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प्लास्टिक नहीं, हस्तनिर्मित कागज के झंडे का करें प्रयोग - मंडलायुक्त
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कागज से हस्त निर्मित राष्ट्रध्वज
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। मंडलायुक्त संजय कुमार स्वतंत्रता दिवस पर एक नई पहल शुरू करने जा रहे हैं। प्लास्टिक के तिरंगे झंडों के प्रयोग पर पूर्णतया पाबंदी लगा दी गई है और बायोडिग्रेडिबल तिरंगे झंडे मंडल के तीनों जिलों को उपलब्ध कराए हैं। खास बात यह है कि हस्त निर्मित कागज के बने इन तिरंगे झंडों में तुलसी और गेंदें के बीज भी रखे गए हैं। जिन्हें गमलों या क्यारी में डालने पर वहां तुलसी और गेंदे के पौधे उग आएंगे।
कमिश्नर संजय कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत उन्होंने मंडल के तीनों जनपदों में हस्त निर्मित कागज के बने बायोडिग्रेडिबल झंडों का प्रयोग करने की शुरूआत की है। इसमें खास बात यह है कि हाथ कागज के बने इन झंडों में तुलसी और गेंदे के बीज भी हैं। जिस मिट्टी में वह अवशोषित होंगे वहां पर तुलसी और गेंदे के पौधे भी उग जाएंगे।
मंडलायुक्त संजय कुमार ने बताया कि विभिन्न स्कूलों, कालेजों, सार्वजनिक स्थानों, सभी सरकारी कार्यालयों और थानों में वितरण कराने के लिए इन झंडों को तीनों जिलाधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया है। आगामी दो अक्तूबर और फिर 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में इस तरह के झंडों का ही प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के झंडों के प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। इन झंडों को प्रयोग के बाद गमलों या क्यारियों में रख दिया जाए तो इससे तुलसी और गेंदे के पौधे उग जाएंगे। जो स्वच्छ पर्यावरण के लिए जरूरी हैं।
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बताया कि तीनोें जनपदों के लिए 15 हजार झंडे मंगाए गए हैं। सहारनपुर के लिए 10 हजार, मुजफ्फरनगर के लिए तीन और शामली के लिए दो हजार हजार झंडे भेजे गए हैं।
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कमिश्नर संजय कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत उन्होंने मंडल के तीनों जनपदों में हस्त निर्मित कागज के बने बायोडिग्रेडिबल झंडों का प्रयोग करने की शुरूआत की है। इसमें खास बात यह है कि हाथ कागज के बने इन झंडों में तुलसी और गेंदे के बीज भी हैं। जिस मिट्टी में वह अवशोषित होंगे वहां पर तुलसी और गेंदे के पौधे भी उग जाएंगे।
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मंडलायुक्त संजय कुमार ने बताया कि विभिन्न स्कूलों, कालेजों, सार्वजनिक स्थानों, सभी सरकारी कार्यालयों और थानों में वितरण कराने के लिए इन झंडों को तीनों जिलाधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया है। आगामी दो अक्तूबर और फिर 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में इस तरह के झंडों का ही प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के झंडों के प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। इन झंडों को प्रयोग के बाद गमलों या क्यारियों में रख दिया जाए तो इससे तुलसी और गेंदे के पौधे उग जाएंगे। जो स्वच्छ पर्यावरण के लिए जरूरी हैं।
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बताया कि तीनोें जनपदों के लिए 15 हजार झंडे मंगाए गए हैं। सहारनपुर के लिए 10 हजार, मुजफ्फरनगर के लिए तीन और शामली के लिए दो हजार हजार झंडे भेजे गए हैं।