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तैयार धान की फसल में भरा पानी, हुआ भारी नुकसान
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बरसात में गिरी फसल धान की
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। बरसात के चलते कई स्थानों पर धान के खेतों में पानी जमा हो गया है। जिन खेतों में धान कटा हुआ पड़ा है, वहां फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। नमी और दाना काला होने के कारण फसल बेचने में भी परेशानी हो सकती है।
जनपद में धान की कटाई का कार्य जोरों पर है, लेकिन बारिश के चलते जनपद में कई स्थानों पर धान के खेत में पानी भर गया है। जिससे धान की कटाई प्रभावित हो गई है। जिन खेतों में धान की फसल नीचे गिर गई है या खेत में कटी पड़ी है उसमें धान का दाना काला पड़ने की आशंका है। इसका विपरीत प्रभाव धान की बिक्री पर भी पड़ेगा। क्योंकि सरकारी केंद्रों पर खरीद के समय धान में 17 प्रतिशत नमी ही स्वीकार्य है, इससे ज्यादा नमी होने पर धान नहीं खरीदा जा सकता है। काला दाना (डैमेज) पांच फीसदी ही लिया जा सकता है। बरसात के कारण यह दोनों ही मानक पूरे करने किसानों के लिए बहुत मुश्किल होंगे।
कटाई में देरी से रबी की फसलें होंगी पछेती
जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। आमतौर पर धान की कटाई के बाद शरदकालीन गन्ने की बुआई होती है। जिन खेतों में पानी भरा है उनमें धान कटाई में देरी हो रही है। इस कारण गन्ना के अलावा गेेहूं, सरसों से लेकर चारे की बरसीम आदि की फसल भी पछेती हो जाएंगी।
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आलू में नुकसान की आशंका
जनपद में आलू की खेती मात्र 520 हेक्टेयर में होती है। जिन किसानों ने आलू की बुआई कर दी है और खेत में बरसात के कारण पानी भर गया है। उन खेतों में आलू के बीज के गलने की आशंका है। यदि जल्द ही पानी नहीं सूखा तो आलू को काफी नुकसान हो सकता है।
किसान बोले, धान बेचना होगा मुश्किल
बड़गांव क्षेत्र के गांव दल्हेड़ी निवासी किसान अरुण कुमार का कहना है कि बरसात ने धान की फसल को बिगाड़ कर रख दिया है। धान की आधी फसल को नुकसान पहुंचा है। जो फसल भीगी है, उसे बेचना मुश्किल होगा।
सुल्तानपुर निवासी बिजेंद्र सैनी ने बताया कि फसल में अब भी पानी भरा है। खादर क्षेत्र में करीब में दस बीघा धान की फसल गिर गई। धान गिरने से दाना काला पड़ने के साथ ही फसल अंकुरित भी होने लगे हैं।
जनपद में धान की फसल का बीमा मात्र 1245 किसानों ने ही करा रखा है। इनमें से किसी ने भी अभी तक फसल खराब होने पर क्लेम के लिए संपर्क नहीं किया है। बरसात के कारण जिले में कई स्थानों पर धान की फसल गिर गई है। नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
-- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।
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जनपद में धान की कटाई का कार्य जोरों पर है, लेकिन बारिश के चलते जनपद में कई स्थानों पर धान के खेत में पानी भर गया है। जिससे धान की कटाई प्रभावित हो गई है। जिन खेतों में धान की फसल नीचे गिर गई है या खेत में कटी पड़ी है उसमें धान का दाना काला पड़ने की आशंका है। इसका विपरीत प्रभाव धान की बिक्री पर भी पड़ेगा। क्योंकि सरकारी केंद्रों पर खरीद के समय धान में 17 प्रतिशत नमी ही स्वीकार्य है, इससे ज्यादा नमी होने पर धान नहीं खरीदा जा सकता है। काला दाना (डैमेज) पांच फीसदी ही लिया जा सकता है। बरसात के कारण यह दोनों ही मानक पूरे करने किसानों के लिए बहुत मुश्किल होंगे।
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कटाई में देरी से रबी की फसलें होंगी पछेती
जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। आमतौर पर धान की कटाई के बाद शरदकालीन गन्ने की बुआई होती है। जिन खेतों में पानी भरा है उनमें धान कटाई में देरी हो रही है। इस कारण गन्ना के अलावा गेेहूं, सरसों से लेकर चारे की बरसीम आदि की फसल भी पछेती हो जाएंगी।
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आलू में नुकसान की आशंका
जनपद में आलू की खेती मात्र 520 हेक्टेयर में होती है। जिन किसानों ने आलू की बुआई कर दी है और खेत में बरसात के कारण पानी भर गया है। उन खेतों में आलू के बीज के गलने की आशंका है। यदि जल्द ही पानी नहीं सूखा तो आलू को काफी नुकसान हो सकता है।
किसान बोले, धान बेचना होगा मुश्किल
बड़गांव क्षेत्र के गांव दल्हेड़ी निवासी किसान अरुण कुमार का कहना है कि बरसात ने धान की फसल को बिगाड़ कर रख दिया है। धान की आधी फसल को नुकसान पहुंचा है। जो फसल भीगी है, उसे बेचना मुश्किल होगा।
सुल्तानपुर निवासी बिजेंद्र सैनी ने बताया कि फसल में अब भी पानी भरा है। खादर क्षेत्र में करीब में दस बीघा धान की फसल गिर गई। धान गिरने से दाना काला पड़ने के साथ ही फसल अंकुरित भी होने लगे हैं।
जनपद में धान की फसल का बीमा मात्र 1245 किसानों ने ही करा रखा है। इनमें से किसी ने भी अभी तक फसल खराब होने पर क्लेम के लिए संपर्क नहीं किया है। बरसात के कारण जिले में कई स्थानों पर धान की फसल गिर गई है। नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
-- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।