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अनलॉक 1 बीता, पटरी पर नहीं आ सका कारोबार
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मोबाइल विक्रेता गौरव सेठ
- फोटो : SAHARANPUR
अनलॉक 1 बीता, पटरी पर नहीं आ सका कारोबार
सहारनपुर। लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में प्रमुख उत्पादों की फैक्टरियां खोल दी गईं, लेकिन कारोबार गति नहीं पकड़ सका। बाजार से डिमांड कम रही तो उत्पादन भी सीमित ही करना पड़ा। सहारनपुर के प्रमुख वुड कार्विंग उद्योग को ही अनलॉक-वन में करीब 80 करोड़ रुपये का फटका लगा। अन्य बाजारों की हालत भी कुछ ऐसी ही रही, जिसके पीछे खरीदारों का कम बाहर निकलना माना जा रहा है।
दरअसल, एक जून से अनलॉक वन शुरू हुआ था। वैसे तो लॉकडाउन के दौरान भी औद्योगिक इकाइयों को अनुमति लेकर संचालित कराया गया था, लेकिन कर्मचारी न मिलने की वजह से इकाइयां खुलने के बावजूद कुछ खास काम नहीं हो सका। अनलॉक-वन से कारोबारियों को उम्मीद थी, लेकिन जून पूरा बीत गया, मगर बाजार की स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। कारोबार चला है, मगर उस गति से नहीं, जैसे पहले चलता था। वुड कार्विंग के अलावा हौजरी, मोबाइल, कपड़ा आदि के कारोबार की स्थिति खराब बनी हुई है।
अपेक्षित कारोबार नहीं हुआ
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन वुड कार्विंग कारोबारी रविंद्र मिगलानी का कहना है कि अनलॉक-वन में अपेक्षित कारोबार नहीं हुआ। एक महीने में ही करीब 90 करोड़ रुपये का कारोबार कम हुआ है।
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हौजरी का कारोबार 30 प्रतिशत कम
हौजरी कारोबारी मनजीत अरोरा का कहना है कि प्रशासन की अनुमति पर पांच मई से इकाइयां खुली थीं, लेकिन उत्पादन कम ही हुआ। जो उत्पाद पहले से तैयार थे, उनकी बिक्री तो हो गई, लेकिन बीते वर्ष की तुलनात्मक रूप से 30 प्रतिशत कारोबार कम हुआ है।
आधा रहा गया मोबाइल कारोबार
मोबाइल फोन व्यापारी गौरव सेठ का कहना है कि जिले भर में मोबाइल फोन और एसेसरीज का करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार हर माह होता है, मगर लॉकडाउन के बाद अनलॉक-वन में 50 प्रतिशत गिरावट आ गई है। मोबाइल एसेसरीज ज्यादातर चीन से मंगाई जाती थीं। अब चीन से सामान आयात नहीं हो रहा और ग्राहक भी चीनी उत्पाद लेने से बच रहे हैं, जिस कारण कारोबार गिरा है।
वुड कार्विंग बाजार को लगी चपत
वुड कार्विंग की जिले में करीब 400 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं, जिनमें से 150 एक्सपोर्टर हैं। दूसरे राज्यों और विदेशों तक वुड कार्विंग के उत्पादों की सप्लाई सहारनपुर से होती है। सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये का कारोबार वुड कार्विंग इंडस्ट्री का है, लेकिन जून महीने में 10 करोड़ का भी कारोबार नहीं हो सका।
हौजरी कारोबार को भी नुकसान
ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग में करीब 400 इकाइयां हौजरी कारोबार से जुड़ी हैं, जिनमें 250 इकाइयां मैन्युफैक्चरिंग की पंजीकृत हैं। यहां से उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए हौजरी के आइटम की सप्लाई होती है। जून माह में 8 से 10 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो पूर्व के वर्षों की अपेक्षा 30 प्रतिशत तक कम है।
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सहारनपुर। लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में प्रमुख उत्पादों की फैक्टरियां खोल दी गईं, लेकिन कारोबार गति नहीं पकड़ सका। बाजार से डिमांड कम रही तो उत्पादन भी सीमित ही करना पड़ा। सहारनपुर के प्रमुख वुड कार्विंग उद्योग को ही अनलॉक-वन में करीब 80 करोड़ रुपये का फटका लगा। अन्य बाजारों की हालत भी कुछ ऐसी ही रही, जिसके पीछे खरीदारों का कम बाहर निकलना माना जा रहा है।
दरअसल, एक जून से अनलॉक वन शुरू हुआ था। वैसे तो लॉकडाउन के दौरान भी औद्योगिक इकाइयों को अनुमति लेकर संचालित कराया गया था, लेकिन कर्मचारी न मिलने की वजह से इकाइयां खुलने के बावजूद कुछ खास काम नहीं हो सका। अनलॉक-वन से कारोबारियों को उम्मीद थी, लेकिन जून पूरा बीत गया, मगर बाजार की स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। कारोबार चला है, मगर उस गति से नहीं, जैसे पहले चलता था। वुड कार्विंग के अलावा हौजरी, मोबाइल, कपड़ा आदि के कारोबार की स्थिति खराब बनी हुई है।
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अपेक्षित कारोबार नहीं हुआ
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन वुड कार्विंग कारोबारी रविंद्र मिगलानी का कहना है कि अनलॉक-वन में अपेक्षित कारोबार नहीं हुआ। एक महीने में ही करीब 90 करोड़ रुपये का कारोबार कम हुआ है।
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हौजरी का कारोबार 30 प्रतिशत कम
हौजरी कारोबारी मनजीत अरोरा का कहना है कि प्रशासन की अनुमति पर पांच मई से इकाइयां खुली थीं, लेकिन उत्पादन कम ही हुआ। जो उत्पाद पहले से तैयार थे, उनकी बिक्री तो हो गई, लेकिन बीते वर्ष की तुलनात्मक रूप से 30 प्रतिशत कारोबार कम हुआ है।
आधा रहा गया मोबाइल कारोबार
मोबाइल फोन व्यापारी गौरव सेठ का कहना है कि जिले भर में मोबाइल फोन और एसेसरीज का करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार हर माह होता है, मगर लॉकडाउन के बाद अनलॉक-वन में 50 प्रतिशत गिरावट आ गई है। मोबाइल एसेसरीज ज्यादातर चीन से मंगाई जाती थीं। अब चीन से सामान आयात नहीं हो रहा और ग्राहक भी चीनी उत्पाद लेने से बच रहे हैं, जिस कारण कारोबार गिरा है।
वुड कार्विंग बाजार को लगी चपत
वुड कार्विंग की जिले में करीब 400 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं, जिनमें से 150 एक्सपोर्टर हैं। दूसरे राज्यों और विदेशों तक वुड कार्विंग के उत्पादों की सप्लाई सहारनपुर से होती है। सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये का कारोबार वुड कार्विंग इंडस्ट्री का है, लेकिन जून महीने में 10 करोड़ का भी कारोबार नहीं हो सका।
हौजरी कारोबार को भी नुकसान
ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग में करीब 400 इकाइयां हौजरी कारोबार से जुड़ी हैं, जिनमें 250 इकाइयां मैन्युफैक्चरिंग की पंजीकृत हैं। यहां से उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए हौजरी के आइटम की सप्लाई होती है। जून माह में 8 से 10 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो पूर्व के वर्षों की अपेक्षा 30 प्रतिशत तक कम है।

हौजरी कारोबारी मंजीत अरोड़ा- फोटो : SAHARANPUR

आईआईए चैयरमैन रविन्द्र मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR