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अद्भुत: सहारनपुर जिले के भीतर बसे हैं 13 जिले, दिमाग लगाएंगे तो समझ पाएंगे क्या है पूरा मामला

Fri, 29 Sep 2023 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर
विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 29 Sep 2023 12:55 AM IST
सार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर अपने आप में एक जिला है बल्कि यहां देश के तमान राज्यों के जिलों के नाम पर गांव बसे हैं। यहां पटना भी है तो, गुजरात का गांधीनगर भी है। मिर्जापुर, रायपुर है तो, कोटा और बिलासपुर भी है। पढ़ें पूरा मामला।

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Villages named after 13 districts are situated in Saharanpur.
गांव जाने वाला रास्ता - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सहारनपुर भले ही खुद में जिला हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर 13 जिले बसे हुए हैं। यह लाइन पढ़कर चौकिएगा मत, हम दरअसल, उन गांवों की बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात के जिलों के नाम पर बसे हए हैं। यहां पर पटना और कोटा है तो गांधीनगर और रायपुर भी बसा हुआ है। हां फर्क इतना है कि इन नामों से बने जिलों की गिनती बड़े शहरों में होती है और सहारनपुर में इनके नाम से बसे गांव स्थानीय स्तर तक ही सीमित हैं। इनके नामों को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है।

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दरअसल, सरसावा ब्लाॅक का पटना उर्फ नयाबांस गांव जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। गांव की आबादी ज्यादा नहीं है। नेमचंद(75) सैनी का कहना है कि गांव का नाम पटना क्यों पड़ा है इसकी जानकारी नहीं है। अगर बाहर जाकर यह बोले कि पटना के रहने वाले हैं तो कई बार दूसरा व्यक्ति बिहार के पटना का समझ लेता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां पर सभी लोग आपसी भाईचारे के साथ जीवन बीता रहे हैं।

बेहट तहसील क्षेत्र में भी फैजाबाद गांव आता है, जो सहारनपुर से करीब 42 किलोमीटर दूर है। बेहट क्षेत्र में ही मिर्जापुर गांव भी है, जिसकी गिनती बड़े गांवों में होती है। इसके अलावा नानौता का काशीपुर गांव भी कृषि उत्पादों को लेकर प्रसिद्ध है। उत्तराखंड में भी काशीपुर एक बड़ा शहर है। यह कुछ ऐसे गांव हैं, जिनके नामों को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है। हालांकि इन सभी गांवों की अपनी-अपनी विशेष पहचान है। 

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फिरोजाबाद का भी अपना इतिहास
सरसावा ब्लाॅक के फिरोजाबाद गांव का भी अपना इतिहास है। गांव के पूर्व प्रधान हरिचंद्र(78) की मानें तो कई सौ साल पहले सरसावा और फिरोजाबाद गांव पलट गए थे। गांव पलटने के प्रमाण खोदाई के दौरान मिलते रहते हैं। हालांकि गांव का नाम फिरोजाबाद क्यों बड़ा इस बारे में जानकारी नहीं है।

मंदिर की दीवारों पर चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है कोटा गांव
स्थानीय लोगों की मानें तो कोटा गांव को लाला चरणदास के नाम से जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि उनके पूर्वज करीब 500 साल पहले राजस्थान से यहां पर आए थे, जिसके बाद कोटा गांव बसा था। कोटा गांव मंदिरों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। मंदिरों की दीवारों पर भित्ति चित्र बनाए गए हैं। चित्रों के माध्यम से धार्मिक कथाओं का वर्णन किया गया है, जो यहां की विशेष पहचान है।

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इन नाम के भी है गांव
सहारनपुर में मिर्जापुर, रायपुर, मुजफ्फराबाद, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, फतेहपुर, इटावा, गांधीनगर, बिलासपुर नाम से भी गांव हैं।
 
जनपद में कुछ ऐसे गांव है जिनके नाम पर कई बड़े जिले हैं। यहां पर हर गांव की अपनी विशेषता है, जिसकी वजह से इनकी अपनी खुद की पहचान है। - डॉ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी सहारनपुर

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