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साहित्यकारों को संवार रही विभावरी और समन्वय

Thu, 02 Sep 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 11:36 PM IST
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Vibhavari and coordination are grooming the writers
-- बालेश्वर कुमार जैन, अध्यक्ष, विभावरी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। मातृभाषा का मस्तक हमेशा ऊंचा रहेगा। हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के प्रयास कम नहीं होंगे, क्योंकि हिंदी की अलख जगाने वाले साहित्यकार अनेक हैं तो, इनको संवारने और सहेजने वाली संस्थाएं भी पूरी निष्ठा और प्रेम के साथ मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं। ऐसी अनेक संस्थाएं जनपद में हैं जो हिंदी और हिंदी साहित्य के लिए समर्पित भाव से आगे बढ़ रही हैं। इनमें समन्वय और विभावरी के साथ ही नीरजा बाल साहित्य न्यास जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं की शुरुआत बेहद कम सदस्यों के साथ हुई, लेकिन आज इनके आजीवन सदस्यों की संख्या सैकड़ा पार पहुंच चुकी है। पेश है हिंदी हैं हम अभियान के तहत ऐसी संस्थाओं पर रिपोर्ट...
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39 साल का है समन्वय का सफर
हिंदी साहित्य से जुड़े कवियों, गीतकारों और लेखकों को साथ जोड़कर कार्य करने वाली संस्था समन्वय का गठन 1982 में हुआ। इसका गठन साहित्यकार कृष्ण शलभ ने किया था, तब इस संस्था के महज 25 सदस्य ही थे। साल दर साल संस्था ने हिंदी साहित्य के लिए बेहतर कार्य किया और आजीवन सदस्यों की संख्या 100 के पार पहुंच गई। कृष्ण शलभ इसके 25 साल तक अध्यक्ष रहे। यह संस्था 1990 से हर साल सारस्वत एवं सृजन सम्मान समारोह करती रही है। इसके अलावा काव्य गोष्ठी, लेखकों के सम्मान, संगोष्ठी भी होती रही हैं। वर्तमान में इस संस्था के अध्यक्ष ओपी गौड़ और सचिव डॉ. आरपी सारस्वत हैं।
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साहित्य के साथ समाजसेवा में अग्रणी विभावरी
साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था विभावरी का गठन 1983 में हुआ। तब इसके अध्यक्ष रघुवीर सिंह अरविंद और डॉ. सीताराम त्यागी सचिव थे। करीब 30 साल से डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा सचिव हैं। वर्तमान अध्यक्ष बालेश्वर कुमार जैन हैं। शुरुआत में 11 साहित्यकारों को जोड़कर संस्था संचालित हुई। जनपद स्तर पर इंटरमीडिएट कॉलेज के बच्चों की प्रतियोगिताएं, साहित्यिक विभूतियों का सम्मान, पौधरोपण, सामाजिक हित के कार्य आदि यह संस्था करती रही है। अनेक पुस्तकों का प्रकाशन इस संस्था द्वारा कराया गया है। एकल संध्याओं का भी आयोजन कराया। वर्तमान में संस्था से 90 साहित्यकार और अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
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विभावरी संस्था ने हमेशा हिंदी साहित्य और समाजसेवा में आगे आकर कार्य किए। हर साल हिंदी साहित्यकारों के सम्मान समारोह किए। कोरोना काल में थोड़ी बाधा आई, लेकिन आगे भी यह सफर जारी रहेगा। -- बालेश्वर कुमार जैन, अध्यक्ष विभावरी
हिंदी हमारी मातृभाषा है, हमें इस पर गर्व है। संस्था का भी यही प्रयास रहता है कि हिंदी साहित्य के प्रति नई पीढ़ी को भी जागृत किया जाए, उसके लिए इंटर कॉलेजों में बच्चों को प्रेरित किया जाता है। -- डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा, सचिव विभावरी
हिंदी भाषा हमारी रग रग में रची बसी है, इसे बिसारना उचित नहीं है। समन्वय संस्था अपना फर्ज निभा रही है, युवाओं को सीख लेनी चाहिए और हिंदी से प्रेम करना चाहिए। -- ओपी गौड़, अध्यक्ष, समन्वय

हिंदी का मान कभी कम नहीं होगा, लेकिन उसके लिए सबको साथ मिलकर कार्य करना होगा, मातृभाषा से प्रेम करना होगा। -- डॉ. आरपी सारस्वत, सचिव, समन्वय

- डा. विजेंद्रपाल शर्मा, सचिव, विभावरी

- डा. विजेंद्रपाल शर्मा, सचिव, विभावरी- फोटो : SAHARANPUR

-- डा. ओपी गौड, अध्यक्ष, समन्वय

-- डा. ओपी गौड, अध्यक्ष, समन्वय- फोटो : SAHARANPUR

-- डा. आरपी सारस्वत, सचिव, समन्वय

-- डा. आरपी सारस्वत, सचिव, समन्वय- फोटो : SAHARANPUR

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