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Saharanpur News: परियोजनाओं की बुनियाद पर सीएम ने किया सत्ता का शिलान्यास
Fri, 08 May 2026 12:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 08 May 2026 12:33 AM IST
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सहारनपुर। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में भाजपा जुट गई है। ऐसा इसलिए कि तीन महीने में तीन बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिले में आ चुके हैं। सरकार का पूरा फोकस विकास योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण पर है। भाजपा परियोजनाओं और शिलान्यास की बुनियाद पर सत्ता बनाए रखने के प्रयास है। पार्टी विकास को लेकर लंबी सियासी लकीर खींचती हुई दिखाई दे रही है।
सहारनपुर से चुनावी शंखनाद करना भाजपा के मुफीद है। यह ऐसा टोटका है, जिसे पार्टी आजमाती रही है और जीतती भी रही है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर से चुनावी शंखनाद किया था। नतीजा रहा कि पार्टी दस साल बाद केंद्र में लौटी। वहीं विधानसभा के 2017 चुनावों का शंखनाद भी सहारनपुर से ही किया गया था।
पार्टी के कद्दावर नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक जनता के बीच यहीं संदेश देते रहे हैं कि विपक्षी पार्टियों ने सहारनपुर समेत पश्चिमी यूपी को एक टापू बनाकर रख दिया। यहां पर विकास योजनाओं को लागू नहीं किया जाता। सत्तासीन होने के बाद पार्टी ने सहारनपुर पर खास फोकस किया। कई विकास परियोजनाओं को न सिर्फ लागू किया, बल्कि उन्हें धरातल पर भी उतारा। यही से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत को भी साधने का प्रयास किया जाता रहा है। इस वर्ष की शुरुआत से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विभिन्न योजनाओं को लोकार्पण किया गया।
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इसमें नोएडा का जेवर हवाई अड्डा, दिल्ली से मेरठ तक नमो रैपिड रेल और अप्रैल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर शामिल है। अब मुख्यमंत्री ने देवबंद से सहारनपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है। जिले में 2131 करोड़ रुपये की 325 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। संदेश साफ है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को विकास के मुद्दे पर ही लड़ेगी। बाकी अन्य मुद्दे कानून, शिक्षा, रोजगार और औद्योगीकरण पहरेदारों की तरह साथ रहेंगे।
- 2022 के विधानसभा प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती
विधानसभा 2022 के चुनाव परिणाम को दोहराने और लोकसभा चुनाव में मिली हार को जीत में बदलने के लिए भाजपा एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। 2017 में प्रचंड लहर के बाद भी पार्टी जिले की सात में से चार विधानसभा सीट जीत सकी थी। वहीं, 2022 के चुनाव में एक सीट की बढ़ोतरी करते हुए भाजपा को पांच सीट मिली। वहीं लोकसभा 2024 का चुनाव खराब सपने की तरह रहा। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मंडल में हार का मुंह देखना पड़ा। सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर की लोकसभा सीट पार्टी के हाथों से निकल गई। इन तीनों जिलों पर सरकार का अच्छा खासा ध्यान है।
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सहारनपुर से चुनावी शंखनाद करना भाजपा के मुफीद है। यह ऐसा टोटका है, जिसे पार्टी आजमाती रही है और जीतती भी रही है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर से चुनावी शंखनाद किया था। नतीजा रहा कि पार्टी दस साल बाद केंद्र में लौटी। वहीं विधानसभा के 2017 चुनावों का शंखनाद भी सहारनपुर से ही किया गया था।
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पार्टी के कद्दावर नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक जनता के बीच यहीं संदेश देते रहे हैं कि विपक्षी पार्टियों ने सहारनपुर समेत पश्चिमी यूपी को एक टापू बनाकर रख दिया। यहां पर विकास योजनाओं को लागू नहीं किया जाता। सत्तासीन होने के बाद पार्टी ने सहारनपुर पर खास फोकस किया। कई विकास परियोजनाओं को न सिर्फ लागू किया, बल्कि उन्हें धरातल पर भी उतारा। यही से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत को भी साधने का प्रयास किया जाता रहा है। इस वर्ष की शुरुआत से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विभिन्न योजनाओं को लोकार्पण किया गया।
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इसमें नोएडा का जेवर हवाई अड्डा, दिल्ली से मेरठ तक नमो रैपिड रेल और अप्रैल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर शामिल है। अब मुख्यमंत्री ने देवबंद से सहारनपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है। जिले में 2131 करोड़ रुपये की 325 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। संदेश साफ है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को विकास के मुद्दे पर ही लड़ेगी। बाकी अन्य मुद्दे कानून, शिक्षा, रोजगार और औद्योगीकरण पहरेदारों की तरह साथ रहेंगे।
- 2022 के विधानसभा प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती
विधानसभा 2022 के चुनाव परिणाम को दोहराने और लोकसभा चुनाव में मिली हार को जीत में बदलने के लिए भाजपा एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। 2017 में प्रचंड लहर के बाद भी पार्टी जिले की सात में से चार विधानसभा सीट जीत सकी थी। वहीं, 2022 के चुनाव में एक सीट की बढ़ोतरी करते हुए भाजपा को पांच सीट मिली। वहीं लोकसभा 2024 का चुनाव खराब सपने की तरह रहा। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मंडल में हार का मुंह देखना पड़ा। सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर की लोकसभा सीट पार्टी के हाथों से निकल गई। इन तीनों जिलों पर सरकार का अच्छा खासा ध्यान है।