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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   The blast left their ears ringing and numb; the workers shudder at the memory of the scene.

Saharanpur News: धमाके से कान हो गए थे सुन्न, मंजर याद कर सिहर उठते हैं मजदूर

Sun, 26 Jul 2026 01:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sun, 26 Jul 2026 01:19 AM IST
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The blast left their ears ringing and numb; the workers shudder at the memory of the scene.
गंगोह(सहारनपुर)। कुंडाबसी गांव स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट को याद कर मजदूर सिहर उठते हैं। उनका कहना है कि धमाके से कान सुन्न हो गए थे। काफी देर तक कुछ सुनाई नहीं दिया। दो साथियों की मौत का मंजर याद कर किसी भी मजदूर ने रात के समय खाना नहीं किया। अब उन्हें चिंता सता रही है कि फैक्टरी बंद हो चुकी है और उन्हें घर लौटना पड़ेगा।
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- मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के चांदपुरा निवासी अविनाश ने बताया कि वह अन्य साथियों के साथ फैक्टरी के दूसरे हिस्से में पैकिंग और अन्य काम कर रहा था। दीपराज, संदीप, आकाश और राहुल पीछे वाले हिस्से में पटाखों के लिए बारूद का मसाला तैयार कर रहे थे। अचानक इतना तेज धमाका हुआ कि कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आया कि क्या हो गया। टिन शेड का एक टुकड़ा सिर में आकर लगा, जिस कारण चोट लगी। चारों तरफ धुआं और धूल फैल गई।
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- खंडवा जिले के फिफराड़ गांव निवासी आकाश ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरी फैक्टरी हिल गई। ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ा बम फट गया हो। कुछ देर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। काफी देर तक कान से कुछ सुनाई भी नहीं दिया।
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- खरगोन जिले के दोड़वा गांव निवासी रोहित ने बताया कि वह करीब एक माह पहले आया था, जिस समय विस्फोट हुआ फैक्टरी के दूसरे हिस्से में काम कर रहा था। बाद में पता चला कि दो साथियों की मौत हो गई और दो का अब तक कोई पता नहीं चल सका।
- खंडवा जिले के बांगरदा निवासी पीयूष ने बताया कि विस्फोट के बाद सभी बहुत घबरा गए थे। सबसे पहले हमने अपने घर फोन कर परिवार वालों को बताया कि हम सुरक्षित हैं। धमाका इतना तेज था कि अब भी कानों में गूंज रहा है।
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साथियों के बिछड़ने का गम, भोजन तक नहीं कर पाए मजदूर
विस्फोट के बाद नया कुंडा बसी के ग्राम प्रधान राव सनव्वर ने मानवता का परिचय देते हुए सभी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था कराई। हालांकि सदमे में डूबे अधिकांश मजदूर खाना तक नहीं खा सके। उनका कहना था कि जिन साथियों के साथ वह रोज काम करते थे, उनकी दर्दनाक मौत और लापता साथियों की चिंता मन में बनी हुई है। विस्फोट का भयावह दृश्य और धमाके की गूंज बार-बार आंखों के सामने आ रही थी, जिसके कारण किसी का भी भोजन करने का मन नहीं हुआ।
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भगवान ने बचा लिया, नहीं तो मैं भी जिंदा नहीं होता
गांव बसी निवासी मजदूर सुशील कुमार ने बताया कि वह और उसकी पत्नी वर्षा फैक्टरी में काम करते हैं। सुशील बारूद का मसाला तैयार करता था, जबकि उसकी पत्नी पैकिंग का कार्य करती है। शुक्रवार को किसी कारणवश वह फैक्टरी नहीं गया और अपने गांव के ही फरमान के साथ करीब दो किलोमीटर दूर लकड़ी काटने का काम कर रहा था। उसकी पत्नी फैक्टरी में मौजूद थी। सुशील ने बताया कि धमाके की आवाज और कंपन इतनी तेज थी कि उनके हाथ से आरी तक छूटकर गिर गई। घटना की जानकारी मिलते ही वह घबरा गया। बाद में पत्नी के सुरक्षित होने की सूचना मिलने पर राहत की सांस ली। सुशील का कहना है कि अगर मैं भी फैक्टरी गया होता तो शायद आज जिंदा नहीं होता।

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एक माह से नहीं मिला मेहनताना
फैक्टरी में कार्यरत मजदूरों ने बताया कि वह फैक्टरी से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित एक भवन में रह रहे थे। उनका कहना है कि उन्हें यहां काम करते हुए लगभग एक माह हो चुका है। इस दौरान कुछ मजदूरों ने निर्धारित समय से अधिक ओवरटाइम भी किया, लेकिन अब तक उन्हें मेहनताने के रूप में एक रुपया भी नहीं मिला था। अब मजदूरों को चिंता सता रही है कि फैक्टरी बंद हो चुकी है। ऐसे में अब उन्हें वापस घर लौटना पड़ेगा।
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