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इलाज कराना हुआ महंगा, 20 फीसदी बढ़े दवाओं के दाम
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सहारनपुर। कोरोना काल के बीच बीते तीन महीनों में दवाओं के दामों भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इलाज कराना भी महंगा हो गया है। हार्ट, बीपी, बुखार, मधुमेह, एलर्जी सहित कई दवाओं के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके पीछे पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ना भी वजह माना जा रहा है। क्योंकि, ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बढ़ा है।
कोरोना काल के बीच वायरल बुखार और टाइफाइड एवं मानसिक तनाव में रोगियों में इजाफा हुआ है। ऐसे में मरीजों का इलाज कराना महंगा हो गया है। क्योंकि, बीते तीन माह में 20 प्रतिशत दवाओं के दाम बढ़ गए हैं। चौधरी चरण सिंह चौक के निकट दवा कारोबारी प्रवीण खुराना का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी हुई है, जिस वजह से ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी बढ़ा है। इस वजह से दवा कंपनियों ने भी दाम बढ़ाए हैं। बाजोरिया रोड के दवा कारोबारी अनिल शर्मा का कहना है कि कोरोना काल के बीच दवाओं की मांग बढ़ी है। कुछ दवाएं पिछले दिनों बाजार में खत्म हो गई थी। दवाओं की खपत ज्यादा हो गई है। दाम बढ़ने की एक वजह यह भी रही है। इनमें बुखार, बीपी, हार्ट, मधुमेह और एलर्जी, एंटीबायोटिक दवाओं के दामों में उछाल आया है।
दवाओं की बिक्री में भी है खेल
जेनेरिक दवाओं को लेकर सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी खोले गए हैं, लेकिन पर्याप्त दवाएं नहीं होती हैं। इसका फायदा दवा कारोबारी उठा रहे हैं और जेनेरिक दवाओं को प्रिंट रेट के हिसाब से बेचते हैं। ड्रग एडवाइजर अधिवक्ता सरदार दलजीत सिंह कोचर का कहना है कि जेनेरिक दवाओं के दाम अंकित करने का कोई मानक नहीं है, जिसका फायदा कंपनियां उठाती हैं। लागत के हिसाब से दस गुुना तक दाम बढ़ाकर प्रिंट किए जाते हैं। इन्हीं रेट पर बाजार में दवाएं बिकती भी हैं।
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कोरोना काल के बीच वायरल बुखार और टाइफाइड एवं मानसिक तनाव में रोगियों में इजाफा हुआ है। ऐसे में मरीजों का इलाज कराना महंगा हो गया है। क्योंकि, बीते तीन माह में 20 प्रतिशत दवाओं के दाम बढ़ गए हैं। चौधरी चरण सिंह चौक के निकट दवा कारोबारी प्रवीण खुराना का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी हुई है, जिस वजह से ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी बढ़ा है। इस वजह से दवा कंपनियों ने भी दाम बढ़ाए हैं। बाजोरिया रोड के दवा कारोबारी अनिल शर्मा का कहना है कि कोरोना काल के बीच दवाओं की मांग बढ़ी है। कुछ दवाएं पिछले दिनों बाजार में खत्म हो गई थी। दवाओं की खपत ज्यादा हो गई है। दाम बढ़ने की एक वजह यह भी रही है। इनमें बुखार, बीपी, हार्ट, मधुमेह और एलर्जी, एंटीबायोटिक दवाओं के दामों में उछाल आया है।
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दवाओं की बिक्री में भी है खेल
जेनेरिक दवाओं को लेकर सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी खोले गए हैं, लेकिन पर्याप्त दवाएं नहीं होती हैं। इसका फायदा दवा कारोबारी उठा रहे हैं और जेनेरिक दवाओं को प्रिंट रेट के हिसाब से बेचते हैं। ड्रग एडवाइजर अधिवक्ता सरदार दलजीत सिंह कोचर का कहना है कि जेनेरिक दवाओं के दाम अंकित करने का कोई मानक नहीं है, जिसका फायदा कंपनियां उठाती हैं। लागत के हिसाब से दस गुुना तक दाम बढ़ाकर प्रिंट किए जाते हैं। इन्हीं रेट पर बाजार में दवाएं बिकती भी हैं।
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