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Saharanpur News: रेहड़ों की गुणवत्ता बेहद घटिया, होंगे वापस
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-जांच में कमजोर पाई गई है रेहड़ों के पहियों और बेस की गुणवत्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा कचरा उठान के लिए खरीदे गए 500 रेहड़ों की गुणवत्ता खराब पाई गई है। ऐसे में निगम अधिकारियों ने सभी रेहड़ों को वापस करने का निर्णय लिया है। रेहड़ों की कीमत लाखों रुपये में है।
नगर निगम ने करीब तीन महीने पहले ही रेहड़े खरीदे हैं, जो तब से ही खुले आसमान के नीचे खड़े धूप, धूल और बारिश को झेल रहे हैं। नगर निगम परिसर के पार्क में खड़े किए गए रेहड़ों के रिम आदि पर जंग आ चुके हैं। रेहड़ों के हैंडल पर लगे माइक बारिश का पानी घुसने से खराब हो गए हैं। प्रत्येक माइक की कीमत भी करीब एक से डेढ़ हजार रुपये है। अमर उजाला ने करीब एक महीने पहले रेहड़ों के कबाड़ बनने का समाचार प्रकाशित किया था। तब अधिकारियों ने बताया था कि रेहड़ों को वार्डाें में भेजा जा रहा है, लेकिन इसके बाद रेहड़ों की गुणवत्ता की जांच बिठा दी गई। जांच में पाया गया है कि रेहड़ों के पीछे के दोनों पहिये बेहद कमजोर हैं, जो अधिक वजह उठाने में कामयाब नहीं हैं। इसके अलावा रेहड़ों के बॉक्स और बेस भी कमजोर पाए गए हैं। ऐसे में निगम ने रेहड़ों को कंपनी को वापस भेजने का निर्णय लिया है, क्योंकि रेहड़ों की कीमत और गुणवत्ता मेल नहीं खा रहे हैं।
पुरानों की मरम्मत नहीं, नए खरीदे जा रहे
नगर निगम में वाहनों और रेहड़ों की खरीद लगातार होती रही है। पुराने रेहड़े इस्तेमाल नहीं होने या फिर मरम्मत नहीं होने के कारण कचरा बन रहे हैं। यदि रेहड़ों की समय से मरम्मत हो तो वह और अधिक चल सकते हैं, लेकिन रेहड़ों की खरीद फायदे का काम है, जिसमें देरी नहीं की जाती है। पूरे महानगर में कहीं ट्यूबवैल परिसरों तो कहीं अन्य जगहों पर निगम के पुराने रेहड़े कचरा बन रहे हैं।
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बीते दिनों खरीदे गए 500 रेहड़ों की गुणवत्ता की जांच की गई है, जिसमें उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं पाई गई है। ऐसे में नगर निगम ने उक्त रेहड़ों को वापस भेजने का निर्णय लिया है। जिनके स्थान पर नए और मजबूत रेहड़े लिए जाएंगे।
राजेश यादव, अपर नगर आयुक्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा कचरा उठान के लिए खरीदे गए 500 रेहड़ों की गुणवत्ता खराब पाई गई है। ऐसे में निगम अधिकारियों ने सभी रेहड़ों को वापस करने का निर्णय लिया है। रेहड़ों की कीमत लाखों रुपये में है।
नगर निगम ने करीब तीन महीने पहले ही रेहड़े खरीदे हैं, जो तब से ही खुले आसमान के नीचे खड़े धूप, धूल और बारिश को झेल रहे हैं। नगर निगम परिसर के पार्क में खड़े किए गए रेहड़ों के रिम आदि पर जंग आ चुके हैं। रेहड़ों के हैंडल पर लगे माइक बारिश का पानी घुसने से खराब हो गए हैं। प्रत्येक माइक की कीमत भी करीब एक से डेढ़ हजार रुपये है। अमर उजाला ने करीब एक महीने पहले रेहड़ों के कबाड़ बनने का समाचार प्रकाशित किया था। तब अधिकारियों ने बताया था कि रेहड़ों को वार्डाें में भेजा जा रहा है, लेकिन इसके बाद रेहड़ों की गुणवत्ता की जांच बिठा दी गई। जांच में पाया गया है कि रेहड़ों के पीछे के दोनों पहिये बेहद कमजोर हैं, जो अधिक वजह उठाने में कामयाब नहीं हैं। इसके अलावा रेहड़ों के बॉक्स और बेस भी कमजोर पाए गए हैं। ऐसे में निगम ने रेहड़ों को कंपनी को वापस भेजने का निर्णय लिया है, क्योंकि रेहड़ों की कीमत और गुणवत्ता मेल नहीं खा रहे हैं।
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पुरानों की मरम्मत नहीं, नए खरीदे जा रहे
नगर निगम में वाहनों और रेहड़ों की खरीद लगातार होती रही है। पुराने रेहड़े इस्तेमाल नहीं होने या फिर मरम्मत नहीं होने के कारण कचरा बन रहे हैं। यदि रेहड़ों की समय से मरम्मत हो तो वह और अधिक चल सकते हैं, लेकिन रेहड़ों की खरीद फायदे का काम है, जिसमें देरी नहीं की जाती है। पूरे महानगर में कहीं ट्यूबवैल परिसरों तो कहीं अन्य जगहों पर निगम के पुराने रेहड़े कचरा बन रहे हैं।
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बीते दिनों खरीदे गए 500 रेहड़ों की गुणवत्ता की जांच की गई है, जिसमें उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं पाई गई है। ऐसे में नगर निगम ने उक्त रेहड़ों को वापस भेजने का निर्णय लिया है। जिनके स्थान पर नए और मजबूत रेहड़े लिए जाएंगे।
राजेश यादव, अपर नगर आयुक्त