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पुलिस की मंशा पर उठने लगे सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 21 May 2016 12:07 AM IST
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MPs, MLAs and others arrived DIG office.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में मोबाइल कारोबारी हिमांशु हत्याकांड का मुख्य आरोपी अमजद पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। ऐसे में पुलिस की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते अमजद पर हाथ नहीं डाल पा रही है।
इसे लेकर व्यापारियों में पुलिस के प्रति रोष है, जो किसी भी दिन सामने आ सकता है। 12 मई की रात दो बाइक पर आए चार बदमाशों ने मोबाइल व्यापारी हिमांशु (32) और उसके पिता से उस समय लाखों रुपये लूट लिए थे, जब वह रात में करीब साढ़े 11 बजे दुकान बंद कर अपने घर लौट रहे थे।
इस दौरान बदमाशों ने हिमांशु के पेट में गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। वारदात के अगले दिन खुलासे और बदमाशों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर नेताओं और व्यापारियों ने एससपी का घेराव किया था।
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चार दिन के भीतर तत्कालीन एसएसपी आरपीएस यादव ने मामले का खुलासा कर दिया था। पुलिस ने वारदात में शामिल रहे दो बदमाशों विकास त्यागी और भीमा शर्मा को गिरफ्तार करने के साथ ही उनसे एक लाख 98 हजार रुपये की नगदी भी बरामद की थी।
हिमांशु को गोली मारने वाला मुख्य आरोपी अमजद आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पकड़े गए दोनों आरोपी भी पूछताछ में यह बता चुके हैं कि हिमांशु पर गोली अमजद ने ही चलाई थी।
चर्चा है कि अमजद पर एक सत्ताधारी नेता का हाथ है, जिसकी वजह से पुलिस अमजद पर हाथ नहीं डाल पा रही है। अमजद का आपराधिक रिकार्ड भी रहा है, मगर नेताजी का हाथ सिर पर होने की वजह से वह अभी तक बचता रहा है।
हैरत की बात यह है कि छोटी-छोटी घटनाओं में आरोपी पर दबाव बनाने के लिए पुलिस उसके परिजनों को परेशान करती है, मगर इस प्रकरण में पुलिस ऐसा भी कुछ नहीं कर सकी है।
इससे साबित होता है कि पुलिस वास्तव में दबाव में काम कर रही है। यही वजह है कि प्रकरण को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। व्यापारियों में भारी रोष है, जो कभी भी सामने आ सकता है। उधर, सीओ द्वितीय अमित नागर ने बताया कि पुलिस अमजद की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
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इसे लेकर व्यापारियों में पुलिस के प्रति रोष है, जो किसी भी दिन सामने आ सकता है। 12 मई की रात दो बाइक पर आए चार बदमाशों ने मोबाइल व्यापारी हिमांशु (32) और उसके पिता से उस समय लाखों रुपये लूट लिए थे, जब वह रात में करीब साढ़े 11 बजे दुकान बंद कर अपने घर लौट रहे थे।
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इस दौरान बदमाशों ने हिमांशु के पेट में गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। वारदात के अगले दिन खुलासे और बदमाशों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर नेताओं और व्यापारियों ने एससपी का घेराव किया था।
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चार दिन के भीतर तत्कालीन एसएसपी आरपीएस यादव ने मामले का खुलासा कर दिया था। पुलिस ने वारदात में शामिल रहे दो बदमाशों विकास त्यागी और भीमा शर्मा को गिरफ्तार करने के साथ ही उनसे एक लाख 98 हजार रुपये की नगदी भी बरामद की थी।
हिमांशु को गोली मारने वाला मुख्य आरोपी अमजद आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पकड़े गए दोनों आरोपी भी पूछताछ में यह बता चुके हैं कि हिमांशु पर गोली अमजद ने ही चलाई थी।
चर्चा है कि अमजद पर एक सत्ताधारी नेता का हाथ है, जिसकी वजह से पुलिस अमजद पर हाथ नहीं डाल पा रही है। अमजद का आपराधिक रिकार्ड भी रहा है, मगर नेताजी का हाथ सिर पर होने की वजह से वह अभी तक बचता रहा है।
हैरत की बात यह है कि छोटी-छोटी घटनाओं में आरोपी पर दबाव बनाने के लिए पुलिस उसके परिजनों को परेशान करती है, मगर इस प्रकरण में पुलिस ऐसा भी कुछ नहीं कर सकी है।
इससे साबित होता है कि पुलिस वास्तव में दबाव में काम कर रही है। यही वजह है कि प्रकरण को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। व्यापारियों में भारी रोष है, जो कभी भी सामने आ सकता है। उधर, सीओ द्वितीय अमित नागर ने बताया कि पुलिस अमजद की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।