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गोद लेने के बाद भी नहीं सुधरी कुपोषित बच्चों की सेहत

Fri, 02 Sep 2022 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Sep 2022 11:27 PM IST
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The health of malnourished children did not improve even after adoption
अपनी बेटी के साथ गांव सोहनचिडा निवासी खुशनसीब - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले में कुपोषण का शिकार हुए बच्चों की सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित 26 अधिकारियों ने 619 कुपोषित बच्चों के आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया है। इन आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी वही है, जो और अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों की है। अधिकारियों के गोद लेने के बावजूद भी इन क्षेत्रों के बच्चों की सेहत में सुधार नहीं हुआ है। हकीकत, यह है कि गोद लिए गांवों में सिर्फ कागजों में ही बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने की कवायद हुई है। इसी पर प्रस्तुत है अमर उजाला की पड़ताल करनी रिपोर्ट
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सेहत में नहीं हुआ सुधार
-नागल विकास खंड के गांव सोहनचिड़ा निवासी खुशनसीब की पांच वर्षीय पुत्री आरिफा जन्म से ही कुपोषण की शिकार है। खुशनसीब का कहना है कि उसके गांव के आंगनबाड़ी केंद्र को जिला युवा कल्याण अधिकारी ने गोद ले रखा है, लेकिन बावजूद इसके बच्चों की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है। न ही कोई खास देखरेख की जाती है।
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अधिकारी ने नहीं ली सुध
गांव मीरपुर मोहनपुर निवासी मोनिका की बेटी वाणी (4) जन्म से ही कुपोषित है। उसका कहना है कि उन्हें बताया गया है कि उनके गांव को सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारी समिति द्वारा गोद लिया गया है, लेकिन आज तक अधिकारी ने कोई सुध नहीं ली है। उसकी बच्ची को पोषणयुक्त कुछ भी अतिरिक्त सामग्री नहीं मिली है और न ही उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार आ सका है।
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कुपोषित बच्चों को नहीं दी जा रही खास सुविधा
-तीतरों क्षेत्र के धानवा गांव निवासी गुलशिदा की तीन साल की बेटी शिखा कुपोषित है। गुलशिदा ने बताया कि उसे दो माह बाद अब खाद्य सामग्री मिली है। ऐसे में बेटी की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है। उसके गांव को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने गोद लिया हुआ है। उसके बाद भी कोई खास तव्वजो कुपोषित बच्चों को नहीं दी जा रही है।
-जिलाधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 18
-- मुख्य विकास अधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 36
--जिला कार्यक्रम अधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 77
-- जिला कृषि अधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 46
--बेसिक शिक्षा अधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 22
-- जिला कुष्ठ रोग अधिकारी के गोद लिए गांव तीन और कुपोषित बच्चों की संख्या 43
-पहले के मुकाबले गोद लिए गांव में कुपोषित बच्चों की सेहत में सुधार हो रहा है। विभाग का प्रयास है कि सभी बच्चे जल्द कुपोषण की स्थिति बाहर लाया जाए।
-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी

अपनी बेटी के साथ मीरपुर मोहनपुर निवासी मोनिका

अपनी बेटी के साथ मीरपुर मोहनपुर निवासी मोनिका- फोटो : SAHARANPUR

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