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कुपोषण से जंग में कर्मचारियों की कमी बन रहा रोड़ा
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कुपोषण से जंग में कर्मचारियों की कमी बन रहा रोड़ा
सहारनपुुर। कुपोषण के खात्मे को लेकर छेड़ी गई जंग में बाल एवं पुुष्टाहार विभाग के कर्मचारियों की कमी रोड़े अटका रहा है। जिले के 3410 केंद्रों पर मात्र 35 सुपरवाइजर हैं, जबकि 125 सुपरवाइजरों की जरूरत है। इसी तरह 2990 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, जबकि नौ हजार की जरूरत है।
सितंबर माह को कुपोषण माह के रूप में मनाया गया था। आंगनबाड़ी केंद्रों पर जागरूकता कार्यक्रम कराए गए और पोषण वाटिकाओं का भी निर्माण किया। कर्मचारियों की कमी की वजह से यह अभियान परवान नहीं चढ़ पाया। इसके बाद भी जैसे तैसे अभियान चलाए गए। हाल में शुष्क पोषाहार तैयार किए जाने को लेकर पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा शुष्क पोषाहार तैयार किया जाना है, लेकिन 11 में से चार विकासखंडों में स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। जबकि यह योजना शासन की प्राथमिकता और बाल एवं पुष्टाहार विभाग, पूर्ति विभाग, पंचायत राज विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा समन्वय स्थापित कर समूहों को क्रियाशील किया जाता है। ताकि शत-प्रतिशत शुष्क पोषाहार का वितरण हो सके। नवंबर माह में इस लक्ष्य को पूरा किया जाना था। लेकिन कर्मचारियों की कमी और स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं होने से शत-प्रतिशत पोषहार वितरित नहीं हो पाया है। सिर्फ 70 प्रतिशत ही पोषाहार बंट पाया है।
इन ब्लॉकों में क्रियाशील नहीं हो सके स्वयं सहायता समूह
सहारनपुर। स्वयं सहायता समूहों द्वारा कोटेदार के यहां से चावल व गेहूं और दाल खरीदकर शुष्क पोषहार तैयार कर बाल एवं पुष्टाहार विभाग को दिया जाना है। शासन की ओर से बेरोजगारी खत्म करने के उद्देश्य से पोषाहार तैयार करने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन नानौता, रामपुर मनिहारान, नकुड़, गंगोह में अब तक नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं पाए है।
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वर्ष---- कुपोषित ---------- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की संख्या है 27 हजार
जिले में शुष्क पोषाहार वितरित किए जा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी और स्वयं सहायता समूह पूरी तरह क्रियाशील नही होने की वजह से अभियान प्रभावित हो रहा है। फिर भी विभाग का प्रयास रहता है कि हर कुपोषित बच्चे और गर्भवती तक शुष्क पोषाहार पहुंचे।
- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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सहारनपुुर। कुपोषण के खात्मे को लेकर छेड़ी गई जंग में बाल एवं पुुष्टाहार विभाग के कर्मचारियों की कमी रोड़े अटका रहा है। जिले के 3410 केंद्रों पर मात्र 35 सुपरवाइजर हैं, जबकि 125 सुपरवाइजरों की जरूरत है। इसी तरह 2990 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, जबकि नौ हजार की जरूरत है।
सितंबर माह को कुपोषण माह के रूप में मनाया गया था। आंगनबाड़ी केंद्रों पर जागरूकता कार्यक्रम कराए गए और पोषण वाटिकाओं का भी निर्माण किया। कर्मचारियों की कमी की वजह से यह अभियान परवान नहीं चढ़ पाया। इसके बाद भी जैसे तैसे अभियान चलाए गए। हाल में शुष्क पोषाहार तैयार किए जाने को लेकर पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा शुष्क पोषाहार तैयार किया जाना है, लेकिन 11 में से चार विकासखंडों में स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। जबकि यह योजना शासन की प्राथमिकता और बाल एवं पुष्टाहार विभाग, पूर्ति विभाग, पंचायत राज विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा समन्वय स्थापित कर समूहों को क्रियाशील किया जाता है। ताकि शत-प्रतिशत शुष्क पोषाहार का वितरण हो सके। नवंबर माह में इस लक्ष्य को पूरा किया जाना था। लेकिन कर्मचारियों की कमी और स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं होने से शत-प्रतिशत पोषहार वितरित नहीं हो पाया है। सिर्फ 70 प्रतिशत ही पोषाहार बंट पाया है।
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इन ब्लॉकों में क्रियाशील नहीं हो सके स्वयं सहायता समूह
सहारनपुर। स्वयं सहायता समूहों द्वारा कोटेदार के यहां से चावल व गेहूं और दाल खरीदकर शुष्क पोषहार तैयार कर बाल एवं पुष्टाहार विभाग को दिया जाना है। शासन की ओर से बेरोजगारी खत्म करने के उद्देश्य से पोषाहार तैयार करने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन नानौता, रामपुर मनिहारान, नकुड़, गंगोह में अब तक नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं पाए है।
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वर्ष---- कुपोषित ---------- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की संख्या है 27 हजार
जिले में शुष्क पोषाहार वितरित किए जा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी और स्वयं सहायता समूह पूरी तरह क्रियाशील नही होने की वजह से अभियान प्रभावित हो रहा है। फिर भी विभाग का प्रयास रहता है कि हर कुपोषित बच्चे और गर्भवती तक शुष्क पोषाहार पहुंचे।
- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी