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उलमा बोले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लाम की जानकारी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 01 Apr 2017 01:41 PM IST
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सहारनपुर के देवबंद में सूर्य नमस्कार व नमाज की क्रियाएं मिलती जुलती होने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर जहां इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
वहीं उलमा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी को इस्लाम की सही जानकारी नहीं है इसी वजह से वह ऐसा बयान दे रहे हैं। दारुल उलूम जकरिया के उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लाम की जानकारी न होने की वजह से गलतफहमी है।
मुख्यमंत्री का यह कहना कि नमाज व सूर्य नमस्कार एक जैसी क्रियाएं हैं सरासर गलत है। वहीं दारुल उलूम वक्फ के नायब मोहतमिम एवं फतवा विभाग के नायब प्रभारी मुफ्ती अहसान कासमी ने कहा कि सरकार द्वारा किसी पर कोई नियम जबरन थोपा नहीं गया है।
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जिसका धर्म इजाजत देता है वह करे नहीं इजाजत देता है तो न करे। सूर्य नमस्कार व नमाज दोनों में समानता नहीं है। अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि सूर्य नमस्कार व नमाज अलग-अलग हैं।
योगी आदित्यनाथ का यह कहना दोनों में समानता है गलत है। नमाज दिन में पांच बार पढ़ी जाती है। जबकि सूर्य नमस्कार दिन में केवल एक बार ही किया जाता है। इसलिए सूर्य नमस्कार हिंदुओं के लिए इबादत है और नमाज मुसलमानों के लिए।
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वहीं उलमा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी को इस्लाम की सही जानकारी नहीं है इसी वजह से वह ऐसा बयान दे रहे हैं। दारुल उलूम जकरिया के उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लाम की जानकारी न होने की वजह से गलतफहमी है।
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मुख्यमंत्री का यह कहना कि नमाज व सूर्य नमस्कार एक जैसी क्रियाएं हैं सरासर गलत है। वहीं दारुल उलूम वक्फ के नायब मोहतमिम एवं फतवा विभाग के नायब प्रभारी मुफ्ती अहसान कासमी ने कहा कि सरकार द्वारा किसी पर कोई नियम जबरन थोपा नहीं गया है।
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जिसका धर्म इजाजत देता है वह करे नहीं इजाजत देता है तो न करे। सूर्य नमस्कार व नमाज दोनों में समानता नहीं है। अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि सूर्य नमस्कार व नमाज अलग-अलग हैं।
योगी आदित्यनाथ का यह कहना दोनों में समानता है गलत है। नमाज दिन में पांच बार पढ़ी जाती है। जबकि सूर्य नमस्कार दिन में केवल एक बार ही किया जाता है। इसलिए सूर्य नमस्कार हिंदुओं के लिए इबादत है और नमाज मुसलमानों के लिए।