फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   The Maa Shakambhari Siddhapeeth is the center of faith for millions of devotees.

Saharanpur News: करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां शाकंभरी सिद्धपीठ

Thu, 19 Mar 2026 01:49 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Thu, 19 Mar 2026 01:49 AM IST
विज्ञापन
The Maa Shakambhari Siddhapeeth is the center of faith for millions of devotees.
शाकंभरी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मां दुर्गा अकाल पड़ने पर देवताओं द्वारा की गई तपस्या के बाद मां शाकंभरी के रूप में यहां प्रकट हुई थी। मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक एवं फल उत्पन्न किए, जिसके बाद वह माता शाकंभरी कहलाई।
विज्ञापन

मंदिर के नजदीक वीर खेत के नाम से प्रसिद्ध मैदान पर मां भगवती और दैत्यों के बीच घोर युद्ध हुआ। यहीं पर माता ने महिषासुर राक्षस का वध किया था। पौराणिक कथाओं में सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का प्रमुख प्रसाद सराल बताया गया है। सराल एक विशेष प्रकार का फल है,जो शिवालिक पहाड़ियों पर ही पाया जाता है। देखने में यह शकरकंद जैसा होता है। मां के वरदान के कारण उनके दर्शनों से पहले बाबा भूरा देव के दर्शन करने जरूरी होते हैं। ऐसे में श्रद्धालु पहले बाबा के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाते हैं।
विज्ञापन


--------------------------------
विज्ञापन
विज्ञापन



समर्पण भाव से करें मां भगवती की आराधना
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी मंदिर स्थित शंकराचार्य आश्रम प्रभारी एवं संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरवतंत्राचार्य संत सहजानंद महाराज ने बताया कि नवरात्र में केवल उपवास तक सीमित न रहें, बल्कि जीवन में देवी के गुणों को आत्मसात करें। यही माता की सच्ची भक्ति है। नवरात्र का अर्थ ही है शक्ति का संचय और जागरण। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नवरात्र को केवल धार्मिक अनुष्ठान न मानकर आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और आत्मबल बढ़ाने का पर्व बनाएं। मां की आराधना समर्पण भाव, श्रद्धा और सच्चे मन से करें, तभी जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
-------------------


लेटकर जाते हैं मां के दरबार में
शाकंभरी। सिद्धपीठ में मन्नतें पूरी होने पर भवन तक लेट लेट कर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती है। कंकरीले और पथरीले रास्ते भी इनकी आस्था को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं।

- कलसिया निवासी अक्षय भूरादेव से सिद्धपीठ तक लेटकर मां के दर्शनों को जा रहा था। बताया कि चार वर्ष पूर्व उसके बड़े भाई का बेटा पैदा होते ही बीमार हो गया था। सभी डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया था तब उसने मां से मन्नत मांगी थी और मां के आशीर्वाद से भतीजा ठीक हो गया था।

-जनपद मुजफ्फरनगर का कस्बा बघरा निवासी परम सैनी, रेणु, इशिका तीनों भाई बहन काफी समय से सिद्धपीठ आ रहे हैं। रेणु पुलिस में सब इंस्पेक्टर की तैयारी कर रही है। उसने भी मां से मनोकामना पूर्ण होने पर मां के दरबार में लेट कर आने की मन्नत मांगी है।
-अनु शर्मा निवासी पानीपत का 14 वर्षीय बेटा कार्तिक गंभीर बीमारी के चलते दिल्ली हॉस्पिटल में एडमिट है। उसके अच्छा स्वास्थ्य होने के लिए वह लेटकर मां के दरबार में पहुंची।

-सविता निवासी गांव कलसिया बेहट के पास तीन लड़कियां थीं। लड़का होने की मन्नत मांगी थी। दो लड़के हो गए उसके बाद वह लेटकर मां के दरबार पहुंची है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed