अपराजिता: जब नारी में शक्ति सारी, फिर नारी को क्यों कहलाए 'बेचारी', छात्राओं ने रखी बेबाक राय
अध्यापिका मोनिका ने कहा कि नारी का सबसे पवित्र रूप मां में देखने को मिलता है और ईश्वर की जन्मदात्री नारी ही है। मां देवकी ने कृष्ण व मां पार्वती ने गणपति व कार्तिकेय को जन्म दिया हैं। अनीता डंगवाल ने कहा वर्तमान में लड़कियां हर क्षेत्र में बाजी मार रही है। यदि देखा जाए तो किसी भी बच्चे में संस्कार भरने का काम महिला द्वारा ही किया जाता है, क्योंकि बच्चों की प्रथम गुरु एक मां ही होती है। सविता शर्मा ने कहा कि छात्राएं खुद को किसी से भी कमतर न आंके।
छात्रा खुशी छोक्कर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी दुर्गा, लक्ष्मी आदि को यथोचित सम्मान दिया गया है। कहा कि अमर उजाला की अपराजिता मुहिम बहुत सराहनीय है इस मुहिम से महिलाओं के अंदर छिपी अतुलनीय शक्ति को जगाने का काम किया जा रहा है।
छात्रा नताशा पंवार ने कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी छेड़ो मत जल जाओगे, दुर्गा और काली हूं मैं। परिवार का सम्मान, मां बाप का अभिमान हूं मैं। सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूं मैं, नए-नए रिश्तों को बनाने वाली रीत हूं मैं। रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूं मैं, जिसको हर मुश्किल में संभाला उस पिता की बेटी हूं मैं। छात्रा कोमल पंवार ने कहा कि अब जरूरत है संकीर्ण सोच बदलने की, अब जरूरत है महिलाओं का सशक्त बनाने की।
छात्रा सिमरन ने कहा कि अपराजिता बनने के लिए अपने खुद पर भरोसा करना है। बरसो से महिलाओं पर थोपे गए रूढ़िवादिता रीति रिवाजों ने उसे कमजोर कर दिया है जब तक महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर स्वयं खड़ी नहीं होगी, यह पुरुष प्रधान समाज उसका शोषण करता रहेगा। कहा कि जब नारी में शक्ति सारी, फिर नारी को क्यों कहे बेचारी।