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कर्मचारियों के एसी और हीटर का बिल भर रहा अस्पताल
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सहारनपुर। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्साकर्मियों के एसी और हीटर का बिजली बिल विभाग चुकता कर रहा है। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी घरों में एसी और हीटर का प्रयोग कर रहे हैं जिसमें अस्पताल प्रशासन को हर माह 25 से 30 लाख रुपये विद्युत बिल के भरने पड़ रहे हैं। जानकर हैरानी होगी कि अधिकारी तो अधिकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने भी घरों में एसी लगाए हुए हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल परिसर में सिंगल रूम से लेकर सीएमओ की कोठी समेत 150 से अधिक सरकारी आवास हैं। इनमें सिंगल रूम, डबल रूम, थ्री रूम और उससे ऊपर की कैटेगरी के मकान शामिल हैं। सभी के लिए बिजली का अलग-अलग बिल निर्धारित है। मगर जो कर्मचारी महीने में मात्र 322 रुपये बिल चुका रहे हैं, वह भी जमकर एसी का आनंद ले रहे हैं। करीब 50 फीसदी घरों पर एसी लगे हुए हैं। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि इन ज्यादातर घरों में भोजन भी हीटर पर बनता है। कई-कई माह तक गैस सिलिंडर नहीं भरवाए जाते हैं। अब अनेक कर्मचारी शहर में अपना मकान होने के बावजूद अस्पताल परिसर के आवास को छोड़ना नहीं चाहते हैं। बिजली की अंधाधुंध बर्बादी की जानकारी होने के बाद भी अधिकारी मौन हैं। संवाद
आवास की श्रेणी निर्धारित बिल
सिंगल रूम सैट 322
टू रूम सैट 1074
थ्री रूम सैट 1874
बड़े आवास 2486
कुछ कर्मचारी बिल भी नहीं चुकाते
जिला अस्पताल के जिम्मेदार कर्मचारी ने बताया कि एसबीडी जिला अस्पताल में बिजली बिल और मकान का किराया कर्मचारियों के वेतन से काट लिया जाता है। मगर महिला अस्पताल में अनेक कर्मचारी ऐसे भी हैं जो अपने वेतन से बिजली का पैसा नहीं कटवाते हैं। यह भी जांच का विषय है।
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बिजली की बर्बादी ठीक नहीं है। कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगने चाहिए थे, जो पूर्व के अधिकारियों ने लगवाए नहीं। मामले को दिखवाया जाएगा। कर्मचारियों को पत्र जारी कर बिजली की बर्बादी रोकी जाएगी और कोशिश की जाएगी कि सभी आवासों पर मीटर लग जाएं।
डॉ. संजीव मांगलिक, सीएमओ।
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एसबीडी जिला अस्पताल परिसर में सिंगल रूम से लेकर सीएमओ की कोठी समेत 150 से अधिक सरकारी आवास हैं। इनमें सिंगल रूम, डबल रूम, थ्री रूम और उससे ऊपर की कैटेगरी के मकान शामिल हैं। सभी के लिए बिजली का अलग-अलग बिल निर्धारित है। मगर जो कर्मचारी महीने में मात्र 322 रुपये बिल चुका रहे हैं, वह भी जमकर एसी का आनंद ले रहे हैं। करीब 50 फीसदी घरों पर एसी लगे हुए हैं। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि इन ज्यादातर घरों में भोजन भी हीटर पर बनता है। कई-कई माह तक गैस सिलिंडर नहीं भरवाए जाते हैं। अब अनेक कर्मचारी शहर में अपना मकान होने के बावजूद अस्पताल परिसर के आवास को छोड़ना नहीं चाहते हैं। बिजली की अंधाधुंध बर्बादी की जानकारी होने के बाद भी अधिकारी मौन हैं। संवाद
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आवास की श्रेणी निर्धारित बिल
सिंगल रूम सैट 322
टू रूम सैट 1074
थ्री रूम सैट 1874
बड़े आवास 2486
कुछ कर्मचारी बिल भी नहीं चुकाते
जिला अस्पताल के जिम्मेदार कर्मचारी ने बताया कि एसबीडी जिला अस्पताल में बिजली बिल और मकान का किराया कर्मचारियों के वेतन से काट लिया जाता है। मगर महिला अस्पताल में अनेक कर्मचारी ऐसे भी हैं जो अपने वेतन से बिजली का पैसा नहीं कटवाते हैं। यह भी जांच का विषय है।
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बिजली की बर्बादी ठीक नहीं है। कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगने चाहिए थे, जो पूर्व के अधिकारियों ने लगवाए नहीं। मामले को दिखवाया जाएगा। कर्मचारियों को पत्र जारी कर बिजली की बर्बादी रोकी जाएगी और कोशिश की जाएगी कि सभी आवासों पर मीटर लग जाएं।
डॉ. संजीव मांगलिक, सीएमओ।