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तीन तलाक पर कोई भी कानून लाने से पहले सोचे सरकारः उलमा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:11 AM IST
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मौलाना नदीमुलवाजदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक को लेकर कानून बनाए जाने के मामले में फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि शरीयत में पहले से तीन तलाक को लेकर कानून बना हुआ है।
ऐसे में कोई भी नया कानून लाने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि नया कानून शरीयत कानून से न टकराए। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि तीन तलाक को लेकर जो मामला चल रहा है उसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद जैसी तंजीमें पैरोकारी कर रही हैं।
इस मामले में भी उनको हस्तक्षेप करना चाहिए। साथ ही मौलाना वाजदी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जल्दबाजी में कोई कदम न उठाए। किसी भी नए कानून को लाने से पहले यह भी सोचे कि यह धार्मिक कानून से टकरा तो नहीं रहा है।
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उन्होंने कहा कि जब पूर्व में केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाने से इंकार कर दिया था तो अब ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि फिर से इस मामले को उठाया जा रहा है।
तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को लेकर केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने का फैसला लेने की खबरों पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव व बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने दो टूक कहा कि यह गुजरात चुनाव को प्रभावित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
मंगलवार को अमर उजाला से दूरभाष पर बातचीत करते हुए जफरयाब जिलानी ने कहा कि तीन तलाक पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कानून बनाने के लिए कहा था। जिसमें सरकार ने इस पर किसी भी प्रकार का कानून बनाने की जरूरत होने से इंकार कर दिया था।
अब सरकार तीन तलाक को लेकर कानून बनाए जाने की खबरें बाहर निकालकर गुजरात चुनाव को मुतास्सिर (प्रभावित) करने का प्रयास कर रही है। ताकि मुसलमानों को भ्रमित कर इसमें उलझाया जा सके।
जफरयाब जिलानी ने यह भी कहा कि अभी तक तीन तलाक पर शीतकालीन सत्र में बिल लाए जाने के संबंध में सरकार के किसी भी जिम्मेदार का बयान सामने नहीं आया है। जिससे साफ है कि यह गुजरात चुनाव को प्रभावित करने वाला अमल है।
वहीं, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बाबरी मस्जिद अयोध्या में और अमन की मस्जिद लखनऊ में बनवाए जाने का प्रस्ताव पेश करने के मामले में जफरयाब जिलानी ने कहा कि वसीम रिजवी का बाबरी मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है।
इस मुद्दे पर शिया कम्यूनिटी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं और वह वसीम रिजवी को दरकिनार कर चुकी है। दरअसल वसीम रिजवी के खिलाफ सीबीआई जांच के लिए कागजात तैयार हो चुके हैं। इसलिए वह जांच से बचने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। जिसको खास तवज्जो देने की जरूरत नहीं है।
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ऐसे में कोई भी नया कानून लाने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि नया कानून शरीयत कानून से न टकराए। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि तीन तलाक को लेकर जो मामला चल रहा है उसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद जैसी तंजीमें पैरोकारी कर रही हैं।
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इस मामले में भी उनको हस्तक्षेप करना चाहिए। साथ ही मौलाना वाजदी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जल्दबाजी में कोई कदम न उठाए। किसी भी नए कानून को लाने से पहले यह भी सोचे कि यह धार्मिक कानून से टकरा तो नहीं रहा है।
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उन्होंने कहा कि जब पूर्व में केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाने से इंकार कर दिया था तो अब ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि फिर से इस मामले को उठाया जा रहा है।
तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को लेकर केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने का फैसला लेने की खबरों पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव व बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने दो टूक कहा कि यह गुजरात चुनाव को प्रभावित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
मंगलवार को अमर उजाला से दूरभाष पर बातचीत करते हुए जफरयाब जिलानी ने कहा कि तीन तलाक पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कानून बनाने के लिए कहा था। जिसमें सरकार ने इस पर किसी भी प्रकार का कानून बनाने की जरूरत होने से इंकार कर दिया था।
अब सरकार तीन तलाक को लेकर कानून बनाए जाने की खबरें बाहर निकालकर गुजरात चुनाव को मुतास्सिर (प्रभावित) करने का प्रयास कर रही है। ताकि मुसलमानों को भ्रमित कर इसमें उलझाया जा सके।
जफरयाब जिलानी ने यह भी कहा कि अभी तक तीन तलाक पर शीतकालीन सत्र में बिल लाए जाने के संबंध में सरकार के किसी भी जिम्मेदार का बयान सामने नहीं आया है। जिससे साफ है कि यह गुजरात चुनाव को प्रभावित करने वाला अमल है।
वहीं, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बाबरी मस्जिद अयोध्या में और अमन की मस्जिद लखनऊ में बनवाए जाने का प्रस्ताव पेश करने के मामले में जफरयाब जिलानी ने कहा कि वसीम रिजवी का बाबरी मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है।
इस मुद्दे पर शिया कम्यूनिटी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं और वह वसीम रिजवी को दरकिनार कर चुकी है। दरअसल वसीम रिजवी के खिलाफ सीबीआई जांच के लिए कागजात तैयार हो चुके हैं। इसलिए वह जांच से बचने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। जिसको खास तवज्जो देने की जरूरत नहीं है।