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Saharanpur: अकाल पड़ने पर देवताओं की तपस्या से प्रसन्न हो प्रकट हुई थी मां शाकंभरी
Sun, 15 Oct 2023 01:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 15 Oct 2023 01:16 AM IST
सार
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में आज से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। आज से दो दिवसीय मेले का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने का अनुमान है।
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श्री शाकंभरी सिद्वपवीठ मंदिर में स्थापित माता की मूर्तियां। संवाद
विस्तार
शाकंभरी। जनपद मुख्यालय से 45 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों में स्थित पश्चिमी यूपी का विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इस स्थान पर मां दुर्गा अकाल पड़ने पर देवताओं द्वारा की गई तपस्या के बाद मां शाकंभरी के रूप में प्रकट हुई थी। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तशती, पदम पुराण, कनक धारा स्रोत में मिलता है।
सिद्धपीठ के बारे में मान्यता है प्राचीन काल में दुर्ग नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर वरदान में चारों वेद मांगे। दैत्यों के हाथ चारों वेद लगने से सभी वैदिक क्रियाएं लुप्त हो गईं। परिणाम स्वरूप 100 साल तक वर्षा नहीं हुई, जिस कारण तीनों लोक में अकाल पड़ गया। त्राहि-त्राहि मचने पर देवताओं ने शिवालिक पर्वत की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की।
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सिद्धपीठ के बारे में मान्यता है प्राचीन काल में दुर्ग नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर वरदान में चारों वेद मांगे। दैत्यों के हाथ चारों वेद लगने से सभी वैदिक क्रियाएं लुप्त हो गईं। परिणाम स्वरूप 100 साल तक वर्षा नहीं हुई, जिस कारण तीनों लोक में अकाल पड़ गया। त्राहि-त्राहि मचने पर देवताओं ने शिवालिक पर्वत की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की।
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देवताओं की करुण पुकार सुनकर करुणामयी मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हो गई। देवताओं ने उनसे तीनों लोक का अकाल मिटाने की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शत नेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्रु वृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। सभी सागर एवं नदियां जल से भर गई। मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक एवं फल उत्पन्न किए जिसके बाद वह माता शाकंभरी कहलाई।
आज से शुरू होगा 15 दिवसीय मेला
शाकंभरी। सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में आज से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने का अनुमान है। जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी मांगेराम ने बताया कि मेले का उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी शाम चार बजे करेंगे।
आज से शुरू होगा 15 दिवसीय मेला
शाकंभरी। सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में आज से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने का अनुमान है। जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी मांगेराम ने बताया कि मेले का उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी शाम चार बजे करेंगे।
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मेला इंचार्ज अविनाश गौतम ने बताया कि मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 58 सब इंस्पेक्टर/सब इंस्पेक्टर, 6 महिला सब इंस्पेक्टर, 140 हेड कांस्टेबल, 65 महिला कांस्टेबल, 40 होमगार्ड, 22 ट्रैफिक सिपाही, दो एपी गारद, एक कंपनी पीएसी, दो फायर ब्रिगेड, एक टीम एलआईयू, एक टीम मेटल डिटेक्टर जल्द ही मेले में पहुंच जाएगी।
शरीर को शुद्ध रखने की प्रक्रिया है नवरात्र
अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी सहजानंद ब्रह्मचारी जी ने बताया शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति देवी दुर्गा उसके नौ रूपों की विशेष आराधना की जाती है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक वर्ष की चार संधियां हैं। उनमें मार्च और सितंबर-अक्तूबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में वर्ष के दो मुख्य नवरात्र हैं। इस समय रोगों से ग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं।
शरीर को शुद्ध रखने की प्रक्रिया है नवरात्र
अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी सहजानंद ब्रह्मचारी जी ने बताया शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति देवी दुर्गा उसके नौ रूपों की विशेष आराधना की जाती है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक वर्ष की चार संधियां हैं। उनमें मार्च और सितंबर-अक्तूबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में वर्ष के दो मुख्य नवरात्र हैं। इस समय रोगों से ग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं।