फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   There has been bloodshed in political rivalry in the district as well

सहारनपुर: सियासी रंजिश में होता रहा है खूनखराबा, अब तक जारी है चुनाव और वर्चस्व की जंग

Thu, 13 Aug 2020 12:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 13 Aug 2020 12:39 AM IST
सार

  • -पूर्व ब्लॉक प्रमुख पति देवपाल राणा की हत्या सबसे सुर्खियों में रही
  • -ऋषिपाल राणा के साथ अब तक जारी है चुनाव और वर्चस्व की जंग

विज्ञापन
There has been bloodshed in political rivalry in the district as well
पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में सियासी रंजिश या वर्चस्व की जंग में सत्ताधारी दल से लेकर अन्य पार्टी नेताओं, प्रधानों और पूर्व प्रधानों की हत्याएं लगातार सामने आती रही हैं। बागपत में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या का मामला इस समय सुर्खियों में है।
विज्ञापन


यहां जिले में भी सियासी रंजिश या वर्चस्व की जंग के कारण खूनखराबा हुआ है। करीब तीन साल पहले पूर्व ब्लॉक प्रमुख पति देवपाल राणा की हत्या का मामला सबसे सुर्खियों में रहा है। ऐसी ही कुछ अन्य घटनाएं भी हुई हैं।
विज्ञापन


वर्ष 2017 में नानौता की पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीलम राणा के पति देवपाल राणा की हत्या कर दी गई थी। गैंगस्टर सहित अन्य मामलों में आरोपी देवपाल की उस समय हत्या हुई थी जब वह रुड़की कचहरी में पेंशी पर आए थे। देवपाल राणा परिवार की ओर से ऋषिपाल राणा को इस हत्या के लिए जिम्मेदार बताया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऋषिपाल राणा मौजूदा ब्लॉक प्रमुख चांदनी राणा के पति हैं। इसके बाद ऋषिपाल राणा पक्ष की ओर से भी कई बार यह कहा जाता रहा कि उन्हें देवपाल राणा के परिवार से खतरा है। ये दोनों ही परिवार एक-दूसरे पर बड़े अपराधियों के गिरोह से जुड़े होने का आरोप भी लगाते रहे हैं। इन दोनों परिवारों में अब भी वर्चस्व की जंग जारी है।

पिछले साल ही देवबंद क्षेत्र में भाजपा नेता एवं सभासद चौधरी धारा सिंह की हत्या कर दी गई थी। शुरूआत में इस हत्या के पीछे सियासी साजिश या रंजिश की आशंका जाहिर की गई थी। हालांकि बाद में शुगर मिल में ठेकों के मामलों की रंजिश बताते हुए पुलिस ने घटना का खुलासा किया था। इससे कुछ साल पहले जड़ौदा पांडा में जनार्धन त्यागी सहित कुछ अन्य लोगों की हत्या में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सियासी रंजिश के मामले सामने आए थे।

रंजिश की घटनाओं के रिकाॅर्ड में लापरवाही
- ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य से लेकर अन्य चुनाव को लेकर हर बार रंजिश के मामले सामने आते हैं। इसके बावजूद अधिकतर थानों में रंजिश से जुड़ी घटनाओं और सियासी दखल के रिकार्ड को मेंटेन करने में लापरवाही बरती जा रही है।

अधिकतर थानों में जमीन के विवाद, परिवारों में पुरानी रंजिश के कुछ मामलों के ही रिकार्ड हैं। इसे नियमित रूप से मेंटेन नहीं किया जाता है। रंजिश में दोनों पक्षों की ओर से सुरक्षा मांगने के प्रार्थना पत्रों को भी काफी हल्के में लिया जाता है।

जहां जरूरी होता है, वहां रखा जाता है रिकाॅर्ड
- एसपी देहात अशोक कुमार मीणा बताते हैं कि सियासी या वर्चस्व से जुड़ी रंजिश के मामलों को पुलिस गंभीरता से लेती है। जहां जरूरी होता है, वहां अलग से रिकार्ड मेंटेन कर लिया जाता है। पुलिस अपने स्तर से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के हरसंभव प्रयास करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed