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पूरी करते थे दुर्गम पहाड़ियों पर रोड ओपनिंग की टास्क

Sat, 25 Jul 2020 11:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 11:12 PM IST
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Used to complete the road opening task on inaccessible hills
कैप्टन जसबीर सिंह - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। दुर्गम पहाड़ियां थीं, सैनिकों को आगे बढ़ना होता था तो, हमारी टीम को सैनिकों के लिए रोड ओपनिंग का टास्क पूरा करना होता था। राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत प्रत्येक जवान साहस के साथ आगे बढ़ता था और रोड ओपनिंग की जिम्मेदारी निभाता था। रोड ओपनिंग की रिपोर्ट के बाद सैनिक आगे बढ़ते थे और दुश्मनों की गोलियों का करारा जवाब देते थे। हमें गर्व है कि कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय) में शामिल रहे।
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यह कहना है कारगिल युद्ध के दौरान 54 इंजीनियर रेजीमेंट/69 फील्ड कंपनी में कार्यरत रहे कैप्टन जसबीर सिंह का। वह पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड में जिला उपाध्यक्ष हैं। उनका परिवार नकुड़ के मोहल्ला बंजारान में रहता है। कैप्टन जसबीर सिंह बताते हैं कि कारगिल में उनके साथ जेसीओ सहित 185 लोगों की पूरी टीम ती। तब हमें रोड ओपनिंग का टास्क मिला था। दुर्गम पहाड़ियों पर सैनिकों को आगे बढ़ने से रास्ता क्लीयर करके देना होता था। दुश्मन ऊंची पहाड़ियों पर था। समय समय पर फायरिंग हो रही थी। लिहाजा खुद को बचाते हुए रास्ता क्लीयर करना होता था। इस टास्क में उनका साथी जवान हरीश थापा भी शहीद हो गया था।
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-- दो पार्टियां निकलती थीं टास्क पूरा करने को
कैप्टन जसबीर सिंह बताते हैं कि रोड ओपनिंग के लिए दो पार्टियों को सुबह आठ बजे निकाला जाता था। माइन डिटेक्टर, डॉग स्क्वॉड और जैमर भी साथ होता था। ताकि रास्ते पर दुश्मन द्वारा की गई साजिश को पहले ही खत्म किया जा सके। टास्क मेें जो इलाका मिलता था, उसको सर्च करके रिपोर्ट देनी होती थी। उन्होंने बताया कि खाने की चिंता नहीं रहती थी, बंकर में रहते थे।
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---- कई जगह रही कैप्टन जसबीर की तैनाती
कैप्टन जसबीर ने बताया कि वह 1982 में बीईजी सेंटर रुड़की में भर्ती हुए थे। 1988 में नगालैैंड में यूनिट 54 इंजीनियर रेजीमेंट में तैनात रहे, फिर मेरठ पहुंचे। वहां से 1991 में अखनूर गए। इसके बाद 1990 में कश्मीर घाटी में तैनात रहे। उसके बाद डावर वैली में रहे। 1998 में पट्टन में 54 इंजीनियर यूनिट में तैनाती हुई। वहां से उनकी कंपनी उड़ी सेक्टर पहुंची।
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