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Saharanpur News: अच्छे भाव से खिले मशरूम उत्पादकों के चेहरे
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। मांग बढ़िया होने के चलते इस बार मशरूम के भाव में इजाफा हुआ है। गत वर्ष इस समय 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिकने वाली मशरूम का भाव 100 से 130 रुपये चल रहा है।
जनपद में इस समय 157 किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। गत वर्ष जिले में मशरूम का उत्पादन 300 टन से अधिक रहा था।
जनपद में वर्ष भर मशरूम की खेती होती है। इनमें बटन, ढिंगरी और मिल्की मशरूम शामिल हैं। मिल्की मशरूम की खेती के लिए उपयुक्त समय जून महीने से सितंबर माह है। बटन मशरूम की फसल अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या आस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। मशरूम का उत्पादन लेने के बाद बची हुई कंपोस्ट को खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से भूमि मे जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ती है। मशरूम विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बाजार में अच्छी मांग और बढ़िया भाव के चलते युवाओं का रुझान मशरूम की खेती की ओर बढ़ रहा है। 100 क्विंटल कंपोस्ट में सफेद बटन मशरूम का औसत उत्पादन 40 क्विंटल, ढिंगरी मशरूम 60 क्विंटल और मिल्की मशरूम 45 से 50 क्विंटल तक हो जाता है। जनपद के उत्पादक स्थानीय बाजार के साथ ही देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों में सप्लाई करते हैं।
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पोषक तत्वों से भरपूर है मशरूम
मशरूम में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इसमें ढाई से तीन प्रतिशत तक प्रोटीन, चार से छह प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट, 0.4 से 0.6 फीसदी वसा होती है। इसके अलावा विटामिन बी, डी एवं फोलिक एसिड भी इसमें होता है। इसका सेवन खून की कमी को दूर करने में सहायक है। पोटेशियम की अधिकता के चलते मशरूम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मददगार रहती है।
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सहारनपुर। मांग बढ़िया होने के चलते इस बार मशरूम के भाव में इजाफा हुआ है। गत वर्ष इस समय 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिकने वाली मशरूम का भाव 100 से 130 रुपये चल रहा है।
जनपद में इस समय 157 किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। गत वर्ष जिले में मशरूम का उत्पादन 300 टन से अधिक रहा था।
जनपद में वर्ष भर मशरूम की खेती होती है। इनमें बटन, ढिंगरी और मिल्की मशरूम शामिल हैं। मिल्की मशरूम की खेती के लिए उपयुक्त समय जून महीने से सितंबर माह है। बटन मशरूम की फसल अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या आस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। मशरूम का उत्पादन लेने के बाद बची हुई कंपोस्ट को खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से भूमि मे जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ती है। मशरूम विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बाजार में अच्छी मांग और बढ़िया भाव के चलते युवाओं का रुझान मशरूम की खेती की ओर बढ़ रहा है। 100 क्विंटल कंपोस्ट में सफेद बटन मशरूम का औसत उत्पादन 40 क्विंटल, ढिंगरी मशरूम 60 क्विंटल और मिल्की मशरूम 45 से 50 क्विंटल तक हो जाता है। जनपद के उत्पादक स्थानीय बाजार के साथ ही देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों में सप्लाई करते हैं।
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पोषक तत्वों से भरपूर है मशरूम
मशरूम में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इसमें ढाई से तीन प्रतिशत तक प्रोटीन, चार से छह प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट, 0.4 से 0.6 फीसदी वसा होती है। इसके अलावा विटामिन बी, डी एवं फोलिक एसिड भी इसमें होता है। इसका सेवन खून की कमी को दूर करने में सहायक है। पोटेशियम की अधिकता के चलते मशरूम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मददगार रहती है।
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