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Saharanpur News: ऐतिहासिक पांडव तालाब की नहीं बुझी प्यास, कुछ को अभी भी कब्जा मुक्ति की आस
Wed, 03 Jun 2026 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 03 Jun 2026 01:09 AM IST
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सहारनपुर। तालाबों को कब्जामुक्त कराने के लिए समय-समय पर अभियान चलता है, लेकिन अभियान चलने के बाद कागजों में सिमटकर रह जाता है। जिले में करीब 6042 तालाब हैं। इनमें से कुछ पर कब्जे हैं। कई तालाबों तो अभी भी पानी की तलाश में हैं। इनमें ऐतिहासिक जड़ौदा पांडा का पांडव तालाब भी शामिल है।
तालाब को कब्जामुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाता है। इसके बाद भी कई तालाब ऐसे हैं, जिन पर कब्जा है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन मात्र कागजी कार्रवाई करता है। पिछले कुछ सालों में 787 से अधिक तालाबों से कब्जे भी हटवाए गए हैं। करीब एक हजार से अधिक तालाबों पर कब्जे हैं। कई पर तो कॉलोनी काट दी गई, तो कई पर कब्जा कर मिट्टी से पाट दिया गया। कुछ तालाब तो ऐसे हैं, जिन पर अपने कब्जे के दावे के लिए मुकदमे भी चल रहे हैं।
रामपुर मनिहारान तहसील के अंतर्गत 1030 तालाब बचे हैं। करीब 200 तालाब विलुप्त हो चुके हैं। इनमें स्थायी अतिक्रमण वाले तालाब 191 हैं, जबकि अस्थायी अतिक्रमण वाले तालाबों की संख्या 38 है। बड़गांव क्षेत्र में पांच तालाब हुआ करते थे, जिनमें से तीन का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। शेष दो तालाब चारों ओर से अतिक्रमण की जद में हैं। पुवांरका के जनता रोड चकहरेटी में दस साल पहले आठ तालाब हुआ करते थे। इनमें से तीन खत्म हो चुके हैं। जाहरवीर गोगा म्हाड़ी से आगे तालाब की भूमि पर कब्जा कर कॉलोनी भी काट दी गई। वहीं होलिका दहन के स्थान के पास वाले तालाब पर भी कब्जा कर खेती हो रही है।
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चकहरेटी में ही नलकूप के आगे श्मशान घाट के पास तालाब पर मिट्टी से भराव कर चहारदीवारी कर दी गई। कुछ हिस्से पर कूड़ा डालकर ऊपर से मिट्टी का भराव कर समतल करने के बाद काफी हिस्सा खाली पड़ा है। नकुड़ के गांव टाबर में चार तालाब दर्ज राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं, लेकिन मौके पर तीन ही तालाब है।
- कुछ जगह तालाब तो हैं, पर इनमें पानी नहीं
कुछ जगह पर अमृत सरोवर मौजूद है, लेकिन उनमें पानी नहीं है। अंबाला रोड में ग्राम पंचायत नन्हेड़ा के तहत बना सरोवर पूरी तरह से सूखा है। इसी तरह देहरादून रोड पर भी तालाब पूरी तरह से सूखा हुआ है। यही नहीं महानगर के दिल्ली रोड पर हसनपुर चौक से आगे आमने-सामने दो तालाब है। एक तालाब में कॉलोनियों का गंदा पानी भर दिया। इसके बाद इसे हटाया गया। सामने भी तालाब बना है। सुंदरीकरण भी हुआ है, लेकिन पानी नहीं है।
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तालाब को कब्जामुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाता है। इसके बाद भी कई तालाब ऐसे हैं, जिन पर कब्जा है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन मात्र कागजी कार्रवाई करता है। पिछले कुछ सालों में 787 से अधिक तालाबों से कब्जे भी हटवाए गए हैं। करीब एक हजार से अधिक तालाबों पर कब्जे हैं। कई पर तो कॉलोनी काट दी गई, तो कई पर कब्जा कर मिट्टी से पाट दिया गया। कुछ तालाब तो ऐसे हैं, जिन पर अपने कब्जे के दावे के लिए मुकदमे भी चल रहे हैं।
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रामपुर मनिहारान तहसील के अंतर्गत 1030 तालाब बचे हैं। करीब 200 तालाब विलुप्त हो चुके हैं। इनमें स्थायी अतिक्रमण वाले तालाब 191 हैं, जबकि अस्थायी अतिक्रमण वाले तालाबों की संख्या 38 है। बड़गांव क्षेत्र में पांच तालाब हुआ करते थे, जिनमें से तीन का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। शेष दो तालाब चारों ओर से अतिक्रमण की जद में हैं। पुवांरका के जनता रोड चकहरेटी में दस साल पहले आठ तालाब हुआ करते थे। इनमें से तीन खत्म हो चुके हैं। जाहरवीर गोगा म्हाड़ी से आगे तालाब की भूमि पर कब्जा कर कॉलोनी भी काट दी गई। वहीं होलिका दहन के स्थान के पास वाले तालाब पर भी कब्जा कर खेती हो रही है।
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चकहरेटी में ही नलकूप के आगे श्मशान घाट के पास तालाब पर मिट्टी से भराव कर चहारदीवारी कर दी गई। कुछ हिस्से पर कूड़ा डालकर ऊपर से मिट्टी का भराव कर समतल करने के बाद काफी हिस्सा खाली पड़ा है। नकुड़ के गांव टाबर में चार तालाब दर्ज राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं, लेकिन मौके पर तीन ही तालाब है।
- कुछ जगह तालाब तो हैं, पर इनमें पानी नहीं
कुछ जगह पर अमृत सरोवर मौजूद है, लेकिन उनमें पानी नहीं है। अंबाला रोड में ग्राम पंचायत नन्हेड़ा के तहत बना सरोवर पूरी तरह से सूखा है। इसी तरह देहरादून रोड पर भी तालाब पूरी तरह से सूखा हुआ है। यही नहीं महानगर के दिल्ली रोड पर हसनपुर चौक से आगे आमने-सामने दो तालाब है। एक तालाब में कॉलोनियों का गंदा पानी भर दिया। इसके बाद इसे हटाया गया। सामने भी तालाब बना है। सुंदरीकरण भी हुआ है, लेकिन पानी नहीं है।