में नारी सशक्तिकरण पर भाषण, निबंध एवं कविता प्रतियोगिताओं का आयोजित किया गया। इनके माध्यम से छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने नारी सशक्तिकरण पर अपनी राय रखी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले कक्षा आठ के छात्र अतुल चौहान ने कहा कि नारी को अब अपना अधिकार समझकर देश को नई दिशा देनी होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जला कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है, जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है, जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सकें। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे हैं, जहां महिलाएं परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता खुद हो। उप प्रधानाचार्य अरुणा चौहान ने कहा, कि महिला सशक्तिकरण के बिना देश व समाज में नारी को असली स्थान नहीं मिल सकता, जिसकी वह हमेशा से हकदार रही है।
कार्यक्रम में निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने समाज में नारी की स्थिति और महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता के बारे में अपनी राय लिखी। भाषण प्रतियोगिता में भी छात्रों एवं शिक्षकों ने महिलाओं को उनके अधिकार दिए जाने की वकालत की।
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इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कक्षा 8 के अतुल चौहान ने कहा कि नारी को अब अपना अधिकार समझकर देश को नई दिशा देनी होगी।
द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. माही चौहान ने कहा कि महिलाएं आज के इस आधुनिक युग में अपने अधिकारों से वंचित हैं। उनको अपने अधिकार लेने के लिए आगे आना होगा।
तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. आफिया ने कहा कि महिलाएं अब घूंघट में न रहकर समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहीं हैं, जो प्रशंसनीय है।
निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कु. अंजलि शर्मा ने कहा कि समाज की पहचान ही महिला से है। वह हर रूप मां, बेटी, पत्नी के रूप में समाज की सेवा कर रहीं हैं।
द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. आरती ने कहा कि पुरानी और रूढ़िवादी विचारधाराओं के चलते आज भी महिलाएं घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी है हम सबको इसका विरोध कर इस परंपरा को समाप्त कराना होगा।
तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. खुशी ने कहा कि वैश्विक लिंग और गैर सूचकांक के अनुसार उच्च शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के द्वारा समाज की महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
कविता प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से नारी शक्ति का उल्लेख किया।
ना मैं अबला हूं, ना ही मैं बेचारी हूं। मैं शक्ति स्वरूपा नारी हूं। कुणाल चौहान, कक्षा-6
उखाड़ फेंका हर दुश्मन को जिसने झांसी का अपमान किया, मर्दानी की परिभाषा बनकर आजादी का पैगाम दिया। नव्या, कक्षा-6
एक-एक वो अधिकार समझ लें नारी नहीं बेचारी, जो नारी ये बात ना समझे रोवे उम्र है सारी। अतुल चौहान, कक्षा-8
दुनिया की पहचान है औरत, घर- घर की जान है औरत, बेटी, बहन, मां और पत्नी बनकर घर-घर की शान है औरत। आयुषि कक्षा-6
अपने हौसलों से तकदीर को बदल दूं, सुन लें दुनिया वाले हां मैं औरत हूं। नंदिनी चौहान, कक्षा-7
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कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जला कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है, जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है, जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सकें। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे हैं, जहां महिलाएं परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता खुद हो। उप प्रधानाचार्य अरुणा चौहान ने कहा, कि महिला सशक्तिकरण के बिना देश व समाज में नारी को असली स्थान नहीं मिल सकता, जिसकी वह हमेशा से हकदार रही है।
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कार्यक्रम में निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने समाज में नारी की स्थिति और महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता के बारे में अपनी राय लिखी। भाषण प्रतियोगिता में भी छात्रों एवं शिक्षकों ने महिलाओं को उनके अधिकार दिए जाने की वकालत की।
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इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कक्षा 8 के अतुल चौहान ने कहा कि नारी को अब अपना अधिकार समझकर देश को नई दिशा देनी होगी।
द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. माही चौहान ने कहा कि महिलाएं आज के इस आधुनिक युग में अपने अधिकारों से वंचित हैं। उनको अपने अधिकार लेने के लिए आगे आना होगा।
तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. आफिया ने कहा कि महिलाएं अब घूंघट में न रहकर समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहीं हैं, जो प्रशंसनीय है।
निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कु. अंजलि शर्मा ने कहा कि समाज की पहचान ही महिला से है। वह हर रूप मां, बेटी, पत्नी के रूप में समाज की सेवा कर रहीं हैं।
द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. आरती ने कहा कि पुरानी और रूढ़िवादी विचारधाराओं के चलते आज भी महिलाएं घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी है हम सबको इसका विरोध कर इस परंपरा को समाप्त कराना होगा।
तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली कु. खुशी ने कहा कि वैश्विक लिंग और गैर सूचकांक के अनुसार उच्च शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के द्वारा समाज की महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
कविता प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से नारी शक्ति का उल्लेख किया।
ना मैं अबला हूं, ना ही मैं बेचारी हूं। मैं शक्ति स्वरूपा नारी हूं। कुणाल चौहान, कक्षा-6
उखाड़ फेंका हर दुश्मन को जिसने झांसी का अपमान किया, मर्दानी की परिभाषा बनकर आजादी का पैगाम दिया। नव्या, कक्षा-6
एक-एक वो अधिकार समझ लें नारी नहीं बेचारी, जो नारी ये बात ना समझे रोवे उम्र है सारी। अतुल चौहान, कक्षा-8
दुनिया की पहचान है औरत, घर- घर की जान है औरत, बेटी, बहन, मां और पत्नी बनकर घर-घर की शान है औरत। आयुषि कक्षा-6
अपने हौसलों से तकदीर को बदल दूं, सुन लें दुनिया वाले हां मैं औरत हूं। नंदिनी चौहान, कक्षा-7

शाकंभरी क्षेत्र के फतेहपुर कलां में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में भाग लेते शिक्षक।- फोटो : SAHARANPUR

उप प्रधानाचार्यो अरुणा चौहान- फोटो : SAHARANPUR

प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

अतुल चौहान- फोटो : SAHARANPUR

माही चौहान- फोटो : SAHARANPUR

आयूषी- फोटो : SAHARANPUR