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Saharanpur News: तत्कालीन जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने अदालत के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए
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सहारनपुर दंगे के मामले में अदालत में गवाही के लिए पहुंचीं तत्कालीन जिलाधिकारी संध्या तिवारी
सहारनपुर। जिले में 2014 में हुए दंगे के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने अदालत के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए। अदालत को बताया कि उस घटना के दौरान आरोपी घटनास्थल पर मौजूद था और भीड़ का नेतृत्व कर रहा था।
वर्ष 2014 में गुरुद्वारा रोड स्थित धार्मिक स्थल की भूमि के कब्जे पर महानगर में दंगा भड़क गया था। इसी मामले की सुनवाई मंगलवार को अदालत में हुई। मामला अपर स्तर न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन में जारी है। सुनवाई में जिलाधिकारी रहीं संध्या तिवारी ने अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर भारी भीड़ थी। उनके हाथ में हथियार भी थे। भीड़ को समझाने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी। मेरे साथ में फोर्स भी खड़ी थी। इसी दौरान मुझे आवाज सुनाई दी की गोली लग गई है। वहां कांस्टेबल सेंसरपाल के कंधे पर गोली लगी थी। अपनी गवाही में उन्होंने बताया कि भीड़ का नेतृत्व कर रहे आरोपी के हाथ में तमंचा था। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बहस की। राज्य की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी कर रहे हैं।
- दस सितंबर को हो चुकी है तत्कालीन एसएसपी की गवाही
मामले में बीती दस सितंबर को तत्कालीन एसएसपी रहे राजेश पांडे की भी गवाही हो चुकी है। उन्होंने भी अपनी गवाही में भीड़ का नेतृत्व कर रहे आरोपी की पहचान की थी। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि दंगे के दौरान अचानक से भारी संख्या में भीड़ ने थाना कुतुबशेर के पास ही गुरुद्वारा रोड की तरफ पथराव कर दिया। इसके साथ ही अंबाला रोड स्थित सैकड़ों दुकानों को आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान गोली सिपाही को भी लगी थी।
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- दंगे में तीन लोगों की हो गई थी मौत
सहारनपुर में हुए दंगे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। 21 लोग घायल हो गए थे। इनमें एक सिपाही और होमगार्ड समेत 11 लोगों को गोली लगी थी। दंगाइयों ने शहर में 100 से अधिक दुकानों और वाहनों में आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के छह थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया था।
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वर्ष 2014 में गुरुद्वारा रोड स्थित धार्मिक स्थल की भूमि के कब्जे पर महानगर में दंगा भड़क गया था। इसी मामले की सुनवाई मंगलवार को अदालत में हुई। मामला अपर स्तर न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन में जारी है। सुनवाई में जिलाधिकारी रहीं संध्या तिवारी ने अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर भारी भीड़ थी। उनके हाथ में हथियार भी थे। भीड़ को समझाने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी। मेरे साथ में फोर्स भी खड़ी थी। इसी दौरान मुझे आवाज सुनाई दी की गोली लग गई है। वहां कांस्टेबल सेंसरपाल के कंधे पर गोली लगी थी। अपनी गवाही में उन्होंने बताया कि भीड़ का नेतृत्व कर रहे आरोपी के हाथ में तमंचा था। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बहस की। राज्य की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी कर रहे हैं।
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- दस सितंबर को हो चुकी है तत्कालीन एसएसपी की गवाही
मामले में बीती दस सितंबर को तत्कालीन एसएसपी रहे राजेश पांडे की भी गवाही हो चुकी है। उन्होंने भी अपनी गवाही में भीड़ का नेतृत्व कर रहे आरोपी की पहचान की थी। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि दंगे के दौरान अचानक से भारी संख्या में भीड़ ने थाना कुतुबशेर के पास ही गुरुद्वारा रोड की तरफ पथराव कर दिया। इसके साथ ही अंबाला रोड स्थित सैकड़ों दुकानों को आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान गोली सिपाही को भी लगी थी।
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- दंगे में तीन लोगों की हो गई थी मौत
सहारनपुर में हुए दंगे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। 21 लोग घायल हो गए थे। इनमें एक सिपाही और होमगार्ड समेत 11 लोगों को गोली लगी थी। दंगाइयों ने शहर में 100 से अधिक दुकानों और वाहनों में आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के छह थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया था।