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छात्रों को किताबी शिक्षा के साथ संस्कार भी सिखाएं शिक्षक
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सहारनपुर। एडी बेसिक योगराज सिंह ने तीनों जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एक ओर जहां प्रार्थना सभाएं अनिवार्य रूप से कराने को कहा है। वहीं सभाओं के दौरान विद्यार्थियों को प्रेरक प्रसंग तथा देश और राज्य की बड़ी खबरें, राजनीति, इतिहास आदि के बारे में भी बताने को कहा है। उन्होंने कहा है कि बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ ही संस्कार भी सिखाए जाए।
एडी बेसिक ने कहा कि शैक्षिक सत्र 2022-23 की शुभारंभ एक अप्रैल से हो चुका है। ग्रीष्मावकाश के बाद 16 जून से विद्यालय पुन: खुल चुके हैं। बीते वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के परिवेश में काफी परिवर्तन हुआ है। हम सबका दायित्व बनता है कि पूरे मनोयोग से कार्य करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार लाएं। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, एआरपी, एसआरजी की जिम्मेदारी तय करते हुए सभी को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी कक्षाओं में पठन पाठन की व्यवस्था व पढ़ाने के तरीके पर ध्यान दें और खुद भी कक्षा में पढ़ाएं। पाठ्यक्रम निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष पूर्ण किया जा रहा है या नहीं। इसका भी आंकलन किया जाए। विद्यालयों में पढ़ाई के साथ ही प्रार्थना सभा अनिवार्य रूप से हो। विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में काम आने वाली अच्छी बातें और संस्कार सिखाए जाएं। जो छात्र बौद्धिक रूप से कमजोर हैं उन पर अतिरिक्त समय के साथ कार्य किया जाए।
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एडी बेसिक ने कहा कि शैक्षिक सत्र 2022-23 की शुभारंभ एक अप्रैल से हो चुका है। ग्रीष्मावकाश के बाद 16 जून से विद्यालय पुन: खुल चुके हैं। बीते वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के परिवेश में काफी परिवर्तन हुआ है। हम सबका दायित्व बनता है कि पूरे मनोयोग से कार्य करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार लाएं। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, एआरपी, एसआरजी की जिम्मेदारी तय करते हुए सभी को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी कक्षाओं में पठन पाठन की व्यवस्था व पढ़ाने के तरीके पर ध्यान दें और खुद भी कक्षा में पढ़ाएं। पाठ्यक्रम निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष पूर्ण किया जा रहा है या नहीं। इसका भी आंकलन किया जाए। विद्यालयों में पढ़ाई के साथ ही प्रार्थना सभा अनिवार्य रूप से हो। विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में काम आने वाली अच्छी बातें और संस्कार सिखाए जाएं। जो छात्र बौद्धिक रूप से कमजोर हैं उन पर अतिरिक्त समय के साथ कार्य किया जाए।
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