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वोट पाने में अव्वल, सवाल उठाने में फिसड्डी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:26 AM IST
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विधानसभा
- फोटो : AMAR UJALA
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सहारनपुर, 17 वीं विधान सभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सियासी उठापटक के बाद घोषित हुए सपा, बसपा, कांग्रेस, भाजपा और रालोद समेत सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी एक बार फिर चुनावी महासंग्राम में जीत की ताल ठोकने को तैयार है।
इंस्टीट्यूट फोर पॉलिसी रिसर्च स्टडीज ने विधान सभा सत्र में माननीयों की उपस्थिति और पूछे गए सवालों पर सर्वे किया है। सर्वे के मुताबिक अधिकांश विधायक अपने क्षेत्र की जनता की प्रमुख समस्याओं को विधानसभा में उठाने में फिसड्डी साबित हुए है।
यूपी की पहली विधान सभा सीट बेहट (सहारनपुर) से बसपा के टिकट पर महावीर सिंह राणा 31 फीसदी वोटर्स का विश्वास हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। राणा की विधानसभा के सात सत्रों में 74 फीसदी उपस्थिति रही है।
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पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने सिर्फ 14 ही सवाल पूछे है। किसी डिस्कशन में भी ये शामिल नहीं हुए है। नकुड़ के बसपा विधायक डॉ. धर्म सिंह सैनी की उपस्थिति तो 68 प्रतिशत रही, लेकिन वे भी अपनी जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने में फिसड्डी ही रहे है।
उन्होंने मात्र तीन ही सवाल पूछे है। सहारनपुर नगर के भाजपा विधायक राजीव गुंबर की उपस्थिति 81 प्रतिशत और सवाल 32 पूछे। राजीव गुंबर 2014 में उपचुनाव में राघव लखनपाल शर्मा के सांसद चुने जाने के बाद विधायक बने थे।
इनके अलावा सहारनपुर देहात के बसपा विधायक जगपाल, देवबंद के कांग्रेस विधायक माविया अली, रामपुर मनिहारान के बसपा विधायक रविंद्र कुमार मोल्हू और गंगोह के कांग्रेस (अब भाजपा में) विधायक प्रदीप चौधरी ने कोई भी जनहित का सवाल नहीं उठाया है।
विधानसभा में सिर्फ दर्शक बन कर शामिल होने वालों में हेमलता चौधरी, नवाजिश आलम, नूर सलीम राणा, अनिल कुमार, कपिल देव अग्रवाल, करतार सिंह भड़ाना, जमील अहमद कासमी, मनोज पारस, रुचि वीरा, मोहम्मद इकबाल, नाहिद हसन, गुलाम मोहम्मद, प्रभुदयाल वाल्मीकि ऐसे विधायक है, जिन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा है।
सपा विधायक उपस्थिति (78 फीसदी) में सबसे आगे रहे है, जबकि सवाल पूछने में फिसड्डी (औसत चार सवाल प्रति एमएलए) रहे है। बसपा विधायक उपस्थिति में 69 प्रतिशत और सवाल उठाने में 61 फीसदी रहे है।
कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति 71 फीसदी रही, जबकि 78 प्रतिशत सवाल पूछे है। भाजपाई विधायक सवाल पूछने में अव्वल रहे है। इन्होंने 94 फीसदी सवाल पूछे है जबकि उपस्थिति 73 प्रतिशत रही है। इनमें विधायक सुरेश राणा (177 सवाल), सत्य प्रकाश अग्रवाल (112), लक्ष्मीकांत वाजपेयी (126) प्रमुख है।
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इंस्टीट्यूट फोर पॉलिसी रिसर्च स्टडीज ने विधान सभा सत्र में माननीयों की उपस्थिति और पूछे गए सवालों पर सर्वे किया है। सर्वे के मुताबिक अधिकांश विधायक अपने क्षेत्र की जनता की प्रमुख समस्याओं को विधानसभा में उठाने में फिसड्डी साबित हुए है।
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यूपी की पहली विधान सभा सीट बेहट (सहारनपुर) से बसपा के टिकट पर महावीर सिंह राणा 31 फीसदी वोटर्स का विश्वास हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। राणा की विधानसभा के सात सत्रों में 74 फीसदी उपस्थिति रही है।
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पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने सिर्फ 14 ही सवाल पूछे है। किसी डिस्कशन में भी ये शामिल नहीं हुए है। नकुड़ के बसपा विधायक डॉ. धर्म सिंह सैनी की उपस्थिति तो 68 प्रतिशत रही, लेकिन वे भी अपनी जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने में फिसड्डी ही रहे है।
उन्होंने मात्र तीन ही सवाल पूछे है। सहारनपुर नगर के भाजपा विधायक राजीव गुंबर की उपस्थिति 81 प्रतिशत और सवाल 32 पूछे। राजीव गुंबर 2014 में उपचुनाव में राघव लखनपाल शर्मा के सांसद चुने जाने के बाद विधायक बने थे।
इनके अलावा सहारनपुर देहात के बसपा विधायक जगपाल, देवबंद के कांग्रेस विधायक माविया अली, रामपुर मनिहारान के बसपा विधायक रविंद्र कुमार मोल्हू और गंगोह के कांग्रेस (अब भाजपा में) विधायक प्रदीप चौधरी ने कोई भी जनहित का सवाल नहीं उठाया है।
विधानसभा में सिर्फ दर्शक बन कर शामिल होने वालों में हेमलता चौधरी, नवाजिश आलम, नूर सलीम राणा, अनिल कुमार, कपिल देव अग्रवाल, करतार सिंह भड़ाना, जमील अहमद कासमी, मनोज पारस, रुचि वीरा, मोहम्मद इकबाल, नाहिद हसन, गुलाम मोहम्मद, प्रभुदयाल वाल्मीकि ऐसे विधायक है, जिन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा है।
सपा विधायक उपस्थिति (78 फीसदी) में सबसे आगे रहे है, जबकि सवाल पूछने में फिसड्डी (औसत चार सवाल प्रति एमएलए) रहे है। बसपा विधायक उपस्थिति में 69 प्रतिशत और सवाल उठाने में 61 फीसदी रहे है।
कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति 71 फीसदी रही, जबकि 78 प्रतिशत सवाल पूछे है। भाजपाई विधायक सवाल पूछने में अव्वल रहे है। इन्होंने 94 फीसदी सवाल पूछे है जबकि उपस्थिति 73 प्रतिशत रही है। इनमें विधायक सुरेश राणा (177 सवाल), सत्य प्रकाश अग्रवाल (112), लक्ष्मीकांत वाजपेयी (126) प्रमुख है।