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Saharanpur News: 25 गांवों का सफर दुश्वार, अब तो कतराने लगे रिश्तेदार
Sat, 07 Oct 2023 01:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 07 Oct 2023 01:29 AM IST
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तल्हेडी खेडा मुगल मार्ग पर टेंपों में बैठी सवारियां। संवाद
देवबंद। रूट निर्धारित होने के बाद भी देवबंद-नागल वाया चंदेना कोली मार्ग पर यात्रियों को बसों की सुविधा नहीं मिल रही है। बीस साल पहले रोडवेज और आठ साल पहले प्राइवेट बस बंद होने से 25 गांवों के ग्रामीण डग्गामार वाहनों से जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर हैं। वहीं 19 किमी लंबे तल्हेड़ी बुजुर्ग-खेड़ा मुगल मार्ग पर तो परिवहन का कोई साधन नहीं है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब तो उनके यहां पर रिश्तेदार भी आने से कतराते हैं, क्योंकि परिवहन की कोई सुविधा नहीं है।
देवबंद से चंदेना कोली होते हुए नागल तक 28 किमी लंबे इस सड़क मार्ग पर कभी 54 बसों का परमिट था। डग्गामार वाहनों के चलने से होने वाले नुकसान से बस संचालकों ने धीरे धीरे परमिट सरेंडर कर दिए। अब केवल 13 परमिट इस मार्ग पर बचे हैं। यह 13 बसें भी आठ साल पहले इस मार्ग पर चलनी बंद हो गई थीं। ये बस अब अपने निर्धारित रूट की बजाए देवबंद से बरला (मुजफ्फरनगर) तक चल रही हैं। ऐसे में केवल डग्गामार वाहनों के भरोसे ही ग्रामीण सफर कर रहे हैं। दिन ढलने के बाद तो डग्गामार वाहन भी नहीं चलते हैं।
परिवहन के साधनों की सबसे विकट स्थिति 19 किमी लंबे तलहेड़ी बुजुर्ग से खेड़ामुगल मार्ग की है। इस मार्ग पर आवागमन का कोई साधन नहीं है। ग्रामीण अपने संसाधनों से ही सफर करने को मजबूर हैं, जबकि यह मार्ग दर्जनभर से अधिक गांवों को जोड़ता है। परिवहन की व्यवस्था नहीं होने के चलते ग्रामीणों को तहसील और ब्लाक मुख्यालयों तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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यह बोले ग्रामीण
- गांव आमकी दीपचंदपुर के ग्राम प्रधान चौधरी हरेंद्र सिंह ने बताया कि नागल से चंदेना होते हुए देवबंद वाले रास्ते पर बीस साल पहले कुछ माह के लिए रोडवेज बसें भी चलीं, जिसके बाद यहां प्राइवेट बसों का संचालन शुरू हुआ वह भी आठ साल से बंद पड़ा है। वर्तमान में ग्रामीण ई-रिक्शा या अपने संसाधनों से आवागमन करते हैं।
- पठोड़ी गांव के प्रधान चौधरी मुकेश कुमार का कहना है कि रूट पर कोई प्राइवेट या रोडवेज बस नहीं चलने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
- ग्राम सोहनचिड़ा के प्रधान अब्दुल हसीब ने बताया कि सड़क मार्ग पर आवागमन के साधन नहीं होने से रिश्तेदार भी आने से कतराते हैं। उन्होंने अधिकारियों से जनहित में उक्त मार्ग पर बसों का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
- गंझेड़ी गांव निवासी प्रवीन कुमार ने बताया कि तलहेड़ी-खेड़ामुगल मार्ग पर आवागमन का कोई साधन नहीं हैं। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को अपने संसाधनों से ही आना जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने आज तक यह समस्या उनके समक्ष नहीं उठाई है। यदि ग्रामीण उन्हें अपनी इस परेशानी से अवगत कराते तो परिवहन मंत्री से मिलकर समस्या का समाधान कराया जाता। आगामी विधानसभा के सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा।
