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इस्लाम में ओम, गायत्री मंत्र की कोई गुंजाइश नहीं: वाजदी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:20 AM IST
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नदिमुल वाजदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के मदरसे में हिंदू व मुस्लिम छात्र-छात्राओं को ओम और गायत्री मंत्र का उच्चारण कराने के मसले पर तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि मजहबी सम्मान के नाम पर दूसरे धर्म की चीजों को हम कबूल नहीं कर सकते और न ही करेंगे क्योंकि इस्लाम धर्म में इस तरह की चीजों की कोई गुंजाइश ही नहीं है।
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के अलनूर चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अलीगढ़ में मदरसा चाचा नेहरू का संचालन किया जा रहा है, जिसमें हिंदू व मुस्लिम छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संस्था में छात्र छात्राओं को ओम और गायत्री मंत्र का उच्चारण भी कराया जा रहा है।
इस संबंध में अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी का कहना है कि हमने न कभी सुना और न कभी पढ़ा है कि किसी हिंदू शिक्षण संस्था में छात्र-छात्राओं को अल्लाह के नाम की तस्बीह पढ़ाई गई हो या कोई ऐसा काम कराया गया जो इस्लाम की पहचान हो।
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लेकिन हम आए दिन सुनते रहते हैं कि मुस्लिम इदारों में ओम, गायत्री मंत्र का उच्चारण और सूर्य नमस्कार कराया जा रहा है। सलमा अंसारी की निगरानी में चल रहे मदरसे में मुस्लिम बच्चों को ओम व गायत्री मंत्र का उच्चारण कराया जा रहा है।
यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि इस्लाम धर्म में इस तरह की चीजों की कोई गुंजाइश नहीं है। इस्लाम में सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की इबादत, उसी के नाम का जाप व पूजा की जा सकती है।
मौलाना वाजदी ने कहा कि जो लोग इस प्रकार के काम कर रहे हैं वो इस्लाम धर्म के सच्चे पैरोकार नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दूसरे मजहब का अहतराम (सम्मान) अपनी जगह है, लेकिन दूसरे मजहब के सम्मान के नाम पर उनकी चीजों को हम कबूल नहीं कर सकतें और न ही कभी करेंगे।
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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के अलनूर चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अलीगढ़ में मदरसा चाचा नेहरू का संचालन किया जा रहा है, जिसमें हिंदू व मुस्लिम छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संस्था में छात्र छात्राओं को ओम और गायत्री मंत्र का उच्चारण भी कराया जा रहा है।
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इस संबंध में अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी का कहना है कि हमने न कभी सुना और न कभी पढ़ा है कि किसी हिंदू शिक्षण संस्था में छात्र-छात्राओं को अल्लाह के नाम की तस्बीह पढ़ाई गई हो या कोई ऐसा काम कराया गया जो इस्लाम की पहचान हो।
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लेकिन हम आए दिन सुनते रहते हैं कि मुस्लिम इदारों में ओम, गायत्री मंत्र का उच्चारण और सूर्य नमस्कार कराया जा रहा है। सलमा अंसारी की निगरानी में चल रहे मदरसे में मुस्लिम बच्चों को ओम व गायत्री मंत्र का उच्चारण कराया जा रहा है।
यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि इस्लाम धर्म में इस तरह की चीजों की कोई गुंजाइश नहीं है। इस्लाम में सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की इबादत, उसी के नाम का जाप व पूजा की जा सकती है।
मौलाना वाजदी ने कहा कि जो लोग इस प्रकार के काम कर रहे हैं वो इस्लाम धर्म के सच्चे पैरोकार नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दूसरे मजहब का अहतराम (सम्मान) अपनी जगह है, लेकिन दूसरे मजहब के सम्मान के नाम पर उनकी चीजों को हम कबूल नहीं कर सकतें और न ही कभी करेंगे।