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सुप्रीम रोक सराहनीय: उलमा बोले-एकता और भाईचारे की जीत, आस्था की बुनियाद पर था निर्णय

Mon, 22 Jul 2024 05:49 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 22 Jul 2024 05:49 PM IST
सार

कांवड मार्गों पर दुकानदारों की पहचान उजागर करने के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उलमा ने प्रतिक्रिया में कोर्ट के फैसले को ऐतिसाहिक बताया है।

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Supreme Courts stay is commendable: Ulema said decision was based on faith
कारी इस्हाक गोरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांवड मार्गों पर दुकानदारों की पहचान उजागर करने के शासन प्रशासन के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इस पर उलमा ने प्रतिक्रिया में कोर्ट के फैसले को ऐतिसाहिक बताया। साथ ही कहा कि शासन का यह निर्णय आस्था की बुनियाद पर लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर बता दिया कि देश संविधान से चलता है। 

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जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह हिंदुस्तान की एकता और भाईचारे की जीत है। कोर्ट ने संविधान के मूल्यों की रक्षा की है। यह फैसला हमारे समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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उन्होंने कहा कि भारत एक विविधता में एकता का देश है, जहां हर धर्म और समुदाय को स्वतंत्रता का पूरा अधिकार है। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि न्यायपालिका हमारे देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए एक मिसाल है। तंजीम इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जितना स्वागत किया जाए वे कम है।

शासन प्रशासन का यह फैसला संविधान नहीं बल्कि आस्था की बुनियाद लिया गया फैसला था। जिसकी वजह से हिंदू-मुस्लिमों के बीच नफरत को बढ़ावा मिल रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए यह बता दिया कि देश आस्था की आस्था से नहीं बल्कि संविधान से चलता है। उन्होंने कहा कि फैसले से समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा और यह हमारी एकता को और मजबूत करेगा।

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