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यौमे अशुरा पर या हुसैन की सदाओं से गूंजा आसमान
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:13 AM IST
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करबला के शहीदों की याद में मातमी में सोगवार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुहर्रम की 10 तारीख को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के शहीदों की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। अकीदत मंदो ने जंजीर में बंधी छुरियों, कमाह एवं हाथों से मातम किया। सोगवारों के जिस्म से खून रिस रहा था। जंजीर व कमाह का मातम बड़ी इमाम बारगाह, जामा मस्जिद होता हुआ करबला तक पहुंचा। सोगवारों ने करबला पहुंचकर फाका खोला।
रविवार को हजरत इमाम हुसैन एवं करबला के शहीदों की याद में निकाले गए मातमी जुलूस की शुरुआत बड़ी इमाम बारगाह से हुई। जुलूस जामा मस्जिद कला चौक फव्वारा पहुंचा, जहां पर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी ने तकरीरें कीं।
जुलूस में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, भैंसा बुग्गी पर बैठे छोटे बच्चे काले कपडे़ पहने थे और हाथों में काले निशान लिए हुए नारा ऐ हैदरी या अली, हुसैनियत जिंदाबाद, यजिदयत मुर्दाबाद, नारा ए तकबीर अल्लाहो अकबर की सदाए बुलंद करते चल रहे थे। उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर यूसुफ हैदर जैदी चल रहे थे। उनके पीछे अंजुमने इमामिया व अंजुमने अकबरिया चल रही थी।
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जुलूस बड़ी इमाम बारगाह से पुल सब्जी मंडी, जामा मस्जिद कलां, मोर गंज, भगत सिंह चौक, खुमरान रोड, पुरानी चुंगी, महाराज सिंह कॉलेज के सामने से होता हुआ पुराना घास कांटा स्थित करबला पहुंचा। अकीदत मंदों ने जंजीर में बंधी छुरियों कमाह एवं हाथों से मातम किया।
अंजुमने इमामिया में नौहा पढ़ने वालों में मिर्जा अयाज मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मिर्जा मुमताज, अली मेंहदी, शौजब रजा शामिल रहे। अन्जुमन इमामिया के संचालकों में मिर्जा मेहरबान, लियाकत हुसैन अनवार जैदी शामिल रहे।
अन्जुमने अकबरिया मे नौहा पढ़ने वालों में सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, रहबर जैदी, सन्नी आब्दी, मानू आब्दी, अदनान, गयाज जैदी, शबीह हैदर शामिल रहे। अंजुमन अकबरिया के संचालकों में नदीम जैदी, कमर काजमी, इकबाल, नगीन, अथर जैदी, शादाब आब्दी, तुन्नू हसन, अख्तर अली जैदी, जिशान हैदर शामिल रहे।
अंजुमने अकबरिया के साथ फूलों से सजा जुलजनाह चल रहा था। जिसकी लगाम जावेद हैदर, तनवीर हैदर, हुसैन अब्बास व अकबर अब्बास ने पकड़ रखी थी तथा जुलूस के बीच में ताजिया चल रहे थे।
जुलूस का संचालन सैय्यद जावेद हैदर जै़दी एडवोकेट ने किया। जुलूस में इशरत हुसैन, जमीर काजमी, सिबतैन रजा, कौसर अब्बास, काजी अकरम, मंजर हुसैन काजमी, प्यारे मियां, सकलैन रजा, सलीम काजमी, सलामत हुसैन, फरहत हुसैन, साजिद काजमी, जैगम अब्बास, नियाज हैदर जैदी, इन्तेजार मेंहदी, जिया अब्बास, रियाज हैदर, शबाब हैदर, मिर्जा अहसान, सफदर अली, अजहर काजमी, मेहताब अली, रियासत हवारी, आसिफ हवारी, फिरोज हैदर, कैसर अब्बास, सकलैन रजा, समीर हैदर, शाहाब हुसैन, नदीम जैदी, नजमी काजमी, आलम काजमी, सलमान, इमरान, फराज जैदी, अली जैब काजमी, अबुतालिब शामिल रहे।
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रविवार को हजरत इमाम हुसैन एवं करबला के शहीदों की याद में निकाले गए मातमी जुलूस की शुरुआत बड़ी इमाम बारगाह से हुई। जुलूस जामा मस्जिद कला चौक फव्वारा पहुंचा, जहां पर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी ने तकरीरें कीं।
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जुलूस में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, भैंसा बुग्गी पर बैठे छोटे बच्चे काले कपडे़ पहने थे और हाथों में काले निशान लिए हुए नारा ऐ हैदरी या अली, हुसैनियत जिंदाबाद, यजिदयत मुर्दाबाद, नारा ए तकबीर अल्लाहो अकबर की सदाए बुलंद करते चल रहे थे। उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर यूसुफ हैदर जैदी चल रहे थे। उनके पीछे अंजुमने इमामिया व अंजुमने अकबरिया चल रही थी।
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जुलूस बड़ी इमाम बारगाह से पुल सब्जी मंडी, जामा मस्जिद कलां, मोर गंज, भगत सिंह चौक, खुमरान रोड, पुरानी चुंगी, महाराज सिंह कॉलेज के सामने से होता हुआ पुराना घास कांटा स्थित करबला पहुंचा। अकीदत मंदों ने जंजीर में बंधी छुरियों कमाह एवं हाथों से मातम किया।
अंजुमने इमामिया में नौहा पढ़ने वालों में मिर्जा अयाज मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मिर्जा मुमताज, अली मेंहदी, शौजब रजा शामिल रहे। अन्जुमन इमामिया के संचालकों में मिर्जा मेहरबान, लियाकत हुसैन अनवार जैदी शामिल रहे।
अन्जुमने अकबरिया मे नौहा पढ़ने वालों में सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, रहबर जैदी, सन्नी आब्दी, मानू आब्दी, अदनान, गयाज जैदी, शबीह हैदर शामिल रहे। अंजुमन अकबरिया के संचालकों में नदीम जैदी, कमर काजमी, इकबाल, नगीन, अथर जैदी, शादाब आब्दी, तुन्नू हसन, अख्तर अली जैदी, जिशान हैदर शामिल रहे।
अंजुमने अकबरिया के साथ फूलों से सजा जुलजनाह चल रहा था। जिसकी लगाम जावेद हैदर, तनवीर हैदर, हुसैन अब्बास व अकबर अब्बास ने पकड़ रखी थी तथा जुलूस के बीच में ताजिया चल रहे थे।
जुलूस का संचालन सैय्यद जावेद हैदर जै़दी एडवोकेट ने किया। जुलूस में इशरत हुसैन, जमीर काजमी, सिबतैन रजा, कौसर अब्बास, काजी अकरम, मंजर हुसैन काजमी, प्यारे मियां, सकलैन रजा, सलीम काजमी, सलामत हुसैन, फरहत हुसैन, साजिद काजमी, जैगम अब्बास, नियाज हैदर जैदी, इन्तेजार मेंहदी, जिया अब्बास, रियाज हैदर, शबाब हैदर, मिर्जा अहसान, सफदर अली, अजहर काजमी, मेहताब अली, रियासत हवारी, आसिफ हवारी, फिरोज हैदर, कैसर अब्बास, सकलैन रजा, समीर हैदर, शाहाब हुसैन, नदीम जैदी, नजमी काजमी, आलम काजमी, सलमान, इमरान, फराज जैदी, अली जैब काजमी, अबुतालिब शामिल रहे।