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Saharanpur News: दुल्हन मेहंदी रचाए बैठी रही, कुवैत से नहीं पहुंचा दूल्हा
Thu, 12 Mar 2026 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 12 Mar 2026 12:35 AM IST
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छुटमलपुर। ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण कुवैत में नौकरी कर रहा दूल्हा अपनी ही शादी में घर नहीं पहुंच सका। इसके चलते उसकी दुल्हन मेहंदी रचाए बैठी रह गई। शादी की सारी तैयारियां धरी रह गईं। परिजनों को ऐन वक्त पर शादी स्थगित करनी पड़ी।
क्षेत्र के गांव मुसैल निवासी करणी सेना के ब्लाक अध्यक्ष जबर सिंह की बेटी की पारुल की शादी अंबाला के बतौड़ निवासी राजीव राणा के साथ तय हुई थी। राजीव पिछले कई साल से कुवैत में नौकरी करता है। पिछले साल वह पारुल को देखने आया था तब रिश्ता तय होने के साथ ही यह भी पक्का हुआ था कि शादी अगले साल मार्च में होगी। उसकी हिसाब से राजीव ने अपनी दो माह की छुट्टी मंजूर करा ली थी, लेकिन 28 फरवरी से चल रही लड़ाई के चलते उसे स्वदेश लौटने के लिए फ्लाइट नहीं मिली। इसके राजीव और पारुल के परिजनों ने शादी की सारी तैयारियां कर रखी थीं। कार्ड तक बंट गए थे। बेटी को दहेज में दिए जाने वाले सामान को भी उसकी ससुराल भेज दिया गया था। हलवाई का सामान भी घर आ गया था। दुल्हन बनी पारुल के हल्द बान तक की रस्म पूरी हो गई थी लेकिन आठ मार्च को राजीव ने फोन करके बताया अभी देश लौटने की कोई उम्मीद नहीं है।
इसके बाद शादी स्थगित करनी पड़ी। जबर सिंह ने बताया कि उनकी होने वाले दामाद से रोज बात होती थी। उन्हें उम्मीद थी कि शादी से एक दिन पहले तक भी वह आ जाएंगे, लेकिन ऐसा मुमकिन न होने पर शादी को ऐन वक्त स्थगित करना पड़ा।
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क्षेत्र के गांव मुसैल निवासी करणी सेना के ब्लाक अध्यक्ष जबर सिंह की बेटी की पारुल की शादी अंबाला के बतौड़ निवासी राजीव राणा के साथ तय हुई थी। राजीव पिछले कई साल से कुवैत में नौकरी करता है। पिछले साल वह पारुल को देखने आया था तब रिश्ता तय होने के साथ ही यह भी पक्का हुआ था कि शादी अगले साल मार्च में होगी। उसकी हिसाब से राजीव ने अपनी दो माह की छुट्टी मंजूर करा ली थी, लेकिन 28 फरवरी से चल रही लड़ाई के चलते उसे स्वदेश लौटने के लिए फ्लाइट नहीं मिली। इसके राजीव और पारुल के परिजनों ने शादी की सारी तैयारियां कर रखी थीं। कार्ड तक बंट गए थे। बेटी को दहेज में दिए जाने वाले सामान को भी उसकी ससुराल भेज दिया गया था। हलवाई का सामान भी घर आ गया था। दुल्हन बनी पारुल के हल्द बान तक की रस्म पूरी हो गई थी लेकिन आठ मार्च को राजीव ने फोन करके बताया अभी देश लौटने की कोई उम्मीद नहीं है।
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इसके बाद शादी स्थगित करनी पड़ी। जबर सिंह ने बताया कि उनकी होने वाले दामाद से रोज बात होती थी। उन्हें उम्मीद थी कि शादी से एक दिन पहले तक भी वह आ जाएंगे, लेकिन ऐसा मुमकिन न होने पर शादी को ऐन वक्त स्थगित करना पड़ा।
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