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दूध, हलवा और खिचड़ी संग, कुपोषण से होगी जंग
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जिला अस्पताल में बच्चे की जांच करते चिकित्सक
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कुपोषित बच्चे केवल संबंधित परिवार ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए चिंता का विषय हैं, लेकिन यदि कुपोषित बच्चों को सही खानपान और देखभाल मिले तो उनकी सेहत में सात से 28 दिन में काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है। बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए उनको दूध, हलवा और खिचड़ी दी जाएगी, जिसे लोग घर पर भी तैयार कर सकते हैं। एसबीडी जिला अस्पताल परिसर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र बीते करीब सात साल में 1,170 बच्चों का कुपोषण दूर कर चुका है।
जिला अस्पताल परिसर में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना 21 दिसंबर 2015 को की गई थी। यहां दस बेड की व्यवस्था है। आंगनबाड़ी और आशाओं के द्वारा कुपोषित बच्चों को यहां लाया जाता है। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाले बच्चों को चिकित्सक खुद चिह्नित कर उनकी जांच कराते हैं। यदि वह कुपोषित होते हैं तो उनको केंद्र में रखा जाता है। केंद्र में बच्चों को सात से 28 दिन तक रखने की व्यवस्था है। यहां एनएचएम द्वारा निर्धारित डाइट दी जाती है। लक्ष्य बच्चे के कुल वजन में कम से कम 15 फीसदी की वृद्धि करना होता है। जितने भी दिन में बच्चा इस वजन को प्राप्त कर लेता है तो उसकी छुट्टी कर दी जाती है। छुट्टी करने के बाद फॉलोअप के लिए बच्चे को समय-समय पर चार बार बुलाया जाता है, जिसमें बच्चे का वजन आदि लिया जाता है, जब लगता है कि बच्चे का वजन बढ़ना शुरू हो गया है तो उसे पोषित मान लिया जाता है। यदि फॉलोअप में यह दिखता है कि बच्चे की वजन फिर से कम हो रहा है तो उसे पुन: भर्ती कर पोषण दिया जाता है। वर्तमान में दस बेड के केंद्र में 11 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें दो सगे भाई और बहन शामिल हैं। केंद्र में केवल पांच वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्चों को रखने का प्रावधान है।
दूध, हलवा और खिचड़ी की विशेषताएं
पोषण पुनर्वास केंद्र की डायटीशियन इरम नाज ने बताया कि यहां बच्चों को हर दो घंटे में एफ-100 दिया जाता है। यह दूध का मिश्रण है। इसमें दूध में पोषण बढ़ाने वाले इंजेक्शन, नारियल का तेल और अन्य चीजें डाली जाती हैं। यह हर दो घंटे में पिलाया जाता है। इसके अलावा सुबह नाश्ते में हलवा दिया जाता है जो नारियल के तेल में पकाया जाता है। हलवे में सूजी के साथ मूंग की दाल, बेसन आदि मिलाए जाते हैं। इसके अलावा खिचड़ी खिलाई जाती है। खिचड़ी में चावल के हरी सब्जियां डाली जाती हैं।
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पैसा भी देती है सरकार
जिन भी बच्चों को चिकित्सक पोषण पुनर्वास केंद्र में रखने की सलाह देते हैं। जितने भी दिन बच्चा केंद्र में रहता है। उतने दिन तक बच्चे की माता के बैंक खाते में 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। यह पैसा बच्चे के पोषण पर खर्च के लिए दिया जाता है। इसके अलावा छुट्टी होने के बाद चार फॉलोअप होते हैं। यानी चार बार महिला अपने बच्चे को लाकर वजन आदि कराती है। प्रत्येक बार के 140 रुपये अलग से माता के खाते में भेजे जाते हैं।
कुपोषितों की संख्या घटी, अतिकुपोषित बढ़े
बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनपद में वर्तमान में कुपोषित बच्चों की संख्या 12,554 है, जबकि इनसे अलग 4,410 अतिकुपोषित बच्चे हैं। वर्ष 2020 में कुपोषित बच्चों की संख्या 20, 000 से अधिक थी। यानी कुपोषितों की संख्या में करीब आठ हजार की कमी आई है, जबकि अति कुपोषित 1,900 से अधिक थे। यानी अतिकुपोषितों की संख्या बढ़ी है, जो चिंता का विषय है।
पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए अच्छा कार्य कर रहा है। सात साल में 1,170 से अधिक बच्चों का कुपोषण दूर किया जा चुका है। प्रयास यही है कि जितने भी बच्चे यहां आएं वह पोषित होकर घर लौटें।
डॉ. एके चौधरी, नोडल अधिकारी, पोषण पुनर्वास केंद्र।
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जिला अस्पताल परिसर में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना 21 दिसंबर 2015 को की गई थी। यहां दस बेड की व्यवस्था है। आंगनबाड़ी और आशाओं के द्वारा कुपोषित बच्चों को यहां लाया जाता है। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाले बच्चों को चिकित्सक खुद चिह्नित कर उनकी जांच कराते हैं। यदि वह कुपोषित होते हैं तो उनको केंद्र में रखा जाता है। केंद्र में बच्चों को सात से 28 दिन तक रखने की व्यवस्था है। यहां एनएचएम द्वारा निर्धारित डाइट दी जाती है। लक्ष्य बच्चे के कुल वजन में कम से कम 15 फीसदी की वृद्धि करना होता है। जितने भी दिन में बच्चा इस वजन को प्राप्त कर लेता है तो उसकी छुट्टी कर दी जाती है। छुट्टी करने के बाद फॉलोअप के लिए बच्चे को समय-समय पर चार बार बुलाया जाता है, जिसमें बच्चे का वजन आदि लिया जाता है, जब लगता है कि बच्चे का वजन बढ़ना शुरू हो गया है तो उसे पोषित मान लिया जाता है। यदि फॉलोअप में यह दिखता है कि बच्चे की वजन फिर से कम हो रहा है तो उसे पुन: भर्ती कर पोषण दिया जाता है। वर्तमान में दस बेड के केंद्र में 11 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें दो सगे भाई और बहन शामिल हैं। केंद्र में केवल पांच वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्चों को रखने का प्रावधान है।
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दूध, हलवा और खिचड़ी की विशेषताएं
पोषण पुनर्वास केंद्र की डायटीशियन इरम नाज ने बताया कि यहां बच्चों को हर दो घंटे में एफ-100 दिया जाता है। यह दूध का मिश्रण है। इसमें दूध में पोषण बढ़ाने वाले इंजेक्शन, नारियल का तेल और अन्य चीजें डाली जाती हैं। यह हर दो घंटे में पिलाया जाता है। इसके अलावा सुबह नाश्ते में हलवा दिया जाता है जो नारियल के तेल में पकाया जाता है। हलवे में सूजी के साथ मूंग की दाल, बेसन आदि मिलाए जाते हैं। इसके अलावा खिचड़ी खिलाई जाती है। खिचड़ी में चावल के हरी सब्जियां डाली जाती हैं।
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पैसा भी देती है सरकार
जिन भी बच्चों को चिकित्सक पोषण पुनर्वास केंद्र में रखने की सलाह देते हैं। जितने भी दिन बच्चा केंद्र में रहता है। उतने दिन तक बच्चे की माता के बैंक खाते में 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। यह पैसा बच्चे के पोषण पर खर्च के लिए दिया जाता है। इसके अलावा छुट्टी होने के बाद चार फॉलोअप होते हैं। यानी चार बार महिला अपने बच्चे को लाकर वजन आदि कराती है। प्रत्येक बार के 140 रुपये अलग से माता के खाते में भेजे जाते हैं।
कुपोषितों की संख्या घटी, अतिकुपोषित बढ़े
बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनपद में वर्तमान में कुपोषित बच्चों की संख्या 12,554 है, जबकि इनसे अलग 4,410 अतिकुपोषित बच्चे हैं। वर्ष 2020 में कुपोषित बच्चों की संख्या 20, 000 से अधिक थी। यानी कुपोषितों की संख्या में करीब आठ हजार की कमी आई है, जबकि अति कुपोषित 1,900 से अधिक थे। यानी अतिकुपोषितों की संख्या बढ़ी है, जो चिंता का विषय है।
पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए अच्छा कार्य कर रहा है। सात साल में 1,170 से अधिक बच्चों का कुपोषण दूर किया जा चुका है। प्रयास यही है कि जितने भी बच्चे यहां आएं वह पोषित होकर घर लौटें।
डॉ. एके चौधरी, नोडल अधिकारी, पोषण पुनर्वास केंद्र।