फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Survey conducted on artisans associated with wood carving industry

वुड कार्विंग उद्योग से जुड़े कारीगरों को लेकर किया सर्वे

Fri, 30 Aug 2019 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Aug 2019 11:54 PM IST
विज्ञापन
Survey conducted on artisans associated with wood carving industry
वुड कार्विंग की दुकान में सजे उत्पाद - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। वुड कार्विंग उद्योग को लेकर एक सर्वे सामने आया है, जिसमें इस उद्योग के मौजूदा हालात और भविष्य में बेहतरी का खाका खींचा गया है। सर्वे की रिपोर्ट डेवलपमेंट कमिश्नर हैंडीक्राफ्ट (डीसीएच) और मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स को भेजी गई है। उसमें इस उद्योग को बढ़ावा के लिए कई प्रस्ताव रखे गए हैं। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि कारीगरों की आमदनी अपेक्षाकृत कम है।
विज्ञापन

यह सर्वे मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स की सहायता से कराया गया। सर्वे को डाक्टर पूनम दूबे, अभिषेक कुमार और उनकी टीम ने किया है। पूनम दूबे ने बताया कि करीब तीन महीने तक सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग को लेकर सर्वे किया गया है। वुड कार्विंग उद्योग से जुड़े कारोबारियों और कारीगरों से बातचीत की गई। प्रश्नावली बनाकर उनसे सवाल पूछे गए।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में सर्वे की रिपोर्ट तैयार करके मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स को भेज दी गई है। उसमें बताया है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में लकड़ी की उपलब्धता तो है, लेकिन वर्ष 2000 के बाद से शीशम आपूर्ति तुलनात्मक रूप से कम है। उद्योग के डिजिटलीकरण को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया थी। व्यापारियों को लगता है कि सभी हितधारकों के बीच पारदर्शिता के कारण डिजिटलीकरण के बाद उनका लाभ कम हो जाएगा। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि डिजिटलीकरण की प्रणाली से बहुत अधिक जागरूक और आशंकित नहीं हैं और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डिजिटलीकरण के वास्तविक लाभ के लिए खुद को तैयार नहीं किया है। उद्योग को बढ़ावा देने और सुझाव देने के लिए टैक्स के बोझ को कम करने, कारीगरों के कल्याण, बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी उन्नयन, बाजार की सुविधा, कच्चे माल की उपलब्धता की बातें कहीं गईं। डाक्टर पूनम दूबे और अभिषेक कुमार का कहना है कि वुड कार्विंग उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कलस्टर गठन, लकड़ी की पर्याप्त उपलब्धता, डिजिटलीकरण, स्वदेशी माल बिक्री को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य होना जरूरी है। ताकि इस कारोबार को देश और दुनिया में बढ़ावा दिया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

कारीगरों की स्थिति
डाक्टर पूनम दूबे ने बताया कि कारीगरों की औसत साक्षरता दर और आमदनी को लेकर भी सर्वे हुआ। उसमें कारीगरों के औसत परिवार के सदस्य संख्या - 7, आश्रित सदस्यों- 4.39 और आत्म-निर्भर सदस्यों- 2.33 से कम थी। अधिकांश कारीगर नियमित रूप से केवल लकड़ी की नक्काशी के काम में लगे हुए हैं, जो अन्य उपयुक्त वैकल्पिक कार्यों की अनुपलब्धता के कारण है। डेटा विश्लेषण से यह परिलक्षित होता है कि अधिकांश कारीगर नक्काशी करने और कुछ पॉलिशिंग, कारपेंटिंग और परिष्करण कार्य में लगे हैं।
आर्थिक स्थिति
लकड़ी पर नक्काशी करने वाले कारीगरों की औसत वार्षिक आय पर प्रश्नावली सर्वेक्षण ने संकेत दिया कि 56.52 प्रतिशत कारीगरों ने औसत वार्षिक आय एक से डेढ़ लाख और 28.40 प्रतिशत कारीगरों ने अपनी औसत वार्षिक आय डेढ़ से दो लाख रुपये बताई। इससे स्पष्ट है कि कारीगरों की आय तुलनात्मक रूप से कम है और इसलिए उन्हें आय के कुछ वैकल्पिक स्रोत की आवश्यकता होती है। बच्चों की शिक्षा के संबंध में 53.27 प्रतिशत कारीगर जवाब देते हैं उनके सभी बच्चे नियमित स्कूल जा रहे हैं। फोकस समूहों के साथ चर्चा में पता चला कि आर्थिक स्थिति और कम पारिश्रमिक के कारण लकड़ी की नक्काशी के काम को अपनाने के लिए इच्छुक नहीं हैं।
सर्वेक्षण में दिए गए सुझाव
-- उत्तर प्रदेश वन विकास निगम को वन डिपो की स्थापना के लिए विशेष रूप से वुडक्राफ्ट उद्योग के लिए उपयुक्त प्रजातियों पर विचार करना चाहिए
-- लकड़ी के कुशल उपयोग के लिए बेहतर उपकरणों के साथ स्थानीय आरा मिलों को आधुनिक बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
-- लकड़ी के व्यापक विकल्प के रूप में अद्वितीय विशेषताओं हस्तकला काम करने वाली कुछ अन्य प्रजातियों की खोज के लिए शोध की आवश्यकता है।
-- वन अनुसंधान संस्थान द्वारा उपयुक्त विभिन्न प्रजातियों पर हुए शोध के निष्कर्षों को प्रचारित करने की आवश्यकता है।
-- सहारनपुर शिल्प की अनूठी विशेषता के साथ डिजाइन के विकास में नवाचार, उपकरण के उन्नयन की आवश्यकता है।
-- प्रौद्योगिकी उन्नयन, कौशल विकास, प्रशिक्षण, निर्यात संवर्धन, हस्तशिल्प समूहों के विकास आदि के लिए सामान्य सुविधाएं केंद्रों को मजबूत किया जाना चाहिए।
-- कारीगरों सहित सभी हितधारकों के बीच अंतर्राष्ट्रीय बाजार के लिए पर्यावरण के अनुकूल प्रमाणित हस्तकला के मूल्य और मांग के बारे में पर्याप्त ज्ञान बनाने की आवश्यकता है।

-- उपयुक्त बाजार आउटलेट, उत्पाद की कीमतों का मानकीकरण / एकरूपता, पर्यटकों के गंतव्य के साथ खुदरा दुकानों के साथ संबंध, उपयोगी उपहार आइटम, स्थानीय हस्तशिल्प पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करें और एक स्थानीय ब्रांडिंग द्वारा मूल्य जोडने की आवश्यकता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed