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Saharanpur News: सरकारी काम का ये हाल, पूरे नहीं लगे कैमरे बीत गए दो साल

Wed, 04 Jan 2023 10:41 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jan 2023 10:41 PM IST
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This is the condition of government work, cameras have not been completed, two years have passed
संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत नगर निगम परिसर में आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) स्थापित किया गया है। इसी सेंटर से शहर भर में लगने वाले सीसीटीवी कैमरों के जरिए यातायात व्यवस्था संचालित होगी, साथ ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए सड़कों की प्रत्येक गतिविधि पर भी नजर रखी जाएगी। आईसीसीसी का लोकार्पण हुए दो साल सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक 860 में से 560 ही कैमरे महानगर में लगाए जा सके हैं।
योजना के तहत महानगर के सभी प्रमुख चौराहों, तिराहों, मुख्य मार्गों तथा ऐसे मोहल्लों और गलियों में कैमरे लगाए जाने हैं, जहां अधिक जरूरत है। इनमें फिक्स बुलेट कैमरे, पीटीजेड कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट कैमरे, इमरजेंसी कैमरे आदि शामिल हैं। आईसीसीसी का उद्घाटन 28 दिसंबर 2020 को किया गया था। उसके लोकार्पण से पहले सीसीटीवी लगाने का कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए था, जिससे की लोकार्पण के दिन से आईसीसीसी कार्य करना शुरू कर दे, लेकिन लेटलतीफी ऐसी कि लोकार्पण के दो साल बाद भी शत प्रतिशत सीसीटीवी नहीं लगाए जा सके हैं। 860 कैमरों में से 560 कैमरे ही अभी तक लगे हैं। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का कहना है कि शेष कैमरे लगने में कठिनाई आ रही है। जहां पर कैमरे लगाने के लिए जगह चिह्नित की गई हैं वहां के संबंधित दुकानदार या फिर आम नागरिक विरोध कर रहे हैं। वह कैमरे के लिए खंभा नहीं लगने दे रहे हैं। ऐसे लोगों को मनाने के लिए लगातार वार्ता की जा रही है।
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सीसीटीवी कैमरे लगने से यह होगा फायदा
महानगर में कैमरे लगने से सबसे बड़ा फायदा नागरिकों की सुरक्षा का होगा। चूंकि चौराहों और तिराहों के साथ ही मुख्य मार्गों और ऐसे संवेदनशील मोहल्लों और गलियों में कैमरे लगाए जा रहे हैं, जहां किसी भी प्रकार का हादसा होने का खतरा रहता है। कैमरे लगने के बाद फायदा यह होगा कि यदि कोई असामाजिक तत्व किसी घटना को अंजाम देकर भागता है तो उसकी गाड़ी या उसको कैमरों के जरिए कैप्चर किया जा सकेगा और उसकी पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा सड़क हादसा होने की स्थिति में तुरंत सरकारी अस्पताल और एंबुलेंस को कॉल जाएगा, जिसके बाद एंबुलैंस मौके पर पहुंचकर घायलों को उपचार के लिए ले जा सकेगी, साथ ही यातायात व्यवस्था नियंत्रित होगी। यदि कोई यातायात का नियम तोड़ता है तो उसकी नंबर प्लेट ट्रैस कर चालान काटकर भेजा जा सकेगा। ऑनलाइन चालान काटने का काम करीब आठ माह से चल रहा है।
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कचरा बन गए पुराने सीसीटीवी कैमरे
महानगर में प्रमुख चौराहों और तिराहों पर करीब सात साल पहले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। पुलिस लाइन में कंट्रोल रूम बनाया गया था, जहां से कैमरों के जरिए महानगर पर नजर रखी जाती थी। लेकिन देखरेख के अभाव में उक्त कैमरे धीरे धीरे खराब होते चले गए। वर्तान में उक्त कैमरे खंभों पर लटके हुए हैं।

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ज्यादातर कैमरे लगाए जा चुके हैं। शेष कैमरों को लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के द्वारा अनेक जगह चिह्नित करके दी गई हैं, जहां कैमरे लगाया जाना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यापारी या आम नागरिक को कैमरे का खंभा लगने से कोई परेशानी है तो उनसे बात कर समस्या को दूर किया जाएगा, लेकिन कैमरे जरूर लगाए जाएंगे।
गजल भारद्वाज, सीईओ, स्मार्ट सिटी सहारनपुर/नगरायुक्त।
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