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धूमधाम से मनाई ठाकुर जी की छठी
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सहारनपुर, गंगोह। श्री सुदर्शन क्लब द्वारा श्री ठाकुर जी महाराज का छठी पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भजन संध्या और भंडारे का आयोजन भी किया गया।
पीठ बाजार स्थित मंदिर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में भक्तों को जानकारी देते हुए पंडित अमन शर्मा ने बताया कि कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद मोहमाया के प्रताप से कारागार के समस्त प्रहरी सो गए। आकाशवाणी हुई और वासुदेव ने रातों रात उनको गोकुल में नंद के घर पहुंचा दिया। कंस जब कारागार में आया तो उसको बताया गया कि लड़की का जन्म हुआ है। कंस ने उसको मारने की कोशिश की, लेकिन वह यह कहते हुए आकाश में बिजली बन गई कि तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है। कंस ने पूतना को आदेश दिया कि जितने भी छह दिन के बच्चे हैं, उनको मार दिया जाए। पूतना जब गोकुल पहुंची तो यशोदा ने बालकृष्ण को छिपा दिया। बालकृष्ण को छह दिन हो गए थे, लेकिन उनकी छठी नहीं हुई और न ही नामकरण हुआ। कालांतर में यशोदा ने कान्हा के जन्म से 364 दिन बाद सप्तमी को छठी पूजन किया। तभी से श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाने लगी। बच्चों की छठी करने की परंपरा भी तभी से पड़ी। इसके उपरांत छठी गीत गाते हुए श्री ठाकुर जी महाराज की दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित की गई। अंकित अग्रवाल ने श्री गणेश स्तुति से भजन संध्या का शुभारंभ किया। दिल्ली से आये संजीव दिलवाला एवं स्थानीय भजन गायकों ने भगवान श्री ठाकुर जी महाराज के भजन एवं छठी के गीतों से भक्तों का मन मोह लिया। इससे पूर्व ठाकुर जी को स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराए गए। लड्डू गोपाल जी का पूजन हिमांशु विश्वकर्मा-स्वाति विश्वकर्मा एवं नरेश ललित ने कराया। बृजमोहन वर्मा, करण गोयल, अवनीश अग्रवाल, वैभव अग्रवाल, अचल गोयल, अनुज मित्तल, दीपांशु गोयल, वरूण शर्मा, युवराज मोगली, ईशु शर्मा, अंकुर अग्रवाल, अनमोल बंसल आदि रहे।
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पीठ बाजार स्थित मंदिर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में भक्तों को जानकारी देते हुए पंडित अमन शर्मा ने बताया कि कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद मोहमाया के प्रताप से कारागार के समस्त प्रहरी सो गए। आकाशवाणी हुई और वासुदेव ने रातों रात उनको गोकुल में नंद के घर पहुंचा दिया। कंस जब कारागार में आया तो उसको बताया गया कि लड़की का जन्म हुआ है। कंस ने उसको मारने की कोशिश की, लेकिन वह यह कहते हुए आकाश में बिजली बन गई कि तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है। कंस ने पूतना को आदेश दिया कि जितने भी छह दिन के बच्चे हैं, उनको मार दिया जाए। पूतना जब गोकुल पहुंची तो यशोदा ने बालकृष्ण को छिपा दिया। बालकृष्ण को छह दिन हो गए थे, लेकिन उनकी छठी नहीं हुई और न ही नामकरण हुआ। कालांतर में यशोदा ने कान्हा के जन्म से 364 दिन बाद सप्तमी को छठी पूजन किया। तभी से श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाने लगी। बच्चों की छठी करने की परंपरा भी तभी से पड़ी। इसके उपरांत छठी गीत गाते हुए श्री ठाकुर जी महाराज की दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित की गई। अंकित अग्रवाल ने श्री गणेश स्तुति से भजन संध्या का शुभारंभ किया। दिल्ली से आये संजीव दिलवाला एवं स्थानीय भजन गायकों ने भगवान श्री ठाकुर जी महाराज के भजन एवं छठी के गीतों से भक्तों का मन मोह लिया। इससे पूर्व ठाकुर जी को स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराए गए। लड्डू गोपाल जी का पूजन हिमांशु विश्वकर्मा-स्वाति विश्वकर्मा एवं नरेश ललित ने कराया। बृजमोहन वर्मा, करण गोयल, अवनीश अग्रवाल, वैभव अग्रवाल, अचल गोयल, अनुज मित्तल, दीपांशु गोयल, वरूण शर्मा, युवराज मोगली, ईशु शर्मा, अंकुर अग्रवाल, अनमोल बंसल आदि रहे।
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