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शेखपुरा की नहीं बदली सूरत, समस्याएं जस की तस
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सहारनपुर। 20 हजार से मतदाताओं वाला गांव शेखपुरा कदीम, बसपा सांसद ने आदर्श ग्राम योजना के तहत इसे गोद लिया, लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ। गांव की सूरत में कोई बदलाव नहीं हुआ, जो समस्याएं पहले थीं, वह आज भी जस की तस हैं। ऐसे में सांसद आदर्श ग्राम योजना बेमानी साबित हो रही है।
गांव शेखपुरा कदीम सहारनपुर शहर से करीब चार किलोमीटर की दूरी है। गांव का विस्तार भी लगातार हो रहा है, जिससे ग्रामीणों की अपेक्षाएं भी खूब हैं। लोग यहां प्रदूषित पानी को लेकर भी परेशान रहते हैं और कहते हैं कि अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। गांव में उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा वर्ष 2014 में 1100 किलोलीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक में स्थापित किया, जिससे अब पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन गांव के विभिन्न रास्तों पर जलभराव की वजह से बड़ी समस्या रहती है। गांव के प्राथमिक विद्यालय के निकट ही तालाब है, जो कचरे और घास से अटा हुआ है। देखने पर लगता है जैसे यह कोई खेत है। विद्यालय के बाहर भी कचरे के ढेर लगे हैं। इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालय धर्मशाला परिसर में मिली जमीन पर बने भवन में संचालित हो रहा है। इस परिसर में भी घास खड़ी है। ऐसी अनेक समस्याएं गांव में व्याप्त हैं। जब बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने इस गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था तो, उम्मीद जगी थी कि गांव की सूरत बदलेगी, लेकिन ऐसा कोई कार्य नहीं हो सका, जो ग्रामीणों को सुखद अहसास करा सके।
सांसद ने कब गोद लिया गांव, नहीं जानते ग्रामीण
शेर सिंह का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि सांसद ने गांव को गोद लिया है, क्योंकि अब तक सांसद की तरफ से यहां कोई कार्य नहीं कराया गया। संदीप पाल और देवव्रत चंदेल कहते हैं कि मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर ही जलभराव रहता है। वह आईजीआरएस पोर्टल पर कई शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन समाधान कुछ नहीं हुआ।
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मोहम्मद असलम कहते हैं कि एक समय था, जब तालाब में साफ पानी रहता था, आज सिर्फ घास दिखाई देती है, पानी नहीं। गंदगी इतनी है कि तालाब के निकट खड़ा होना दूभर है। अतिक्रमण के कारण तालाब सिमट भी चुका है, जबकि आबादी के बीच इस तालाब का सुंदरीकरण कराकर अच्छा माहौल दिया जा सकता है।
संसद में सवाल उठाया, अधिकारियों को लिखे 10 पत्र : सांसद
बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान भी मानते हैं कि गांव शेखपुरा कदीम में आदर्श ग्राम योजना के तहत कार्य नहीं हो पाए हैं, क्योंकि बार बार पत्राचार करने के बावजूद अधिकारी कार्ययोजना तक नहीं बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 बार अधिकारियों को पत्र लिख चुका हूं और संसद में भी यह सवाल उठाया था कि आदर्श ग्राम योजना का क्या लाभ है, जब विलेज विकास योजना तक के बारे में अधिकारी गंभीर नहीं है। साथ ही जिला स्तरीय बैठक में भी यह मुद्दा उठा चुका हूं।
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गांव शेखपुरा कदीम सहारनपुर शहर से करीब चार किलोमीटर की दूरी है। गांव का विस्तार भी लगातार हो रहा है, जिससे ग्रामीणों की अपेक्षाएं भी खूब हैं। लोग यहां प्रदूषित पानी को लेकर भी परेशान रहते हैं और कहते हैं कि अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। गांव में उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा वर्ष 2014 में 1100 किलोलीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक में स्थापित किया, जिससे अब पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन गांव के विभिन्न रास्तों पर जलभराव की वजह से बड़ी समस्या रहती है। गांव के प्राथमिक विद्यालय के निकट ही तालाब है, जो कचरे और घास से अटा हुआ है। देखने पर लगता है जैसे यह कोई खेत है। विद्यालय के बाहर भी कचरे के ढेर लगे हैं। इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालय धर्मशाला परिसर में मिली जमीन पर बने भवन में संचालित हो रहा है। इस परिसर में भी घास खड़ी है। ऐसी अनेक समस्याएं गांव में व्याप्त हैं। जब बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने इस गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था तो, उम्मीद जगी थी कि गांव की सूरत बदलेगी, लेकिन ऐसा कोई कार्य नहीं हो सका, जो ग्रामीणों को सुखद अहसास करा सके।
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सांसद ने कब गोद लिया गांव, नहीं जानते ग्रामीण
शेर सिंह का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि सांसद ने गांव को गोद लिया है, क्योंकि अब तक सांसद की तरफ से यहां कोई कार्य नहीं कराया गया। संदीप पाल और देवव्रत चंदेल कहते हैं कि मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर ही जलभराव रहता है। वह आईजीआरएस पोर्टल पर कई शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन समाधान कुछ नहीं हुआ।
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मोहम्मद असलम कहते हैं कि एक समय था, जब तालाब में साफ पानी रहता था, आज सिर्फ घास दिखाई देती है, पानी नहीं। गंदगी इतनी है कि तालाब के निकट खड़ा होना दूभर है। अतिक्रमण के कारण तालाब सिमट भी चुका है, जबकि आबादी के बीच इस तालाब का सुंदरीकरण कराकर अच्छा माहौल दिया जा सकता है।
संसद में सवाल उठाया, अधिकारियों को लिखे 10 पत्र : सांसद
बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान भी मानते हैं कि गांव शेखपुरा कदीम में आदर्श ग्राम योजना के तहत कार्य नहीं हो पाए हैं, क्योंकि बार बार पत्राचार करने के बावजूद अधिकारी कार्ययोजना तक नहीं बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 बार अधिकारियों को पत्र लिख चुका हूं और संसद में भी यह सवाल उठाया था कि आदर्श ग्राम योजना का क्या लाभ है, जब विलेज विकास योजना तक के बारे में अधिकारी गंभीर नहीं है। साथ ही जिला स्तरीय बैठक में भी यह मुद्दा उठा चुका हूं।