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Saharanpur News: सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ उतरे शिक्षक
Tue, 16 Sep 2025 12:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 16 Sep 2025 12:29 AM IST
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सहारनपुर। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े शिक्षक सड़क पर उतरे। उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
प्रदेश संयुक्त महामंत्री रविंद्र पंवार के नेतृत्व में सोमवार को शिक्षक हकीकतनगर स्थित रामलीला मैदान पर इकट्ठा हुए। यहां से कलक्ट्रेट पहुंचे, जहां जिलाधिकारी मनीष बंसल को ज्ञापन सौंपा। रविंद्र पंवार ने कहा कि एक सितंबर 2025 को न्यायालय ने सिविल अपील में निर्णय दिया है, जिसमें सभी सेवारत शिक्षकों के लिए उनकी नियुक्ति तिथि चाहे जो भी रही हो टीईटी अनिवार्य किया है।
इस निर्णय ने देश के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका को संकट में डाल दिया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 के तहत स्पष्ट रूप से दो श्रेणियां मान्य की गई हैं।
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पहली वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक, जिन्हें टीईटी से छूट दी गई है। दूसरा वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक, जिनके लिए एक निश्चित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। न्यायालय के नए निर्णय ने तथ्यों की अनदेखी की है, साथ ही इस निर्णय से देश भर में करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन देने वालों में जिला मंत्री रजनीश सहगल, जोगेंद्र कुमार, गौरव सिंघल, रोबिन मित्तल, तरुण भोला, अमित चौहान, योगेंद्र मलिक, विनय कुमार, अशोक रावल, शिव कुमार सिंह, जगवीर सिंह आदि शामिल रहे।
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प्रदेश संयुक्त महामंत्री रविंद्र पंवार के नेतृत्व में सोमवार को शिक्षक हकीकतनगर स्थित रामलीला मैदान पर इकट्ठा हुए। यहां से कलक्ट्रेट पहुंचे, जहां जिलाधिकारी मनीष बंसल को ज्ञापन सौंपा। रविंद्र पंवार ने कहा कि एक सितंबर 2025 को न्यायालय ने सिविल अपील में निर्णय दिया है, जिसमें सभी सेवारत शिक्षकों के लिए उनकी नियुक्ति तिथि चाहे जो भी रही हो टीईटी अनिवार्य किया है।
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इस निर्णय ने देश के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका को संकट में डाल दिया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 के तहत स्पष्ट रूप से दो श्रेणियां मान्य की गई हैं।
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पहली वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक, जिन्हें टीईटी से छूट दी गई है। दूसरा वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक, जिनके लिए एक निश्चित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। न्यायालय के नए निर्णय ने तथ्यों की अनदेखी की है, साथ ही इस निर्णय से देश भर में करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन देने वालों में जिला मंत्री रजनीश सहगल, जोगेंद्र कुमार, गौरव सिंघल, रोबिन मित्तल, तरुण भोला, अमित चौहान, योगेंद्र मलिक, विनय कुमार, अशोक रावल, शिव कुमार सिंह, जगवीर सिंह आदि शामिल रहे।