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जायरीनों ने तबर्रूकात की जियारत कर दुआएं मांगीं

Sun, 07 Feb 2021 11:17 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2021 11:17 PM IST
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The Zionists prayed and sought prayers
गंगोह के हजरत कुतबे आलम उर्स में तबर्रुकात की जियारत कराते नायब सज्जादानशी - फोटो : SAHARANPUR
गंगोह (सहारनपुर)। हजरत कुतुब-ए-आलम के 497वें उर्स मुबारक के कार्यक्रम तीसरी रस्म तबर्रूकात की जियारत के साथ संपन्न हो गए। जायरीनों ने तबर्रूकात की जियारत कर मुरादें और दुआएं मांगीं। इस मौके पर कलावा कलौंजी का वितरण किया।
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जियारत से पूर्व रविवार को हजरत कुतब - ए - आलम की पवित्र दरगाह तक संग्रहीत तबर्रुकात के पिटारा-ए-मुकद्दस को जलूस की शक्ल में हवेली सज्जादा नशीन गुलशन-ए-कुतबे आलम से नंगे पैरों लाया गया। तत्पश्चात पाक कुरान शरीफ पाठ, नात-ए-पाक व शजरा खुआनी की रस्म अदा की और कलावा व कलौंजी बांटी। तबर्रूकात की जियारत से पूर्व दरगाह के सज्जादा नशीन ने हजरत कुतुबे आलम के जीवन पर प्रकाश डाला।
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अल्लाहु-अकबर के नारों के साथ पिटारा-ए-मुकद्दस खोला। सबसे पहले हजरत कुतुबे आलम के मुबारक हाथों से लिखी गनई कुरान पाक की जियारत कराई। किवदंती है कसि इस कुरान पाक पर पहली निगाह पड़ते ही मन की मुराद एक साल में पूरी हो जाती है। इसके बाद हजरत के पैराहन की जियारत कराई। बाबा फरीदुद्दीन पाक पटन, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी, ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी महरौली शरीफ, हजरत मखदूम साबिर कलियरी, सुल्तान बिन अधम बलख, हजरत शेख अब्दुल हक रादौलवी, हजरत मखदूम जहांनिया, शेख जलालुद्दीन कबीरूल औलिया, हजरत शेख शम्सुद्दीन पानीपती के साथ-साथ सिलसिला-ए-कादरिया, चिश्तिया व साबरिया के तबर्रूकात की जियारत कराई। पूर्व चेयरमैन नोमान मसूद ने मेहमानों का स्वागत किया।
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कौशर अली का परिवार 43 साल से चला रहा लंगर
गंगोह। कई प्रांतों की संस्थाओं ने उर्स के दौरान नगर में विभिन्न स्थानों पर लंगर चलाए। मुरादाबाद की एक टीम दरगाह पर आने वालों के लिए लंबे अरसे से लंगर तकसीम करती है। हजरत कुतब - ए- आलम दरगाह पर भी लंगर का काम मुरादाबाद की टीम देखती है। कौशर अली कुद्दसी आदि एक सप्ताह तक चलने वाले इस लंगर की जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने बताया कि हजरत शाह मोईनुद्दीन कुद्दुसी उनके पीर थे और वह लोग उनसे जुड़े हैं। वे विगत 43 साल से टीम लगातार यहां आकर लंगर चला रहे हैं।

रात भर चला कव्वालियों का दौर
गंगोह। कव्वालों ने हजरत कुतुब- ए -आलम की शान में रात भर कसीदे पढ़े। देश भर से पहुंचे खानकाहों के सूफी और सज्जादानशीं की उपस्थिति में महफिल का रंग सूफियाना हो गया। महफिल - ए- सीमा में कव्वालों की अलग-अलग टोलियां हजरत की मजार पर रात भर नजराना-ए-अकीदत पेश करतीं रहीं।

गंगोह उर्स में कव्वालियां प्रस्तुत करते कव्वाल

गंगोह उर्स में कव्वालियां प्रस्तुत करते कव्वाल- फोटो : SAHARANPUR

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