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Saharanpur News: आठ करोड़ के घोटाले में फंसा पेंच, रिकवरी पर रोक, हाईकोर्ट ने दिया स्टे
Sun, 06 Oct 2024 12:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 06 Oct 2024 12:03 AM IST
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सहारनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत के दौरान विकासखंड गंगोह में हुए आठ करोड़ के घोटाले की रिकवरी पर रोक लग गई है। एडीओ और सहित 14 कर्मचारियों को प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया था। इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा था। जांच में एडीओ सहित 14 कर्मचारी दोषी पाए गए थे। जिनसे रिकवरी होनी थी, लेकिन अब इन्होंने हाईकोर्ट पहुंचकर स्टे ले लिया है। ऐसे में रिकवरी में पेंच फंस गया है।
बता दें, कि मई 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुआ था। ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया था। तब तीन माह के लिए प्रशासक के तौर पर एडीओ, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया था। गंगोह निवासी एक व्यक्ति ने मंडलायुक्त से शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि 98 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों ने विकास कार्य के नाम करीब आठ करोड़ का गबन किया है। तत्कालीन मंडलायुक्त ने संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। कमेटी ने विकास कार्यों से संबंधित इन अधिकारियों से अभिलेख मंगवाए, लेकिन इन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
जांच अधिकारी ने अंतिम रिपोर्ट मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की, जिसमें सभी दोषी मिले थे। इसकी सूचना प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास व आयुक्त ग्राम्य विकास लखनऊ को भी भेजी गई थी। इसके बाद एडीओ को निलंबित कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट के स्टे के बाद रिकवरी में पेंच फंस गया है। इस वजह से रिकवरी भी नहीं हो पा रही।
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इन पर लगे थे आरोप
जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा ने बताया कि गबन का आरोप एडीओ प्रमोद कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी नीटू कुमार, योगेंद्र, विक्रांत, अमित कुमार, आकाश तोमर, विवेक कुमार, ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र, विकास, किरत, रविंद्र, प्रदीप, दीपक कुमार, जय प्रकाश पर लगा था।
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वर्जन:
मामले की जांच चल रही है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई थी। दोषी पाए गए कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से स्टे लिया है। इस वजह से रिकवरी फिलहाल रोक लगी है।
-- सुमित महाजन, मुख्य विकास अधिकारी
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बता दें, कि मई 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुआ था। ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया था। तब तीन माह के लिए प्रशासक के तौर पर एडीओ, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया था। गंगोह निवासी एक व्यक्ति ने मंडलायुक्त से शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि 98 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों ने विकास कार्य के नाम करीब आठ करोड़ का गबन किया है। तत्कालीन मंडलायुक्त ने संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। कमेटी ने विकास कार्यों से संबंधित इन अधिकारियों से अभिलेख मंगवाए, लेकिन इन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
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जांच अधिकारी ने अंतिम रिपोर्ट मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की, जिसमें सभी दोषी मिले थे। इसकी सूचना प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास व आयुक्त ग्राम्य विकास लखनऊ को भी भेजी गई थी। इसके बाद एडीओ को निलंबित कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट के स्टे के बाद रिकवरी में पेंच फंस गया है। इस वजह से रिकवरी भी नहीं हो पा रही।
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इन पर लगे थे आरोप
जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा ने बताया कि गबन का आरोप एडीओ प्रमोद कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी नीटू कुमार, योगेंद्र, विक्रांत, अमित कुमार, आकाश तोमर, विवेक कुमार, ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र, विकास, किरत, रविंद्र, प्रदीप, दीपक कुमार, जय प्रकाश पर लगा था।
वर्जन:
मामले की जांच चल रही है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई थी। दोषी पाए गए कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से स्टे लिया है। इस वजह से रिकवरी फिलहाल रोक लगी है।