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मौत के बाद भी धड़क रहा है फौजी का दिल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 26 Mar 2017 01:34 AM IST
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सेना का जवान सचिन (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले फौजी को जिंदगी भले ही नसीब नहीं हुई, लेकिन उसका दिल अब भी धड़क रहा है। दाद देनी होगी उस फौजी के पिता की जिसने अपने लख्ते जिगर के आखिरी सांस लेते वक्त उसका दिल दान करने का बड़ा फैसला लिया।
सेना के जवान की मौत से पहले उसका दिल हरियाणा के एक नौजवान को प्रत्यारोपित कर दिया गया है। इस सफल प्रत्यारोपण के बाद झज्जर इलाके के रहने वाले हरमिंदर के सीने में उस फौजी का दिल धड़क रहा है।
गंगोह कस्बे के गांव इशोपुर निवासी सचिन (28) सेना में भर्ती हुआ था। फौज से घर पर परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आया सचिन 8 मार्च को अपनी मोटर साइकिल पर कहीं जा रहा था। अचानक उसकी मोटरसाइकिल के सामने एक कुत्ता आ गया। उसको बचाते समय सचिन का एक्सीडेंट हो गया।
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सचिन की गंभीर अवस्था को देखते हुए उसके परिजन उसे दिल्ली स्थित आरएंडआर आर्मी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहां पर इलाज के दौरान सैनिक का ब्रेन डेड हो गया। इसके बाद डॉक्टर्स ने उसके पिता से संपर्क किया और पूरी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने मौत से सैनिक के अंगों को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद पिता ने तत्काल ही उसका दिल एक जरूरतमंद को दान करने का फैसला कर लिया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि दान करने से पहले तक उस व्यक्ति के बारे में सैनिक के पिता सुखपाल को कुछ नहीं पता था। सचिन के पिता सुखपाल के तुरंत लिए गए इस फैसले की जानकारी अपने परिवार में किसी को नहीं दी थी।
अमर उजाला की टीम ने जब उनके परिजनों से संपर्क किया तो सुखपाल के द्वारा लिए गए इतने बडे़ फैसले का पता चला। हालांकि अब लोग सुखपाल के इस फैसले से बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि हमें बहुत खुशी है कि हमारे बच्चे का दिल कहीं तो धड़क रहा है। सचिन की बहन जूली का कहना है कि हमें बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा लग रहा है कि हमारा भाई हमारे ही पास है।
2012 में ज्वाइन की थी सेना की नौकरी
सहारनपुर शहर से लगभग 60 किमी दूर बसे गांव ईसापूर में रहने वाले सचिन ने वर्ष 2012 में फ़ौज में नौकरी ज्वाइन की थी। पिता के एकलौते पुत्र सचिन के परिवार में उसके माता पिता व दो बहनें हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है और एक बहन ने अभी इंटर की पढ़ाई पूरी की है। 2013 में सचिन की शादी हुयी थी। उसका तीन साल का एक बेटा भी है। हालांकि अब तक उसकी पत्नी पिंकी और मां सुमलेश सचिन की मौत के सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
हरमिंदर के सीने में धड़क रहा सचिन का दिल
हरियाणा के झज्जर इलाके में रहने वाले 28 साल के हरमिंदर सिंह के सीने में सहारनपुर के सचिन का दिल धड़क रहा है। आठ मार्च को दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर आठ मिनट में सचिन का दिल बीएलके हॉस्पिटल लाया गया।
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सेना के जवान की मौत से पहले उसका दिल हरियाणा के एक नौजवान को प्रत्यारोपित कर दिया गया है। इस सफल प्रत्यारोपण के बाद झज्जर इलाके के रहने वाले हरमिंदर के सीने में उस फौजी का दिल धड़क रहा है।
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गंगोह कस्बे के गांव इशोपुर निवासी सचिन (28) सेना में भर्ती हुआ था। फौज से घर पर परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आया सचिन 8 मार्च को अपनी मोटर साइकिल पर कहीं जा रहा था। अचानक उसकी मोटरसाइकिल के सामने एक कुत्ता आ गया। उसको बचाते समय सचिन का एक्सीडेंट हो गया।
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सचिन की गंभीर अवस्था को देखते हुए उसके परिजन उसे दिल्ली स्थित आरएंडआर आर्मी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहां पर इलाज के दौरान सैनिक का ब्रेन डेड हो गया। इसके बाद डॉक्टर्स ने उसके पिता से संपर्क किया और पूरी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने मौत से सैनिक के अंगों को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद पिता ने तत्काल ही उसका दिल एक जरूरतमंद को दान करने का फैसला कर लिया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि दान करने से पहले तक उस व्यक्ति के बारे में सैनिक के पिता सुखपाल को कुछ नहीं पता था। सचिन के पिता सुखपाल के तुरंत लिए गए इस फैसले की जानकारी अपने परिवार में किसी को नहीं दी थी।
अमर उजाला की टीम ने जब उनके परिजनों से संपर्क किया तो सुखपाल के द्वारा लिए गए इतने बडे़ फैसले का पता चला। हालांकि अब लोग सुखपाल के इस फैसले से बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि हमें बहुत खुशी है कि हमारे बच्चे का दिल कहीं तो धड़क रहा है। सचिन की बहन जूली का कहना है कि हमें बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा लग रहा है कि हमारा भाई हमारे ही पास है।
2012 में ज्वाइन की थी सेना की नौकरी
सहारनपुर शहर से लगभग 60 किमी दूर बसे गांव ईसापूर में रहने वाले सचिन ने वर्ष 2012 में फ़ौज में नौकरी ज्वाइन की थी। पिता के एकलौते पुत्र सचिन के परिवार में उसके माता पिता व दो बहनें हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है और एक बहन ने अभी इंटर की पढ़ाई पूरी की है। 2013 में सचिन की शादी हुयी थी। उसका तीन साल का एक बेटा भी है। हालांकि अब तक उसकी पत्नी पिंकी और मां सुमलेश सचिन की मौत के सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
हरमिंदर के सीने में धड़क रहा सचिन का दिल
हरियाणा के झज्जर इलाके में रहने वाले 28 साल के हरमिंदर सिंह के सीने में सहारनपुर के सचिन का दिल धड़क रहा है। आठ मार्च को दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर आठ मिनट में सचिन का दिल बीएलके हॉस्पिटल लाया गया।