- देवेंद्र निम, विधायक रामपुर मनिहारान
देवबंद से नागल वाया चंदेना कोली तक बसों का संचालन नन्हेड़ा आसा, चंदेना कोली और सोहनचिड़ा गांवों में रास्ते छोटे होने के चलते बंद कर दिया गया था। अब इन गांवों में बाईपास का निर्माण चल रहा है। जल्द ही अधिकारियों के साथ वार्ता कर इस मार्ग पर बसों के संचालन को लेकर चर्चा होगी।
-श्रीनिवास त्यागी, प्रबंधक देवबंद-बरला प्राइवेट बस यूनियन
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देवबंद से चंदेना कोली होते हुए नागल तक 28 किमी लंबे इस सड़क मार्ग पर कभी 54 बसों का परमिट था। डग्गामार वाहनों के चलने से होने वाले नुकसान से बस संचालकों ने धीरे धीरे परमिट सरेंडर कर दिए। अब केवल 13 परमिट इस मार्ग पर बचे हैं। यह 13 बसें भी आठ साल पहले इस मार्ग पर चलनी बंद हो गई थीं। ये बस अब अपने निर्धारित रूट की बजाए देवबंद से बरला (मुजफ्फरनगर) तक चल रही हैं। ऐसे में केवल डग्गामार वाहनों के भरोसे ही ग्रामीण सफर कर रहे हैं। दिन ढलने के बाद तो डग्गामार वाहन भी नहीं चलते हैं।
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परिवहन के साधनों की सबसे विकट स्थिति 19 किमी लंबे तलहेड़ी बुजुर्ग से खेड़ामुगल मार्ग की है। इस मार्ग पर आवागमन का कोई साधन नहीं है। ग्रामीण अपने संसाधनों से ही सफर करने को मजबूर हैं, जबकि यह मार्ग दर्जनभर से अधिक गांवों को जोड़ता है। परिवहन की व्यवस्था नहीं होने के चलते ग्रामीणों को तहसील और ब्लाक मुख्यालयों तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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यह बोले ग्रामीण
- गांव आमकी दीपचंदपुर के ग्राम प्रधान चौधरी हरेंद्र सिंह ने बताया कि नागल से चंदेना होते हुए देवबंद वाले रास्ते पर बीस साल पहले कुछ माह के लिए रोडवेज बसें भी चलीं, जिसके बाद यहां प्राइवेट बसों का संचालन शुरू हुआ वह भी आठ साल से बंद पड़ा है। वर्तमान में ग्रामीण ई-रिक्शा या अपने संसाधनों से आवागमन करते हैं।
- पठोड़ी गांव के प्रधान चौधरी मुकेश कुमार का कहना है कि रूट पर कोई प्राइवेट या रोडवेज बस नहीं चलने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
- ग्राम सोहनचिड़ा के प्रधान अब्दुल हसीब ने बताया कि सड़क मार्ग पर आवागमन के साधन नहीं होने से रिश्तेदार भी आने से कतराते हैं। उन्होंने अधिकारियों से जनहित में उक्त मार्ग पर बसों का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
- गंझेड़ी गांव निवासी प्रवीन कुमार ने बताया कि तलहेड़ी-खेड़ामुगल मार्ग पर आवागमन का कोई साधन नहीं हैं। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को अपने संसाधनों से ही आना जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने आज तक यह समस्या उनके समक्ष नहीं उठाई है। यदि ग्रामीण उन्हें अपनी इस परेशानी से अवगत कराते तो परिवहन मंत्री से मिलकर समस्या का समाधान कराया जाता। आगामी विधानसभा के सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा।
- देवेंद्र निम, विधायक रामपुर मनिहारान
देवबंद से नागल वाया चंदेना कोली तक बसों का संचालन नन्हेड़ा आसा, चंदेना कोली और सोहनचिड़ा गांवों में रास्ते छोटे होने के चलते बंद कर दिया गया था। अब इन गांवों में बाईपास का निर्माण चल रहा है। जल्द ही अधिकारियों के साथ वार्ता कर इस मार्ग पर बसों के संचालन को लेकर चर्चा होगी।
-श्रीनिवास त्यागी, प्रबंधक देवबंद-बरला प्राइवेट बस यूनियन