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बस अड्डे का सपना नहीं हुआ साकार
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सहारनपुर। मंडल मुख्यालय होने के बावजूद एक बस अड्डा यात्रियों के नहीं मिल पाया। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा शहर के बीच बस अड्डा होने के कारण वहां हर समय जाम की स्थिति रहती है, साथ ही हादसे का भी खतरा बना रहता है।
सहारनपुर रोडवेज बस अड्डा, घंटाघर जैसे चौराहों के करीब है और उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के कई मार्गों को जाने वाली बस इसी रास्ते से जाते हैं। जिसकी वजह से जाम की समस्या बनी रहती है। शहर में और व्यस्त चौराहों से होकर रोडवेज के गुजरने से कई बार दुर्घटनाओं की भी आशंका बनी रहती है। आलम ये है कि हर मिनट उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू, हिमाचल सहित कई राज्यों की बसें इसी डिपो से होकर निकलती हैं। जिसकी वजह से लगभग 24 घंटे बसें इसी व्यस्त मार्ग से होकर गुजरती हैं। यात्री अंतरराज्यीय बस अड्डे का सपना लिए 2019 का इंतजार करते रहे। रोडवेज की ओर से पिछले कुछ महीनों में 12 वातानुकूलित बसें संचालित की गईं, जिससे यात्रियों को राहत तो मिली, लेकिन मंडल मुख्यालय होने के कारण रोडवेज को अब एक बड़ा बस अड्डा चाहिए, जो यात्री सुविधाओं से पूरी तरह से लैस हो। हालांकि रोडवेज के आला अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल 2020 में नए बस अड्डे का सपना साकार हो जाएगा।
यात्रियों की डिमांड की पूरी
यात्रियों की डिमांड पर रोडवेज की तरफ से बसों का बेड़ा समय-समय पर बढ़ाया गया, लेकिन एक आधुनिक बस अड्डे की कल्पना को मूर्त रूप नहीं मिल सका। 2019 रोडवेज के लिए आय का एक बड़ा साधन बना।
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बेड़े में यात्रियों को और सुविधा का इंतजार
रोडवेज बसों के बेड़े में सहारनपुर डिपो में फिलहाल 210 बसें शामिल हैं। बसों के बेड़े में तकरीबन 12 वातानुकूलित बसें हैं।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार का कहना है कि नए साल में यात्रियों को बड़ा तोहफा मिलने जा रहा। अंतरराज्यीय बसों के संचालन के लिए नया बस अड्डा दिल्ली रोड पर लगभग फाइनल हो गया है। मार्च से अप्रैल के बीच रजिस्ट्री हो जाएगी। यात्री सुविधाओं से लैस बस अड्डा बनेगा। वॉल्वो सहित सभी सेवा संचालित होंगी। फ़िलहाल भी यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
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सहारनपुर रोडवेज बस अड्डा, घंटाघर जैसे चौराहों के करीब है और उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के कई मार्गों को जाने वाली बस इसी रास्ते से जाते हैं। जिसकी वजह से जाम की समस्या बनी रहती है। शहर में और व्यस्त चौराहों से होकर रोडवेज के गुजरने से कई बार दुर्घटनाओं की भी आशंका बनी रहती है। आलम ये है कि हर मिनट उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू, हिमाचल सहित कई राज्यों की बसें इसी डिपो से होकर निकलती हैं। जिसकी वजह से लगभग 24 घंटे बसें इसी व्यस्त मार्ग से होकर गुजरती हैं। यात्री अंतरराज्यीय बस अड्डे का सपना लिए 2019 का इंतजार करते रहे। रोडवेज की ओर से पिछले कुछ महीनों में 12 वातानुकूलित बसें संचालित की गईं, जिससे यात्रियों को राहत तो मिली, लेकिन मंडल मुख्यालय होने के कारण रोडवेज को अब एक बड़ा बस अड्डा चाहिए, जो यात्री सुविधाओं से पूरी तरह से लैस हो। हालांकि रोडवेज के आला अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल 2020 में नए बस अड्डे का सपना साकार हो जाएगा।
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यात्रियों की डिमांड की पूरी
यात्रियों की डिमांड पर रोडवेज की तरफ से बसों का बेड़ा समय-समय पर बढ़ाया गया, लेकिन एक आधुनिक बस अड्डे की कल्पना को मूर्त रूप नहीं मिल सका। 2019 रोडवेज के लिए आय का एक बड़ा साधन बना।
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बेड़े में यात्रियों को और सुविधा का इंतजार
रोडवेज बसों के बेड़े में सहारनपुर डिपो में फिलहाल 210 बसें शामिल हैं। बसों के बेड़े में तकरीबन 12 वातानुकूलित बसें हैं।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार का कहना है कि नए साल में यात्रियों को बड़ा तोहफा मिलने जा रहा। अंतरराज्यीय बसों के संचालन के लिए नया बस अड्डा दिल्ली रोड पर लगभग फाइनल हो गया है। मार्च से अप्रैल के बीच रजिस्ट्री हो जाएगी। यात्री सुविधाओं से लैस बस अड्डा बनेगा। वॉल्वो सहित सभी सेवा संचालित होंगी। फ़िलहाल भी यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।