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घर को दर्शाया गया था मुखौटा कंपनी का दफ्तर
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सहारनपुर। प्रदेश की चीनी मिलें खरीदने के लिए पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल और इनके सहयोगियों ने जिन मुखौटा कंपनियों का सहारा लिया, उन कंपनियों का कागजों में बड़ा लेनदेन दर्शाया गया था, जबकि वास्तविक लेनदेन हुआ ही नहीं था। वहीं, कंपनी का ऑफिस जहां दर्शाया था, वह कंपनी की डायरेक्टर का घर था। यह सच्चाई कंपनी की डायरेक्टर सुमन शर्मा द्वारा एसएफआईओ और सीबीआई की जांच के दौरान दिए थे। इन बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मुखौटा कंपनियों का खुलासा हुआ था।
प्रवर्तन निदेशालय ने एक दिन पहले ही इस मामले में हाजी इकबाल की उन सभी चीनी मिलों की संपत्ति को अटैच किया है, जो मुखौटा कंपनी मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये खरीदी गई थीं। जब यह कंपनियां बनाई गई थीं तो अपने करी बी लोगों को डायरेक्टर बनाया था, लेकिन इनमें कई डायरेक्टरों ने जांच के दौरान जो बयान दिए थे, उन्हीं से पूरा खेल उजागर हो गया था। यही वजह है कि 2017 में जब लखनऊ के गोमतीनगर थाने में इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई तो कंपनियों के उन डायरेक्टरों के बयानों से हुए खुलासे को भी आधार बनाया गया था। उसमें उल्लेख था कि कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और शेयर न तो आवंटित किए गए और न ही हस्तांतरित किए गए थे। बैलेंस शीट में दिखाई कंपनी का नेटवर्थ, संपत्ति एवं दायित्व की रकम काल्पनिक थी। कंपनी के खातों में कोई वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ था।
गिरियाशो कंपनी में निदेशक बनाई गईं सुमन शर्मा ने एक फरवरी 2017 को शपथपूर्वक बयान दिया था कि कंपनी के कार्यालय के रूप में जिस जगह का जिक्र किया है, वह उनका निजी आवास है तथा यहां कंपनी का कार्यालय संचालित नहीं है। नम्रता कंपनी के निदेशक बनाए धर्मेंद्र गुप्ता ने भी 10 मार्च और 14 मार्च 2017 को जांच एजेंसी को बयान में बताया था कि वह तो दोनों कंपनी बेचने वाले सुरेश कुमार गुप्ता के यहां कर्मचारी था, उसी के इशारे पर निदेशक बनाया गया। इन बातों का उल्लेख 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में किया गया था।
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दोनों कंपनियों में निदेशक हैं हाजी इकबाल के बेटे
- मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, सौरभ मुकुंद और मो. जावेद को निदेशक हैं। इनमें मो. जावेद हाजी इकबाल का बेटा है।
- मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में सुमन शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, मो. नसीम और मो. वाजिद निदेशक हैं। इनमें मो. वाजिद हाजी इकबाल का बेटा है।
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प्रवर्तन निदेशालय ने एक दिन पहले ही इस मामले में हाजी इकबाल की उन सभी चीनी मिलों की संपत्ति को अटैच किया है, जो मुखौटा कंपनी मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये खरीदी गई थीं। जब यह कंपनियां बनाई गई थीं तो अपने करी बी लोगों को डायरेक्टर बनाया था, लेकिन इनमें कई डायरेक्टरों ने जांच के दौरान जो बयान दिए थे, उन्हीं से पूरा खेल उजागर हो गया था। यही वजह है कि 2017 में जब लखनऊ के गोमतीनगर थाने में इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई तो कंपनियों के उन डायरेक्टरों के बयानों से हुए खुलासे को भी आधार बनाया गया था। उसमें उल्लेख था कि कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और शेयर न तो आवंटित किए गए और न ही हस्तांतरित किए गए थे। बैलेंस शीट में दिखाई कंपनी का नेटवर्थ, संपत्ति एवं दायित्व की रकम काल्पनिक थी। कंपनी के खातों में कोई वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ था।
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गिरियाशो कंपनी में निदेशक बनाई गईं सुमन शर्मा ने एक फरवरी 2017 को शपथपूर्वक बयान दिया था कि कंपनी के कार्यालय के रूप में जिस जगह का जिक्र किया है, वह उनका निजी आवास है तथा यहां कंपनी का कार्यालय संचालित नहीं है। नम्रता कंपनी के निदेशक बनाए धर्मेंद्र गुप्ता ने भी 10 मार्च और 14 मार्च 2017 को जांच एजेंसी को बयान में बताया था कि वह तो दोनों कंपनी बेचने वाले सुरेश कुमार गुप्ता के यहां कर्मचारी था, उसी के इशारे पर निदेशक बनाया गया। इन बातों का उल्लेख 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में किया गया था।
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दोनों कंपनियों में निदेशक हैं हाजी इकबाल के बेटे
- मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, सौरभ मुकुंद और मो. जावेद को निदेशक हैं। इनमें मो. जावेद हाजी इकबाल का बेटा है।
- मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में सुमन शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, मो. नसीम और मो. वाजिद निदेशक हैं। इनमें मो. वाजिद हाजी इकबाल का बेटा है।