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‘कहां जाओगे बांके बिहारी, होली होगी हमारी तुम्हारी..’

Wed, 16 Mar 2022 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 11:42 PM IST
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'Where will Banke Bihari go, Holi will be yours..'
होली की खबर- देवबंद निवासी बबीता। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिंदगी की आपाधापी, युवाओं की बेरुखी व स्मार्ट फोन ने पारंपरिक त्योहारों, रीति रिवाजों और परंपराओं पर ग्रहण लगा दिया है। फाल्गुन में होली के पर्व का उल्लास कम हो गया है। बदलाव की बयार में होली के लोकगीत ‘होली आई रे कन्हाई रंग बरसे..’ और ‘कहां जाओगे बांके बिहारी, होली होगी हमारी तुम्हारी..’ की गूंज हर जगह नहीं सुनाई देती है।
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गांवों में भी रंगोत्सव की उमंग को लगा ग्रहण
होली की मस्ती महीनों नहीं, बल्कि चंद घंटों में सिमट गई है। करीब दो दशक पहले शहर के मोहल्लों और देहात की गलियों में बच्चों और युवाओं की टोलियां करीब एक महीने पहले से होलिका दहन की लकड़ी के लिए चंदा एकत्र करना शुरू कर देते थे। गांवों में सांझ ढलने पर ग्रामीण एकत्र होकर जश्न मनाते थे। गांव में स्वांग होते थे। अब यह परंपरा गुम हो गई।
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लोकगीतों की रहती थी धूम
देवबंद निवासी बबीता कहती हैं पहले सामूहिक रूप से गली मोहल्लों में महिलाओं की टोलियां लोकगीत गाती थीं। ‘कहां जाओगे बांके बिहारी, होली होगी हमारी तुम्हारी’ ‘आज ब्रज में होली रे रसिया, कहीं घनी कहीं थोड़ी रे रसिया’ पर जमकर होली का के रंगों में सरोबार हो जाती थीं। परिवार की महिलाएं होली गीतों पर नृत्य करती थीं।
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उल्लास और समरसता का रहता था रंग
गंगोह की अंजलि मित्तल का कहना है पहले होली पर समरसता की भावनाएं रहती थीं। होली खेलों चारों भैया, जमुना के तट पर सरयू के तट पर.. और ‘राधा श्याम चकोरी कैसे खेल रहे संग होली, ‘आगे-आगे श्याम चलत पीछे राधा प्यारी’ आदि लोकगीत होली के उल्लास और समरसता का रंग बिखरता था। सामूहिक रूप से महिलाएं नृत्य करती थी।
कान्हा संग होली खेलने का बढ़ा क्रेज
होली पर कान्हा का सुंदर मंदिर सजाकर फूलों से होली खेलती और सामूहिक रूप से महिलाएं ठाकुर जी के कीर्तन में भजनों पर नृत्य करती हैं। मेरा खो गया बाजूबंद रसिया होली में..पर महिलाएं झूमती हैं। जनता रोड निवासी बाला कहती हैं, अब नटखट कान्हा संग फूलों से होली खेलने का रिवाज चरम पर है। घर-घर कान्हा विराजमान है। नए अंदाज में कान्हा के भजनों पर फूलों और खुशबूदार गुलाब की पत्तियों से घर आंगन सजता है और महिलाएं नृत्य कर सतरंगी गुलाल उड़ाकर जश्न मनाती हैं।

बच्चों के आइटमों से सजती है मेवों की माला
होलिका दहन पर बच्चों की जिद्द के सामने परंपरा में बदलाव आ गया है। आजकल मेवों के मालाओं में मेवे कम बल्कि टॉफी, चिप्स एवं चॉकलेट आदि का चलन बढ़ा है। मंजू मित्तल, मीनाक्षी आदि कहती हैं बदलाव में बच्चों को लुभाने वाले आइटम मेवों के हार में लगाए जाते हैं।

होली की खबर- गंगोह निवासी अंजलि मित्तल

होली की खबर- गंगोह निवासी अंजलि मित्तल- फोटो : SAHARANPUR

होली की खबर- सहारनपुर निवासी बाला।

होली की खबर- सहारनपुर निवासी बाला।- फोटो : SAHARANPUR

होली की खबर--छात्रा वंशिका ने कान्हा संग खेली होली।

होली की खबर--छात्रा वंशिका ने कान्हा संग खेली होली।- फोटो : SAHARANPUR

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