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जल निगम की परीक्षा में 300 में से 125 हैंडपंप फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 20 May 2016 12:00 AM IST
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सूख्ाे हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में डार्क जोन में जा चुके सहारनपुर में पूरा जिला पानी की समस्या से जूझ रहा है। लगातार जलस्तर गिरने से हैंडपंपों के हलक सूखते जा रहे हैं, जो हैंडपंप पानी दे रहे हैं उनमें से भी कुछ गांवों के हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है।
हिंडन, कृष्णा जैसी नदियों के प्रदूषित पानी और कुछ फैक्ट्रियों द्वारा सीधे जमीन में डाले जा रहे केमिकल युक्त पानी ने भूगर्भ जल को भी प्रदूषित कर डाला है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब प्रदूषित पानी से होने वाली भयंकर बीमारियां पूरे जिले को ही अपनी चपेट में ले लेंगी।
यह संकेत जल निगम की रिपोर्ट दे रही है कि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जिले से पीने योग्य पानी खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार हैंडपंपों के पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
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पिछले तीन माह में जल निगम द्वारा लगभग 300 हैंडपंपों के पानी की जांच की गई। इनमें से 125 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। यह हालत तो उन गांवों के हैं, जो हिंडन नदी से कुछ दूरी पर हैं। जबकि हिंडन नदी के किनारे के 20 गांवों की तो हालत और भी खराब है।
पानी की जांच में 125 हैंडपंपों के पानी में नाइट्रेट, नाईट्राइट, आयरन और टर्बिडिटी की मात्रा काफी अधिक रही। हार्डनेस भी पानी में काफी पाया गया। जल निगम ने इन हैंडपंपों पर लाल रंग से क्रास का निशान लगाकर उन पर पानी पीने योग्य नहीं है, लिखे जाने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं
जिन गांवों के हैंडपंपों का जल निगम की जांच में पीने योग्य नहीं पाया गया उनमें पिठौरी, नगला झंडा, पथरवा, टोली, नवाजपुर, बुढ़नपुर, चिंबाबांस, मुजफ्फरी, पानसर, मंडौरा, पुजनेकी, खजूरहेड़ी, नल्हेड़ा बुड्ढाखेड़ा, मुकंदपुर उर्फ मकनपुर, सरखड़ी, शेखपुर कदीम, रणखंडी, साल्हापुर, भनेड़ा, पांडुखेड़ी, भगवानपुर, लाखनौर, भनेड़ा खेमचंद, घोघरेकी, अध्याना, बिलासपुर, ख्सजूरी, लाखनोर, परागपुर, जमापुर बेरी, अब्दुल्लापुर, धर्मपुर गुर्जर, अलीपुर, सढ़ौली हरिया, मिर्जापुर, टपरी, सब्बीरपुर, बेहड़ा, तासीपुर समेत कई गांव शामिल हैं।
इन गांवों में पेयजल योजनाएं नहीं
शासन द्वारा सिर्फ उन्हीं गांवों में पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश दिए हैं जिनमें पानी की जांच में आर्सेनिक और फ्लोराइड पाया जाए। लेकिन यहां की स्थिति अलग है। यहां के पानी में नाइट्रेट, नाईट्राइट, आयरन, टर्बिडिटी और हार्डनेस की अधिकता है। बेशक यह पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन शासनादेश के अनुसार यहां पेयजल योजनाओं की प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
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हिंडन, कृष्णा जैसी नदियों के प्रदूषित पानी और कुछ फैक्ट्रियों द्वारा सीधे जमीन में डाले जा रहे केमिकल युक्त पानी ने भूगर्भ जल को भी प्रदूषित कर डाला है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब प्रदूषित पानी से होने वाली भयंकर बीमारियां पूरे जिले को ही अपनी चपेट में ले लेंगी।
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यह संकेत जल निगम की रिपोर्ट दे रही है कि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जिले से पीने योग्य पानी खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार हैंडपंपों के पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
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पिछले तीन माह में जल निगम द्वारा लगभग 300 हैंडपंपों के पानी की जांच की गई। इनमें से 125 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। यह हालत तो उन गांवों के हैं, जो हिंडन नदी से कुछ दूरी पर हैं। जबकि हिंडन नदी के किनारे के 20 गांवों की तो हालत और भी खराब है।
पानी की जांच में 125 हैंडपंपों के पानी में नाइट्रेट, नाईट्राइट, आयरन और टर्बिडिटी की मात्रा काफी अधिक रही। हार्डनेस भी पानी में काफी पाया गया। जल निगम ने इन हैंडपंपों पर लाल रंग से क्रास का निशान लगाकर उन पर पानी पीने योग्य नहीं है, लिखे जाने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं
जिन गांवों के हैंडपंपों का जल निगम की जांच में पीने योग्य नहीं पाया गया उनमें पिठौरी, नगला झंडा, पथरवा, टोली, नवाजपुर, बुढ़नपुर, चिंबाबांस, मुजफ्फरी, पानसर, मंडौरा, पुजनेकी, खजूरहेड़ी, नल्हेड़ा बुड्ढाखेड़ा, मुकंदपुर उर्फ मकनपुर, सरखड़ी, शेखपुर कदीम, रणखंडी, साल्हापुर, भनेड़ा, पांडुखेड़ी, भगवानपुर, लाखनौर, भनेड़ा खेमचंद, घोघरेकी, अध्याना, बिलासपुर, ख्सजूरी, लाखनोर, परागपुर, जमापुर बेरी, अब्दुल्लापुर, धर्मपुर गुर्जर, अलीपुर, सढ़ौली हरिया, मिर्जापुर, टपरी, सब्बीरपुर, बेहड़ा, तासीपुर समेत कई गांव शामिल हैं।
इन गांवों में पेयजल योजनाएं नहीं
शासन द्वारा सिर्फ उन्हीं गांवों में पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश दिए हैं जिनमें पानी की जांच में आर्सेनिक और फ्लोराइड पाया जाए। लेकिन यहां की स्थिति अलग है। यहां के पानी में नाइट्रेट, नाईट्राइट, आयरन, टर्बिडिटी और हार्डनेस की अधिकता है। बेशक यह पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन शासनादेश के अनुसार यहां पेयजल योजनाओं की प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।