ये है आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना: पकड़े गए संदिग्ध आतंकी के खौफनाक राज, मदरसे पर उठे बड़े सवाल
सहारनपुर से पकड़े गए संदिग्ध आतंकी के खौफनाक राज खुले हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि मदरसे में उसे दाखिला कैसे मिल गया।
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विस्तार
वेस्ट बंगाल की एसटीएफ द्वारा पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों ने बंगाल से पश्चिमी यूपी तक अपना नेटवर्क बना लिया था। दोनों आरोपी युवाओं को आतंकी संगठन अलकायदा से जोड़ने में लगे हुए थे। आतंकी के यहां रहने की जानकारी स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग को नहीं थी।
वहीं, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि सहारनपुर आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना है। यहां बेखौफ होकर आतंकी रहते हैं, जो देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, जबकि स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस को इसकी जानकारी समय रहते नहीं लग पाती है। लगातार आतंकियों के पकड़े जाने के मामले सामने आ रहे हैं।
उधर, वेस्ट बंगाल की एसटीएफ की कार्रवाई से एक बार फिर हड़कंप मच गया है। एसटीएफ द्वारा शहर के एक मदरसे से पकड़ा गया संदिग्ध आतंकी फैजल अहमद उर्फ शाहिद मजूमदार व बेंगलुरु से गिरफ्तार उसका साथी हसनथ शेख निवासी मालदा आतंकी संगठन अलकायदा के संपर्क में लंबे समय से थे। दोनों युवाओं को अलकायदा से जोड़ने की मुहिम में जुटे थे। वह पश्चिम बंगाल से लेकर पश्चिमी यूपी में स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे।
मदरसे में कैसे मिला दाखिला, खड़े हो रहे सवाल
आरोपी फैजल को शहर के मदरसे में कैसे दाखिला मिल गया और वह आसानी से यहां रहकर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा। इसकी भनक न ही खुफिया विभाग को लगी और न ही स्थानीय पुलिस को पता चल पाया है। अब उसके पकड़े जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि फैजल के संपर्क में रहे कई लोग अब पुलिस की रडार पर आ गए हैं। एटीएस भी इसको लेकर सक्रिय हो गई है, जो यह पता करने में लगी है कि मदरसे में कब से फैजल रह रहा था और उसे कैसे दाखिला मिल गया।
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आतंकी कनेक्शन से है पुराना नाता
-- 12 अगस्त 2022 में एटीएस ने जैश-ए-मुहम्मद और तहरीक-ए-तालिबान का आतंकी मुहम्मद नदीम को कोतवाली गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडाकला से पकड़ा।
-- फरवरी 2021 में थाना कुतुबशेर क्षेत्र की एकता कॉलोनी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी पिता-पुत्र को एटीएस ने पकड़ा था। दोनों आरोपी 20 साल से ठिकाने बदलकर सहारनपुर रहे।
-- दो वर्ष पूर्व देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली निवासी कुलगाम (जम्मू-कश्मीर) और आकिब अहमद मलिक निवासी पुलवामा की गिरफ्तारी हुई।
-- 2019 में देवबंद से पांच बांग्लादेशी पकड़े गए।
-- 2016 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीमों ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन के बाहर से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख को पकड़ा।
-- 2010 में पाकिस्तानी जासूस शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी को पटियाला पुलिस ने हकीकतनगर से गिरफ्तार किया, जो देवराज सहगल के नाम से यहां आठ वर्षों से रहा रहा था। इसने भारतीय नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी।
-- अयोध्या में हुए बम विस्फोट में तीतरों निवासी डॉ. इरफान को पकड़ा गया।
-- 2001 में आतंकी गतिविधियों के चलते मुफ्ती इसरार को पकड़ा गया।
-- 1994 में तीन ब्रिटिश नागरिकों को बंधक बनाकर आतंकियों ने खाताखेड़ी में रखा था। इन्हें छुड़ाने के लिए हुई मुठभेड़ में इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव शहीद हुए थे।
-- किफायत उल्लाह उर्फ जाफर अहमद उर्फ अताउरर्हमान मोहल्ला कस्साबान सरसावा का रहने वाला था, जो बाद में जम्मू-कश्मीर चला गया था, फिर आतंकी संगठन हूजी का चीफ बना था।
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खुफिया विभाग और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। इसको लेकर विशेष अभियान भी चलाया जाएगा, जो लोग संदिग्धों को संरक्षण देते हैं, उनके के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विपिन ताडा