{"_id":"6924ba573edad9786309e36b","slug":"the-first-gas-plant-will-be-built-in-the-metropolis-methane-gas-will-be-produced-from-contaminated-water-saharanpur-news-c-30-1-smrt1053-163591-2025-11-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: महानगर में बनेगा पहला गैस प्लांट, दूषित पानी से तैयार होगी मीथेन गैस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: महानगर में बनेगा पहला गैस प्लांट, दूषित पानी से तैयार होगी मीथेन गैस
Tue, 25 Nov 2025 01:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 25 Nov 2025 01:34 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। महानगर में पहला गैस बॉटलिंग प्लांट बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। घरों से निकलने वाले दूषित पानी से मीथेन गैस तैयार होकर सिलिंडरों के जरिए वापस घरों में जाएगी और चूल्हे जलाने की काम आएगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत तैयार किए जा रहे 135 एमएलडी के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) परिसर में गैस बॉटलिंग प्लांट भी स्थापित होगा, जिससे सिलिंडर भरे जाएंगे।
250 करोड़ रुपये से तैयार किए जा रहे एसटीपी का कार्य अभी शुरुआती दौर में है, जो एक नवंबर 2025 को ही शुरू हुआ है। 31 अक्तूबर 2027 तक यह पूर्ण किया जाना है। शहरभर से निकल रहे 98 छोटे और बड़े नालों के पानी को पाइपलाइन के जरिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। एसटीपी में पानी को उपचारित कर ढमोला नदी में वापस छोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि एसटीपी में केवल दूषित पानी साफ करने का काम नहीं होगा, बल्कि दूषित पानी से मीथेन गैस भी तैयार होगी।
कार्यदायी संस्था गैस होल्डर और डायजेस्टर बनाकर देगी। साथ ही 900 स्क्वायरमीटर जगह छोड़ेगी, जिसमें गैस बॉटलिंग प्लांट तैयार होगा। प्लांट के टेंडर की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा पूरी की जाएगी, जिस भी फर्म को टेंडर होगा वह डायरेक्ट प्लांट से गैस सिलिंडर भरकर उनको बेचेगा।
विज्ञापन
-- -- --
ऐसे बनती है दूषित पानी से मीथेन गैस
दूषित पानी से मीथेन गैस, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से बनती है, जिसे मीथेनोजेन बैक्टीरिया बनाते हैं। यह प्रक्रिया तब होती है जब सीवेज और अन्य कार्बनिक कचरा ऑक्सीजन की कमी वाली जगहों पर सड़ता है, जैसे कि लैंडफिल या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में। जब पानी को सतह पर लाया जाता है, तो दबाव कम होने और तापमान बढ़ने से मीथेन गैस पानी से निकल जाती है। अवायवीय अपघटन ऐसी क्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में मीथेनोजेन नामक बैक्टीरिया कार्बनिक पदार्थों (जैसे मल और कचरा) को खाते हैं और उन्हें मीथेन गैस (CH₄) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में बदल देते हैं।
-- -- --
पानी जितना गंदा होगा गैस उतनी अधिक
गैस बॉटलिंग प्लांट वहां स्थापित किया जा रहा है, जहां प्रति एमएलडी पानी से 70 क्यूबिक मीटर मीथेन गैस तैयार हो, लेकिन माना जा रहा है कि सहारनपुर के नालों से पांवधोई और ढमोला नदी से बहने वाला पानी इतना दूषित है, जिसमें एक एमएलडी से 140 क्यूबिक मीटर तक गैस तैयार होगी। यानी पानी जितना दूषित होगा उससे उतनी अधिक गैस तैयार होगी।
-- -- --
एसटीपी की कार्यदायी संस्था गैस बॉटलिंग प्लांट के लिए गैस होल्डर और डायजेस्टर भी बनाकर देगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन प्लांट के टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण करेगा।
- संजीत कुमार कटियार, परियोजना प्रबंधक
विज्ञापन
250 करोड़ रुपये से तैयार किए जा रहे एसटीपी का कार्य अभी शुरुआती दौर में है, जो एक नवंबर 2025 को ही शुरू हुआ है। 31 अक्तूबर 2027 तक यह पूर्ण किया जाना है। शहरभर से निकल रहे 98 छोटे और बड़े नालों के पानी को पाइपलाइन के जरिए एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। एसटीपी में पानी को उपचारित कर ढमोला नदी में वापस छोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि एसटीपी में केवल दूषित पानी साफ करने का काम नहीं होगा, बल्कि दूषित पानी से मीथेन गैस भी तैयार होगी।
विज्ञापन
कार्यदायी संस्था गैस होल्डर और डायजेस्टर बनाकर देगी। साथ ही 900 स्क्वायरमीटर जगह छोड़ेगी, जिसमें गैस बॉटलिंग प्लांट तैयार होगा। प्लांट के टेंडर की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा पूरी की जाएगी, जिस भी फर्म को टेंडर होगा वह डायरेक्ट प्लांट से गैस सिलिंडर भरकर उनको बेचेगा।
विज्ञापन
ऐसे बनती है दूषित पानी से मीथेन गैस
दूषित पानी से मीथेन गैस, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से बनती है, जिसे मीथेनोजेन बैक्टीरिया बनाते हैं। यह प्रक्रिया तब होती है जब सीवेज और अन्य कार्बनिक कचरा ऑक्सीजन की कमी वाली जगहों पर सड़ता है, जैसे कि लैंडफिल या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में। जब पानी को सतह पर लाया जाता है, तो दबाव कम होने और तापमान बढ़ने से मीथेन गैस पानी से निकल जाती है। अवायवीय अपघटन ऐसी क्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में मीथेनोजेन नामक बैक्टीरिया कार्बनिक पदार्थों (जैसे मल और कचरा) को खाते हैं और उन्हें मीथेन गैस (CH₄) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में बदल देते हैं।
पानी जितना गंदा होगा गैस उतनी अधिक
गैस बॉटलिंग प्लांट वहां स्थापित किया जा रहा है, जहां प्रति एमएलडी पानी से 70 क्यूबिक मीटर मीथेन गैस तैयार हो, लेकिन माना जा रहा है कि सहारनपुर के नालों से पांवधोई और ढमोला नदी से बहने वाला पानी इतना दूषित है, जिसमें एक एमएलडी से 140 क्यूबिक मीटर तक गैस तैयार होगी। यानी पानी जितना दूषित होगा उससे उतनी अधिक गैस तैयार होगी।
एसटीपी की कार्यदायी संस्था गैस बॉटलिंग प्लांट के लिए गैस होल्डर और डायजेस्टर भी बनाकर देगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन प्लांट के टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण करेगा।
- संजीत कुमार कटियार, परियोजना प्रबंधक