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जिले में 1,180 दिन में टीबी ने ली 877 मरीजों की जान

Wed, 23 Mar 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 11:39 PM IST
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TB took the lives of 877 patients in the district in 1,180 days
सहारनपुर। केंद्र सरकार ने देश को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन आंकड़े उठाकर देखें तो एक्टिव मरीज घटने की बजाय बढ़े हैं। जानकर हैरानी होगी बीते चार साल यानी वर्ष 2019 से अब तक 877 लोग टीबी की वजह से जान गंवा चुके हैं, जो डराने वाला आंकड़ा है। हालांकि टीबी कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जिसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन अपनी लापरवाही की वजह से मरीज लगातार जान गंवा रहे हैं। इसके अलावा बीते वर्ष की तुलना में टीबी के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
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वर्ष 2021 में जनपद में टीबी के मार्च तक 3,155 एक्टिव मरीज थे, जो सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से इलाज करा रहे थे, लेकिन इस बार यह संख्या करीब 3,270 के आसपास पहुंच गई है। यानी मरीज बढ़े हैं। यह स्थिति तब है, जबकि सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज पूरी तरह मुफ्त है। जहां जांच से लेकर दवाओं और भर्ती करने तक की सुविधा मिलती है। इसके अलावा टीबी के मरीजों को बीमारी के हिसाब से भोजन और 500 रुपये हर महीने भी दिए जाते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, साथ ही लोग बीमारी के प्रति सचेत हुए हैं, जो खुद सामने आकर जांच करा रहे हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर बीमारी को लेकर लोगों की लापरवाही बरतना भी इसके लिए जिम्मेदार रहा है। डॉ. अनिल वोहरा का कहना है कि टीबी जानलेवा उस स्थिति में होती है, जब मरीज इलाज में लापरवाही बरतता है और बीच में ही इलाज छोड़ता है और परहेज नहीं करता है। अन्यथा यदि मरीज चिकित्सक की सलाह से छह से नौ माह का नियमित इलाज कराए तो टीबी को आसानी से हराया जा सकता है। ऐसे में टीबी से घबराएं नहीं, बल्कि समय से और पूरा इलाज कराएं।
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वर्ष कुल मरीज बच्चे महिला पुरुष ठीक हुए एमडीआर मौत
2019 9,476 889 4,025 5,393 8,575 224 316
2020 7,493 452 3,302 4,190 9,436 207 262
2021 9,497 580 4,368 5,126 6,819 240 239
2022 3,270 --- --- --- --- 18 60
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- बीमारी के सामान्य लक्षण
- तीन सप्ताह या अधिक समय से खांसी
- कभी-कभी थूक में खून आना
- बुखार, विशेषत: रात के समय
- वजन कम होना, भूख में कमी आना
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मरीजों को गोद ले सकती हैं संस्थाएं
स्वयं सेवी संस्थाएं या कोई भी व्यक्ति टीबी के मरीजों को गोद ले सकता है। बीते वर्ष भी टीबी सैनिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कई संस्थाओं ने पहुंचकर टीबी से जूझ रहे 176 बच्चों को गोद लिया था। यानी जिन बच्चों को गोद लिया उनके इलाज होने तक इलाज और भरण पोषण की जिम्मेदारी संस्थाओं ने ली थी। विश्व क्षय रोग दिवस पर यानी बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी सैनिटोरियम में कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां टीबी के मरीजों को गोद लेने के लिए संस्थाएं पहुंचेंगी।
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टीबी रोगी खोज अभियान आज से
जिले में टीबी के मरीजों की खोज के लिए अभियान आज से शुरू हो रहा है। अभियान 24 मार्च से 13 अप्रैल तक चलेगा। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर घर जाकर टीबी के संदिग्ध मरीजों को चिह्नित कर उनकी जांच कराएंगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर इलाज भी कराया जाएगा। अभियान के तहत ही बुधवार को टीबी सैनिटोरियम में सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को प्रशिक्षित किया गया।
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