{"_id":"68a852feba51d480a80c3267","slug":"the-more-simple-one-is-in-life-the-more-beautiful-it-will-be-goswami-saharanpur-news-c-30-1-smrt1014-156888-2025-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन में जो जितना सहज रहेगा वह उतना ही सुंदर होगा : गोस्वामी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन में जो जितना सहज रहेगा वह उतना ही सुंदर होगा : गोस्वामी
Fri, 22 Aug 2025 11:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 22 Aug 2025 11:51 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नागल। गांव मीरपुर मोहनपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पारस गोस्वामी ने कहा कि जो जीवन में जितना सहज रहेगा वह उतना ही सुंदर होगा। भगत को बनावट से दूर रहना चाहिए जो जैसा है उसी में वह अपने आप को प्रकट करे।
कथा वाचक ने कहा कि जब अवध वासियों ने प्रभु राम के जन्म के बारे में सुना तो वहां की महिलाएं मंगल कलश एवं थाली में मंगल वस्तुएं लेकर मंगल गीत गाते हुए राजा दशरथ के महल की ओर जाने लगी। साथ ही बाल अवस्था में भगवान श्री राम के दर्शन कर उनके चरण छुए। तभी एक दासी दौड़ते हुए राजा दशरथ के महल पहुंची।
उन्होंने बताया कि रानी केकई को भी एक पुत्र एवं सुमित्रा को दो पुत्र पैदा हुए हैं। समाचार सुनते ही राजा दशरथ के दरबार में और अधिक खुशी छा गई। राम के जन्म का समाचार सुनते ही सभी देवी देवता अवध की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने बताया कि पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार सूर्य नारायण भी मंगल उत्सव देखने के लिए एक माह तक एक जगह ही रुक गए, जिस कारण अयोध्या में एक माह तक रात्रि तक नहीं हो पाई और पूरे माह मंगल उत्सव मनाया गया।
विज्ञापन
आचार्य ने ध्रुव चरित्र एवं हिरण्यकश्यप के चरित्र का भी व्याख्यान किया। कथा में मुख्य रूप से रामअवतार वालिया, रूबी वालिया, सुषमा प्रधान, विभा वालिया, सरोज, अन्नू वालिया, अरुण प्रधान, आशु शर्मा, राज किशोर शर्मा, प्रवीण वालिया आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
नागल। गांव मीरपुर मोहनपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पारस गोस्वामी ने कहा कि जो जीवन में जितना सहज रहेगा वह उतना ही सुंदर होगा। भगत को बनावट से दूर रहना चाहिए जो जैसा है उसी में वह अपने आप को प्रकट करे।
कथा वाचक ने कहा कि जब अवध वासियों ने प्रभु राम के जन्म के बारे में सुना तो वहां की महिलाएं मंगल कलश एवं थाली में मंगल वस्तुएं लेकर मंगल गीत गाते हुए राजा दशरथ के महल की ओर जाने लगी। साथ ही बाल अवस्था में भगवान श्री राम के दर्शन कर उनके चरण छुए। तभी एक दासी दौड़ते हुए राजा दशरथ के महल पहुंची।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि रानी केकई को भी एक पुत्र एवं सुमित्रा को दो पुत्र पैदा हुए हैं। समाचार सुनते ही राजा दशरथ के दरबार में और अधिक खुशी छा गई। राम के जन्म का समाचार सुनते ही सभी देवी देवता अवध की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने बताया कि पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार सूर्य नारायण भी मंगल उत्सव देखने के लिए एक माह तक एक जगह ही रुक गए, जिस कारण अयोध्या में एक माह तक रात्रि तक नहीं हो पाई और पूरे माह मंगल उत्सव मनाया गया।
विज्ञापन
आचार्य ने ध्रुव चरित्र एवं हिरण्यकश्यप के चरित्र का भी व्याख्यान किया। कथा में मुख्य रूप से रामअवतार वालिया, रूबी वालिया, सुषमा प्रधान, विभा वालिया, सरोज, अन्नू वालिया, अरुण प्रधान, आशु शर्मा, राज किशोर शर्मा, प्रवीण वालिया आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।