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Saharanpur News: इज्जतघरों पर निगम की बेशर्मी का ताला, लाज बचाने को दीवारों का सहारा

Wed, 19 Nov 2025 12:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Wed, 19 Nov 2025 12:04 AM IST
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The corporation's shamelessness locks the houses of honor, resorting to walls to save shame
सहारनपुर। इज्जतघरों (शौचालय) पर नगर निगम ने ताले जड़े हुए हैं। जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। हालत यह हो गई है कि लघुशंका के लिए लोगों को दीवारों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों का नाम इज्जतघर रखने का पहला मामला वाराणसी में आया था, जिसकी सराहना की गई थी। इसके बाद कई शहरों में इन्हें इज्जतघर कहा जाने लगा था। महानगर में भी स्वच्छता पर काफी काम हुआ है। करोड़ों रुपया खर्च किया गया है। सामुदायिक के साथ ही सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कई शौचालय ऐसी जगह बना दिए गए, जहां उनकी जरूरत नहीं थी। इतना ही नहीं, चार से पांच साल पहले बने अनेक शौचालयों के अभी तक ताले नहीं खुले हैं।
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नतीजा, लोग खुले में जाने को मजबूर हैं। 19 नवंबर यानी आज विश्व शौचालय दिवस है। ऐसे में महानगर में बने शौचालयों की पड़ताल की गई। फुलवारी आश्रम के पास चार साल पहले बने शौचालय पर ताले जड़े हैं। टाइल्स उतर रही है। लिंटर के सरिए बाहर आ चुके हैं। वॉशबेसिन से पाइप और पानी गायब है। लोग इसी की बगल में खुले में लघुशंका करते हैं। दालमंडी पुल के पास आधुनिक पेशाबघर बना है, लेकिन पानी नहीं है। गंदगी के कारण लोग इसके बाहर खुले में लघुशंका करते हैं।
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जिला अस्पताल के पीछे बना शौचालय भी कई साल से तालों में कैद है। प्लस्तर उतरकर गिर चुका है। शौचालय का गिरना बाकी है। इंदिरा कॉलोनी, पुराना कलसिया रोड, बासठ फुटा रोड सहित अनेक जगहों पर इसी तरह शौचालयों की सेवा तालों में बंद है।

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महिलाओं की लाज बचाने को नाकाफी इंतजाम
जुबली पार्क में कई साल पहले पिंक शौचालय बना था, लेकिन बाजार में आने वाली ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। टूटे दरवाजे महिलाओं की लाज बचाने के लिए नाकाफी हैं। पूरा शौचालय सीलन के कारण खराब हो चुका है। टाइल्स उखड़कर गायब हो चुकी हैं। फ्लैश टूटे पड़े हैं। इसी की बगल में महिलाओं के लिए शौचालय बनाया गया है, जो बदहाल है।
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महानगर में शौचालयों की स्थिति
कुल शौचालय---------------116
सार्वजनिक शौचालय-----------86
सामुदायिक शौचालय-----------30
एसबीएम में बने निजी शौचालय----5000
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